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रंगीन कामुक कहानिया
बाप ने बेटी को चोद कर बीबी का दर्जा दिया
उनका लंड पूरी तरह से खड़ा था और मेरी चूत के ऊपर चुभ रहा था. मैं अपने चूची को अब्बा के सीने में जोर से सटा रही थी. मेरी सांस तेज़ हो चली थी और दिल जोर जोर से धड़क रहा था . अब्बा ने अपनी बाहों को मेरी पीठ पर रखा और मेरे बदन को कस कर अपनी शरीर की तरफ खीचने लगे और मेरी चूची को अपने सीने से जोर से दबाने लगे. मैंने किसी तरह का प्रतिरोध नही किया . अब हम एक दुसरे से आलिंगन थे लेकिन कपडे पहने हुए ही थे . मैंने अपना बुर से उनके लंड पर दवाब बनाना शुरू किया .मैंने जान बूझ कर पेंटी और ब्रा नहीं पहना था . अब्बा ने मेरी जांघो पर हाथ फेरना चालू किया . और हाथ फेरते फेरते मेरी नंगी गांड पर हाथ फेरने लगे . अब मै समझ गयी कि अब्बा अब मेरे वश में आ सकते हैं . मैंने जान बुझ कर जागने का नाटक किया और धीरे से कहा - अब्बा मुझे गुदगुदी हो रही है. अब्बा ने कहा - कुछ नहीं होगा. तेरी मालिश कर देता हूँ. जरा अपनी नाइटी ऊपर तो कर मैंने कहा - ठीक है अब्बा.कह कर मैंने अपनी नाईटी को अपनी चूची के ऊपर तक उठा दिया . अब मेरी नंगी चूची सीधे उनके छाती से सट रही थी . अब्बा ने पीठ को इस तरह से दाबना शुरू किया कि वो मुझे अपनी तरफ सटाने लगे . जिस से मेरी चूची उनके छाती में दब रही थी . इधर मेरी बुर उनके कमर पर सट रही थी . अब्बा पर वियाग्रा का असर हो चुका था .उन्होंने कहा - सुन, तू अपने ये कपडे पूरी तरह उतार .मै अच्छी तरह से मालिश कर देता हूँ. मैंने वो नाइटी को अपने सर होते हुए निकाल दिया . अब मै पूरी तरह से नंगी थी . अब्बा ने एक हाथ से मुझे लपेटा और अपने शरीर पर मुझे लिटा दिया . उन्होंने मेरी पीठ से ले कर गांड को इतनी जोर से दबाने लगे कि मै उनकी देह में बिलकूल चिपक सी गयी. वो कभी मेरी पीठ दबा रहे थे तो कभी मेरी चुत्तद. मेरी चूची उनके सीने में दब कर पकोड़ा हो रही थी. मै उनके मज़बूत पकड़ में थी . मैंने अपने बुर को उनके खड़े लंड पर टिका रखा था . तभी उन्होंने मुझे अपने नीचे लिटा दिया और मेरे ऊपर चढ़ कर जोर जोर से मेरी गालों को चूमने लगे. मैंने सिर्फ उनका साथ दे रही थी. उनका लंड मेरी चूत पर किसी राड कि तरह चुभ रहा था. पता नहीं क्यों मेरे अब्बा ने अभी तक अपनी लुंगी नही खोली थी . शायद उन्हें अभी भी ये अहसास हो रहा था कि वो मेरी बेटी है. वो मेरी गाल से ले कर मेरी कमर तक के हर भाग को मुंह से चूस रहे थे मानो किसी भूखे शेर को कई दिन के बाद ताज़ा गोश्त खाने को मिला हो. मैंने भी उनका साथ देना चालु कर दिया.थोड़ी देर बाद ही वो मेरे कमर पर हाथ फेरते फेरते मेरी दोनों टांगो को अगल बगल फैला लिया जिस से मेरा बुर उनके सामने आ गया. अब उनका हाथ मेरी कमर के नीचे से होते हुए मेरी बुर को छूने लगा. अब्बा मेरी मेरी बुर के बालों को सहलाने लगे.धीरे से बोले - ज़रीना , तू तो जवान हो गयी है रे.
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बाप ने बेटी को चोद कर बीबी का दर्जा दिया
वो मेरी बुर को हथेली से सहलाने लगे. मेरी बुर से पानी गिर रहा था जो कि उनके हाथ में लग रहा था. उनसे और नहीं रहा जाने लगा तो वो मेरे चूत को चूमने लगे. मै समझ गयी की लोहा गरम होगया है. अब्बा ने मेरी चूत में जीभ डाल दिया और अन्दर बाहर करने लगी. मुझसे ज्यादा देर बर्दास्त नहीं हुआ और मैंने पानी छोड़ दिया. अब्बा ने बड़े मज़े से मेरे बुर के पानी को चाटने लगे .थोडा संभलने के बाद मैंने एक हाथ से उनके लंड को लुंगी के ऊपर से ही पकड़ा . उनका लंड लुंगी के नीचे काफी बड़ा हो गया था. जब मैंने देखा की अब्बा को लंड छुआने में कोई दिक्कत नहीं है तो मैंने लुंगी के अन्दर हाथ डाला और उनके लंड को पकड़ लिया . अब्बा ने एक झटके में अपनी लुंगी खोल दिया. अब वो पूरी तरह नंगे थे. अब्बा का लंड बहूत बड़ा था. मै उनके लंड को अपने हाथ से सहलाने लगी . अब्बा की साँसे गर्म होने लगी . मैंने सोचा कि यही सही मौक़ा है अब्बा से सौदा करने का. वो मेरी चूची को चूस रहे थे.अब्बा ने कहा - जरीना, तू तो एकदम मस्त हो गयी है. मन करता है तेरी चूत को चोद डालूं.मैंने कहा - अब्बा, ये शरीर आपका ही दिया हुआ है. आपका मेरे बदन पर पूरा हक है. आपका दिया खाती हूँ, आप चाहें तो कुछ भी कर सकते हैं मेरे साथ. अम्मा के जाने के बाद मेरा फ़र्ज़ है कि आपके लिए मै कुछ भी करूँ.अब्बा ने कहा - ज़रीना , ज़रा लाईट तो जला दे , ज़रा देखूं तो तेरा बदन कितना जवान हुआ है ?.मैंने कहा - अब्बा , लाईट जलाने पर बाहर भी रौशनी जायेगी . मोमबत्ती जलाती हूँ . इसमें काम हो जाएगा .वहीँ पर मोमबत्ती और माचिस रखी हुई थी . मैंने मोमबत्ती जलाई . मोमबत्ती जलते ही हम दोनों ने एक दुसरे के शरीर को निहारना शुरू किया . अब्बा मेरी दुबली पतली काया और उस पर बड़े बड़े चुचियों और मेरे बुर को एकटक निहार रहे थे . और मै उनके तने हुए लंड को देख कर अंदाज़ लगा रही थी कि इसे अपनी बुर में झेल पाऊँगी या नहीं .मोमबत्ती को एक जगह रख कर मै अब्बा कि गोद में जा कर उनसे लिपट गयी . अब्बा ने मुझे कुछ उंचा किया और मेरी एक चूची को चूसने लगे.बोले - तेरी चूची तो काफी मीठी है ज़रीना.मुझे काफी मज़ा आ रहा था . कुछ देर चूची को चूसने के बाद वो लेट गएऔर बोले - मेरे मुह पर अपनी बुर को रख .मैंने ऐसा ही किया . मै उनके मुह पर बैठ गयी . मैंने अपने बुर को उनको मुंह में घुसा दिया . वो मेरी बुर को खाने कि कोशिश कर रहे थे . मेरे बुर से दुबारा रस निकलने लगा . वो रस को ऐसे चाट रहे थे मानो कोई शहद हो .अब्बा बोले - एकदम नमकीन रस है तेरे बुर का.उसके बाद उन्होंने मुझे लिटा दिया और मेरी दोनों टांगो को फैला दिया . वो बुर को फिर से चाट रहे थे . और मेरी बुर में अपनी जीभ घुसा दिया . मुझे उत्तेजना से अजीब लग रहा था . मुझे कुछ हो रहा था . मेरे बुर से रस के साथ साथ पिशाब भी निकलने लगा . लेकिन अब्बा ने मेरे बुर में से अपनी जीभ नहीं निकाली . वो मेरे पिशाब को भी चूसते रहे.थोड़ी देर के बाद मैंने कहा - अब्बा अब मेरे बुर को और मत चूसिये .अब्बा ने बुर में से जीभ निकाल दिया . मेरे बदन पर लेट गए औरबोले - रानी बेटा, तू तो एकदम मस्त माल है. सारा बदन मखमल के तरह है. जहाँ चूसता हूँ वहां रस ही रस है. अब तू मेरे से चुदवायेगी ? तुम्हे डर तो नहीं लगेगा न बेटा? बहूत आराम से चोदुंगा. मज़ा आयेगा तुझे. अब चुदाई के लिए तैयार हो जा .मैंने उनके लंड को अपने हाथ में ले लिया . काफी बड़ा और मोटा लंड था
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बाप ने बेटी को चोद कर बीबी का दर्जा दिया
एकदम सख्त . मै डर रही थी कि इतने मोटे लंड से मेरे बुर की क्या हालत होगी . मेरे बुर में काफी चिकनाई हो रही थी . अभी भी बुर से रस निकल रहा था. अब्बा ने मुझे लिटा दिया और बुर में उंगली डाल कर इसको चौड़ा करने लगे . ऐसा लग रहा था कि मेरे बुर में अपना लंड डालने के लिए जगह बना रहे हो . थोड़ी देर ऊँगली को मेरे बुर में गोल गोल घुमाते रहे . उधर एक हाथ से वो अपने लंड को सहला रहे थे. इस से उनका से उनका लंड भी रस निकाल रहा था. उस रस को वो अपने लंड पर लगा कर उसे चिकना बना रहे थे. जब उनका लंड एकदम चिकना हो गया तो वो मेरे बुर में से ऊँगली निकाल कर अपने लंड को मेरे बुर के मुंह पर रखा . धीरे धीरे इसे अन्दर करने लगे . पहले तो मुझे दर्द हुआ . ज्यों ही मै करहाती थी त्यों ही वो अपना लंड अन्दर डालना रोक देते थे . इस तरह इंच इंच कर के अपने आधे लंड को मेरे बुर में डाल दिया . एक बार अन्दर करने में लगभग 2 मिनट लगे . उसके बाद जब और अन्दर डालने कि कोशिश करते तो मुझे जोर से दर्द होता . मै जोर से कराह उठती.मैंने कहा - अब्बा आगे झिल्ली है.अब्बा बोले - अच्छा कोई बात नहीं . यहीं तक चोदुंगा .उन्होंने अपने लंड को 2 मिनट के लिए मेरे बुर में उसी तरह से छोड़ दिया . धीरे धीरे मेरा बुर उनके लंड के साइज़ इतना चौड़ा हो गया . अब वो धीरे धीरे अपने लंड को पीछे ले गए फिर आगे लाये . उन्होंने इतने इत्मीनान के साथ धीरे धीरे मुझे चोदना चालु किया कि मुझे दर्द नहीं होने लगा . मैंने अपने टांग को थोडा और फैलाया और बुर को थोडा और ढीला किया . अब्बा के धक्के बढ़ते जा रहे थे . उनका लंड मेरी झिल्ली को बार बार छू रहा था . अभी मै कुछ समझ पाती कि अब्बा ने एक बार कास के अपने लंड से मेरे बुर में धक्का दिया . मुझे थोड़ा सा अहसास हुआ कि मेरी झिल्ली फट चुकी . हल्का हल्का दर्द भी होने लगा . लेकिन अब्बा अब पूरी स्पीड से चालू हो चुके थे . उनके लंड ने मेरे बुर में जगह बना ली थी . मुझे भी काफी मज़ा आ रहा था . अब्बा के लंड का मेरे बुर के अन्दर आना और बाहर जाना मुझे महसूस हो रहा था. अब्बा के अंडकोष मेरे गांड से टकरा रहे थे . मुझे ख़ुशी हो रही थी कि मैंने अब्बा को काबू में कर लिया है. ख़ुशी और दर्द से मेरी आँखे बंद थी. मुझे ऐसा लग रहा था मानो मै जन्नत की सैर कर रही हूँ. मुझे यकीन नही हो रहा था की जिस लंड के रस से मेरा शरीर बना ही आज वही लंड मेरे चूत में है. मुझे ऐसा लग रहा था मानो मै अपने ऊपर से अपने अब्बा का क़र्ज़ मिटा रही हूँ. मुझे रत्ती भर भी अपने अब्बा पर गुस्सा नही आ रहा था. मै तो चाह रही थी कि वो मेरे शरीर को जी भर कर जैसे चाहें उपयोग करें. आखिर वो मेरे जन्मदाता हैं और मेरे हर अंग पर उनका उतना ही अधिकार है जितना मेरा खुद का.करीब 5 मिनट तक अब्बा मेरी चूत की चुदाई करते रहे . अचानक अब्बा का शरीर अकड़ने लगा और उनके लंड से गरम गरम माल मेरे बुर में गिरने लगा . अब्बा मेरे शरीर पर लेट गए . उनके सीने से मेरा चेहरा दब चुका था . करीब 1 मिनट तक उनके लंड से माल मेरे बुर में गिरता रहा . 3- 4 मिनट तक उसी अवस्था में रहने के बाद अब्बा ने मेरे बुर से अपना लंड निकाला . उनका लंड अब लटक रहा था . मैंने मोमबत्ती की रौशनी में देखा मेरे बुर से खून और अब्बा का माल दोनों ही निकल रहा था . देख कर मुझे काफी आनद आया . महसूस हो रहा था मानो कोई बड़ी लड़ाई जीत चुकी हूँ . अब्बा ने मुझे अपनी बेटी से अपनी पत्नी होने का हक़ दे दिया था. अब मै लड़की से औरत बन चुकी थी. अब्बा अब पलंग पर लेते हुए थे. मै उनके लंड की तरफ झुकी और मैंने अब्बा के लंड को पकड़ा और उसे पोछने लगी . जब ये साफ़ हो गया तो मैंने उनके लंड को अपने मुंह में ले ली . इस लंड में मुझे अपने बुर का खून और अब्बा के माल का मिला जुला स्वाद महसूस हो रहा था जिसकी तुलना किसी अन्य चीज से नही की जा सकती. मै अपने अब्बा को खुश रखने में कोई कसर नही छोड़ना चाहती थी . कुछ देर तक तो उनका लंड लटकने वाले अवस्था में ही रहा . लेकिन ये फिर से खडा होने लगा . मै उनके लंड को इस तरह से चूस रही थी मानो वो कोई आम हो . मेरे अब्बा को काफी आनंद आ रहा था.अब उनका लंड फिर से तन चुका था .
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बाप ने बेटी को चोद कर बीबी का दर्जा दिया
वियाग्रा का असर इतनी जल्दी ख़तम होने वाला नहीं था .मैंने अब्बा के लंड को मुंह में चूसने के बाद उनके लंड पर अपनी चूत को रखते हुए और अपनी चूची को उनके सीने पर रहते दिया. और अपनी जुल्फों को को उनके गालों पर ला कर उनके होठ को चुमते हुए से धीरे से कहा - आज मौसी आयी थी , वो कह रही थी कि आप दूसरी शादी करने कि सोच रहे हैं .अब्बा बोले - हाँ , बेटी.मैंने कहा - क्यों ? मै हूँ ना काम करने के लिए . शादी करने से घर के खर्च तो बढ़ जायेंगे ना?अब्बा बोले - कुछ सुख हासिल करने के लिए शादी करना चाहता हूँ . सिर्फ खाना खा लेने से मेरी भूख नहीं मिट्टी है बेटी. जिस्म का सुख बेटी तो नहीं दे सकती है ना ?मैंने कहा - अब्बा , आज से आपको जिस्म का सुख भी मै ही दूँगी . आप शादी ना करें . नहीं तो ये घर तबाह हो जाएगा .अब्बा ने मेरे चूतड पर हाथ फेरते हुए कहा - लोग क्या कहेंगे ?मैंने कहा - लोगों को मै थोड़े ही कहने जाऊंगी कि मेरे और मेरे अब्बा के बीच शारीरिक ताल्लुकात हैं . वैसे भी आपने मुझे जन्म दिया है. पाला पोसा . मेरी हर सुख सुविधा का ख्याल रखा . इसलिए आपका मेरे जिस्म पर पूरा अधिकार है. मै इसमें कोई गुनाह नहीं मानती हूँ .अब्बा बोले - लेकिन तू तो एक दिन ब्याह हो के दुसरे के यहाँ चली जायेगी फिर मै किसे चोदुंगा ?मैंने कहा - शादी के बाद भी आप मुझे जब तक चाहे चोद सकते हैं अब्बा ने कहा - तेरा घर वाला क्या कहेगा ?मैंने कहा - वो आप मुझ पे छोड़ दीजिये . सोचिये जब मै आपकी खिदमत के लिए तैयार ही हूँ तो आपको क्या दिक्कत है?अब्बा बोले - ठीक है, अगर तू वायदा करती है कि तू मुझे बीबी की तरह सुख देगी तो मै दुसरा निकाह नहीं करूंगा .मैंने कहा - ये शरीर आपकी अमानत है . आप इसे चाहें जैसे इस्तेमाल करें .कह के मैंने अपने होठ अब्बा के होठ पर रख दिया ताकि अब वो कुछ और ना बोल सके . . अब अब्बा को यकीन हो गया कि मै उनकी बीबी की तरह सेवा करने के लिए तैयार हूँ . अब हम दोनों बाप बेटी पूरी तरह से नंगे एक दुसरे के बाहों में थे और एक दुसरे के होठों को चूम रहे थे. मैंने अब्बा से कहा - अब्बा एक बार फिर से मुझे चोदिये ना .अब्बा ने कहा- आजा, पलंग पे लेट जा मेरी रानी.मै फिर से पलंग पर लेट गयी और अब्बा मेरे बदन के ऊपर लेट कर 69 का पोजीशन बनाया. यानी अब्बा मेरे बुर पर अपना मुंह रख दिया और अपना लंड मेरे मुंह में डाल दिया. अब एक तरफ अब्बा मेरे बुर को मुंह से चूस रहे थे तथा दूसरी तरफ मै उनके लंड को अपने मुंह में ले कर चूस रही थी. थोड़ी ही देर में मेरे बुर ने पानी छोड़ना चालु कर दिया जिस से मेरा बुर चिकना गया. जब अब्बा ने देखा की मेरा बुर फिर से चिकना हो गया है तो तो अपने आप को सीधा कर के अपने लंड को अचानक ही मेरे बुर में पूरा का पूरा डालदिए. इस बार ज्यादा दर्द नहीं हुआ . अब्बा ने इस बार मुझे 15 मिनट तक चोदते रहे . मेरे बुर से झर झर माल निकल रहा था .मैंने अब्बा से कहा - अब बस कीजिये अब्बा . अब दर्द करने लगा .अब्बा ने कहा - 2 मिनट और रुक जा बेटी .थोड़ी देर में अब्बा के लंड ने फिर से माल छोड़ा . थोड़ी देर बाद अब्बा ने मेरे बुर से अपना लंड निकाला और पूछा - दर्द तो नहीं हुआ ज्यादा ?.मैंने कहा - वेल डन अब्बा !.उसके बाद रात भर मै नंगी ही उनसे लिपट कर बातें करती रही . वो मेरी बुर में ऊँगली डाले रहे और मै उनके लंड को ऐसे पकडे हुई थी मानो कहीं ये भाग ना जाए . सुबह 2 बजे उन्होंने फिर से मेरी बुर की चुदाई की . फिर से वही चुदाई की बातें और लंड को सहलाने और बुर में उंगली डाले हुए चुदाई के किस्से के बारे में बात करती रही . 3 बजे सुबह अब्बा ने बताया कि किस तरह से वो मेरी अम्मा की गांड भी मरते थे .मैंने कहा - आज मेरी भी गांड मारो ना अब्बा , प्लीज़ ..अब्बा पहले तो राज़ी नहीं हुए . लेकिन जब मैंने 3-4 बार जिद किया तो वो राज़ी हो गए .
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बाप ने बेटी को चोद कर बीबी का दर्जा दिया
वियाग्रा का असर रात भर रहता है. उन्होंने मुझे ठेहुने के बल बैठ्या . और आगे झुक जाने को कहा . मै आगे झुक गयी . अब्बा ने मेरी गांड के छेद में उंगली डाली और चारो तरफ घुमाया . बगल में नारियल तेल था उसे उठाया और मेरे गांड को उंचा कर के नारियल तेल उसमे डाल दिया . पूरा गांड और बुर नारियल तेल से चपचपा गया . अब्बा ने अपने हाथ से नारियल तेल अपने लंड पर घसा और मालिश किया . अब्बा ने मेरी गांड में उंगली डाली और इसके छेद को चौड़ा किया . जब मेरी गांड का छेद खुल गया तो अब्बा ने इसमें लंड डालना शुरू किया . धीरे धीरे पूरा लंड इतनी जल्दी से अन्दर चला गया कि मुझे पता भी नहीं चला . अब्बा ने मेरी कमर के पीछे से दोनों तरफ को मजबूती से पकड़ा और मेरे गांड में अपने लंड को आगे पीछे कर मेरे गांड की चुदाई करने लगे . मुझे दर्द होने लगा . लेकिन ये दर्द भी तो मैंने खुद ही जिद कर के लिया था . मेरी तो शामत ही आ गयी . लेकिन अब मै कर ही क्या सकती थी . सिर्फ कराहती रही और थोड़ी थोड़ी रोती भी रही. खैर 3-4 मिनट में ही अब्बा के लंड ने पानी छोड़ दिया .लंड का पानी मेरे गांड में गिराने के बाद अब्बा ने मेरे गांड से लंड निकाला और पूछा - कैसा लगा गांड मरवाने में? .मैंने कहा - अब्बा , आप एक दिन में दस मर्तबा मेरी बुर को चोद लीजिये लेकिन मेरी गांड को दस दिन में एक ही बार चोदियेगा . इसमें दर्द होता है.अब्बा हँसते हुए बोले - धीरे धीरे आदत हो जायेगी . तब दर्द नहीं होगा .सुबह होने को चली थी . मेरे जीवन का भी नया सुबह था . अब्बा और मै रोज़ की तरह तैयार हुए . 9 बजे अब्बा चाय नाश्ता कर के आराम से टीवी देख रहे थे . आज रविवार था. इसलिए उनका आफिस भी बंद था .11 बजे से 2 दिन तक अब्बा ने फिर से 7 -8 बार मेरी चूत और गांड की बैंड बजाई. अब्बा चुदाई करने में इतनी माहिर थे कि इतनी बार चुदवाने के बाद भी मेरी हालत ख़राब नहीं हुई थी. 2 बजे दोपहर को हम दोनों नंगे ही एक साथ गहरी नींद में सो गए. शाम को छः बजे मेरी नींद खुली तो देखा अब्बा मेरी चूत पर हाथ फेर रहे हैं. मैंने मुस्कुरा कर अपनी चूत को चौड़ा कर लिया तो अब्बा ने बेहिचक अपना लंड मेरे चूत में डाल दिया. और धीरे धीरे मज़े ले ले कर चुदाई कर रहे थे. तभी मोबाइल बज उठा. मौसी का फोन था. मैंने चुदवाते हुए ही मौसी से बात की. मौसी बोल रही थी कि आधे घंटे में वो मेरी दोनों बहनों को ले कर मेरे यहाँ आएगी. मैंने कहा - ठीक है आ जाईये.मैंने मुस्कुरा कर अब्बा से कहा - जल्दी कीजिये अब्बा हुजुर, खाला आने वाली है.अब्बा ने थोड़ा गुसा हो कर कहा - ये मेरी साली भी ना, कमबख्त किसी भी समय टपक पड़ती है.मुझे अब्बा की ये बात सुन कर हांसी आ गयी. लेकिन अब्बा ने अपनी स्पीड तेज़ की . चार -पांच मिनट के बाद अब्बा का माल मेरी चूत में था और अब्बा मेरी होठो को चूसते हुए गर्म गर्म साँसे ले रहे थे. थोड़ी देर में मैंने अब्बा के लंड को अपने चूत से निकाला और अब्बा को अपने शरीर पर से धकेलते हुए कहा - अब, आप कपडे पहन लीजिये. नहीं तो खाला को पता चल जायेगा.मै बाथरूम जा कर बढ़िया से अपने बदन को धो-पोछ कर इतर लगा कर कपडे पहन कर पहले की ही तरह तैयार हो गयी. अब्बा भी घर वाले कपडे पहन कर गेस्ट रूम में आ कर टेलीविजन का मज़ा लेने लगे. तभी मौसी मेरी दोनों बहनों को छोड़ने मेरे घर आ गयी .वो अब्बा के पास आई और धीरे से पूछी - कोई लड़की देखूं क्या आपके शादी के लिए ?अब्बा ने धीरे से मुसुकुरा कर कहा - नहीं , अब बच्चियां बड़ी हो गयी है. घर का सारा काम कर लेती है. मुझे अब इस उम्र में शादी नहीं करनी .मै मुस्कुरा कर अपने आपको विजेता महसूस कर रही थी .उस दिन के बाद से हर रात मै उनके साथ ही सोने लगी उनकी बीबी बन कर . मेरे अब्बा को कभी बीबी की कमी महसूस नहीं होने दी. कई बार तो हम भूल ही जाते की हम बाप- बेटी भी हैं. मेरी दोनों बहनों ने भी हम बाप बेटी को कभी संदेह की नजर से नही देखा. उन्हें लगता कि मै अब्बा कि सेवा के लिए उनके कमरे में सोती हूँ.जब मेरी उम्र 24 होने को आयी तो मेरे अब्बा कि उम्र 52 साल की थी . अब वो उतना तो नहीं लेकिन हफ्ते में 1-2 बार मेरी चुदाई कर ही डालते थे . उन्होंने मेरा निकाह बगल के मोहल्ले के ही एक खाते पीते घर में कर दिया . मैंने अब्बा से वायदा लिया कि वो दो बहनों को कुछ नहीं करेंगे और जब भी चुदाई का मन हो मुझे फोन कर के बुला लेंगे .
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बाप ने बेटी को चोद कर बीबी का दर्जा दिया
अब्बा ने मुझसे वायदा किया कि वो दोनों बहनों को नहीं छोड़ेंगे और जरूरत होने पर मुझे बुला लेंगे .मेरी शादी होने के कुछ दिनों बाद मै हर 3-4 दिन पर अपने अब्बा और बहनों से मिलने के बहाने अब्बा के यहाँ चली आती और अब्बा की भूख शांत करती . मेरे पति बहूत ही सीधे और सरल इंसान हैं . उन्हें कभी शक नहीं होता था हमारे रिश्ते पर . लेकिन 3-4 दिन पर अब्बा के पास आना काफी मुश्किल जान पड़ने लगा . ससुराल में बहूत लोग थे .इसलिए मैंने अपने पति को कहा - अब्बा का घर काफी बड़ा है और वो खाली भी रहता है. क्यों ना हम लोग वहीँ जा कर रहें . आपका आफिस भी वहां से बगल में है.इस तरह से कई तरह का प्रलोभन दे कर मैंने अपने पति को अपने अब्बा के घर पर ही रहने के लिए राज़ी कर लिया . मेरे पति ने अपने घर वालों को ये कह कर राज़ी कर लिया कि अभी से अगर ससुर जी की सेवा नहीं करेंगे तो उनकी मौत के बाद उनकी सारी जायदाद उनकी दो बेटियों को ही मिल जायेगी और हम खाली हाथ मलते रह जायेगे .उसके बाद हम अब्बा के यहाँ चले आये . अब मै आराम से अब्बा के सुख का ख्याल रख सकती थी . रात को भी अक्सर जब मेरे पति मुझे चोद लेते तो मै अब्बा के खराब स्वास्थय की देखभाल करने के नाम पर उनके कमरे में सोने चली आती और अब्बा से भी अपनी चूत चुदवा लेती. . मेरे पति को कभी मुझ पर शक नहीं हुआ . उन्हें क्या पता कि अब्बा की कौन सी स्वास्थय की देखभाल की जरूरत है. आराम से अब्बा मुझे चोदते . अब्बा ने 7-8 साल तक और मेरे शरीर से खेला . फिर धीरे धीरे वो धरम करम में ज्यादा यकीन करने लगे . इस बीच मेरी दोनों बहनों की नौकरी हो गयी और उनकी शादी अच्छे घरानों में हो गयी .जब सभी काम सफल हुए तब लगा कि मेरा बलिदान व्यर्थ नहीं गया . आज मैंने अपने घर , अब्बा और अपनी बहनों को तबाह होने से बचाया . आज मै 2 बच्चों की माँ हूँ . अरे भाई , वो मेरे पति से हुए हैं !


samapt
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भाभी की चूत चोद कर सीखी चुदाई
मेरे लंड पर बाल उग आए थे। मै अक्सर रात को अपने बिस्तर पर नंगा लेट कर अपने लंड के बाल को सहलाया करता था। एवं अपने लंड को खड़ा कर उसे सहलाता रहता था। एक रात मै अपने लंड को सहला रहा था । उसमे मुझे बहूत आनंद आ रहा था। अचानक मै जोर जोर से अपने लंड को अपने हाथ से रगड़ना शुरू किया । मुझे ऐसा करना बहूत अच्छा लग रहा था। अचानक मेरे लंड से मेरा माल निकलने लगा । उत्तेजना से मेरी आँखे बंद हो गई। 5-6 मिनट तक मुझे होश ही नही रहा। ये मेरा पहला मुठ था।
इसके पहले मुझे इसका कोई अनुभव नही था। मै बाथरूम में जा कर अपने लंड को धोया और बेड पे आया तो मुझे गहरी नींद आ गई।
अगली सुबह मै अपने रूम से बाहर निकला तो देखा की भइया अपने ऑफिस के लिए तैयार हो रहे हैं। उनकी शादी हुए 2 साल हो गए थे। भाभी मेरे साथ बहूत ही घुली मिली थी। मै अपनी हर प्रोब्लम उनको बताया करता था। मेरे माता-पिता भी हमारे साथ ही रहते थे। थोडी देर में भईया अपने ऑफिस चले गए। पिता जी को कचहरी में काम था इस लिए वो 10 बजे चले गए। मेरे पड़ोस में एक पूजा था सो माँ भी वहां चली गई। मैंने देखा की घर में मेरे और भाभी के अलावा कोई नही है। मै भाभी के रूम में गया। भाभी अपने बिस्तर पर लेटी हुई थी। मै उनके बगल में जा कर लेट गया। मेरे लिए ये कोई नई बात नही थी। भाभी को इसमे कोई गुस्सा नही होता था। भाभी ने करवट बदल कर मेरे कमर के ऊपर अपना पैर रख कर अपना बदन का भार मुझे पे डाल दिया और कहा- क्या बात है राजा जी ? आप कुछ परेशान लग रहें हैं। भाभी अक्सर मेरे साथ ऐसा करती थी। मैंने कहा- भाभी कल रात को कुछ गजब हो गया। आज तक मेरे साथ ऐसा नही हुआ था। भाभी ने पुछा- क्या हुआ? मैंने कहा - कल रात को मेरे लंड से कुछ सफ़ेद सफ़ेद निकल गया। मुझे लगता है कि मुझे डाक्टर के पास जाना होगा। भाभी ने मुस्कुरा के पुछा- अपने आप निकल गया? मैंने कहा - नही , मै अपने लंड को सहला रहा था तभी ऐसा हुआ। भाभी ने कहा- राजा बाबू अब आप जवान हो गए हो। ये सब तो होगा ही।लगता है कि मुझे देखना होगा। भाभी ने अपना हाथ मेरे लंड के ऊपर रख दिया। तथा धीरे धीरे इसे दबाने लगी। इस से मेरे लंड खड़ा होने लगा। भाभी बोली- जरा दिखाइए तो सही । मै कुछ नही बोला। मैंने धीरे से अपने पेंट का बटन खोल दिया।
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भाभी की चूत चोद कर सीखी चुदाई
भाभी ने मेरे पेंट को नीचे की ओर खींचा और उसे पूरी तरह खोल दिया। अब मै सिर्फ़ अंडरवियर में था। भाभी अंडरवियर के ऊपर से ही मेरा लंड को सहला रही थी। बोली- क्या इसी से कल रात को सफ़ेद सफ़ेद निकला था? मैंने कहा - हाँ। भाभी ने कहा - अंडरवियर खोलिए। मैंने कहा - क्या भाभी, आपके सामने मै अपना अंडरवियर कैसे खोल सकता हूँ? भाभी बोली - अरे जब आप मेरे को अपना पूरा प्रोब्लम नही बतायेगे तो मै कैसी जानूंगी कि आपको क्या हुआ है? और मुझे क्या शर्माना? अपनों से कोई शर्माता है भला? जब आपके भइया को मेरे सामने अपने कपड़े खोलने में कोई शर्म नही है तो फिर आप क्यों शरमाते हैं? मै इस से पहले की कुछ बोलता भाभी ने मेरा अंडरवियर पकड़ कर अचानक नीचे खींच लिया। मेरालंड तन के खड़ा हो गया। भाभी ने मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़ लिया. और कहा - अरे राजा बाबू आप तो बहूत जवान हो गए हैं। भाभी मेरे लंड को पकड़ कर सहला रही थी। मेरे लंड से थोड़ा थोड़ा पानी निकलने लगा । अचानकभाभी मेरे को जकड कर नीचे की तरफ़ घूम गई। इस से मै भाभी के शरीर पर चढ़ गया। भाभी का शरीर बहूत ही मखमली था। भाभी ने मुझसे कहा - मुझे चोदियेगा? मै कहा - मै नही जानता। भाभी ने मेरे शरीर को पकड़ लिया और कहा - मै सीखा देती हूँ। पहले मेरा ब्लाउज खोलिए। मैंने भाभी का ब्लाउज खोल दिया । भाभी का चूची एकदम सफ़ेद सफ़ेद दिख रहा था। मैंने कभी सोचा भी नही था कि भाभी का चूची इतना सफ़ेद होगा। मै भाभी के चूची को ब्रा के ऊपर से ही सहलाने लगा। भाभी ने कहा - ब्रा तो खोलिए तब ना मज़ा आएगा। मैंने भाभी की ब्रा भी खोल दिया। अब भाभी का समूचा चूची मेरे सामने तना हुआ खड़ा था। मैंने दोनों हाथो से भाभी की चूची को पकड़ लिया और कहा - क्या मस्त चुच्ची है आपकी भाभी? मै भाभी के चुचियों को धीरे धीरे दबा रहा था । अचानक भाभी ने कहा - मेरी साड़ी खोलिए ना तब और भी मज़ा आएगा। मैंने एक हाथ से भाभी की साड़ी खोल दिया। भाभी अब सिर्फ़ पेटीकोट में थी। फ़िर मैंने भाभी को कहा - क्या पेटीकोट भी खोल दूँ? भाभी बोली - हाँ। मै बैठ कर भाभी का पेटीकोट का नाडा खोला और झट से उतर फेंका। अब मेरे सामने जो नजारा था मै उसकी कल्पना सपने में भी नही कर सकता था। भाभी का बुर एकदम सफ़ेद सा था। उसपर घने घने बाल भी थे। मै भाभी के बुर को देख रहा था। कितना बड़ा बुर था। बुर के अन्दर लाल लाल छेद दिख रहा था। मैंने भाभी को कहा - आपको भी बाल होता है? भाभी सिर्फ़ मुस्कुराई। भाभी बोली - छु कर तो देखिये। मै भाभी के बुर को धीरे धीरे छुने लगा। भाभी बुर का बाल मै एक तरफ़ कर के मै उसे फैला के देखने की कोशिश करने लगा कि ये कितना बड़ा है। मुझे उसके अन्दर छेद नजर आ रहा था। भाभी से मैंने पुछा - भाभी , ये छेद कितना गहरा है? भाभी ने कहा - ऊँगली डाल के देखिये न? मै बुर में ऊँगली डाल दिया। मै अपनी ऊँगली को भाभी के बुर में चारों तरफ़ घुमाने लगा। बहूत बड़ा था भाभी का बूर। मै बूर से ऊँगली निकाल के भाभी के शरीर पे लेट गया।
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भाभी की चूत चोद कर सीखी चुदाई
भाभी ने अपने दोनों पैर को ऊपर उठा के मेरे ऊपर से घूमा के मुझे लपेट लिया। मै भाभी के शरीर को जोर से पकड़ लिया। मेरी साँसे बहूत तेज़ हो गई थी। मेरा सारा छाती भाभी के चूची से रगड़ खा रहा था। भाभी ने मेरे सर को पकड़ के अपने तरफ़ खींचा और अपने होठ को मेरे होठ से लगा दिया। मै भी समझ गया कि मुझे क्या करना है? मै काफी देर तक भाभी के होठो को चूमता रहा। चुमते चुमते मेरे शरीर में उत्तेजना भरती गई। मै भाभी के होठ को छोड़ कर कुछ नीच आया और भाभी के चूची को मुह में ले कर काफ़ी देर तक चूसता रहा। भाभी सिर्फ़ गर्म साँसे फेंक रही थी। फिर भाभी अचानक बैठ गई और मुझेबिस्तर पर सीधा लिटा दिया। मै लेट कर भाभी का तमाशा देख रहा था। भाभी ने मेरे लंड को पकड़ कर सहलाना शुरू किया। वो मेरी लंड के सुपाडे को ऊपर नीचे कर रही थी। मै पागल हुआ जा रहा था। भाभी ने अचानक मेरे लंड को अपने मुंह में ले कर चूसने लगी। पूरे मुंह में मेरा लंड घुसा ली। मै एकदम से उत्तेजित हो गया। मैंने भाभी को कहा- भाभी, प्लीज ऐसा मत कीजिये। लेकिन भाभी नही मानी। वो मेरे लंड को अपने मुंह में पूरा घूसा ली। अचानक मेरे लंड से माल निकलने लग गया। मेरी आँखे बंद हो गई। मै छटपटा गया। सारा माल भाभी के मुंह में गिर रहा था लेकिन भाभी ने मेरे लंड को अपने मुंह से नही निकाला। और मेरा सारा माल भाभी पी गई। 2-3 मिनट के बाद मुझे होश आया। देखा भाभी मेरे शरीर पर लेटी हुआ है और मेरे होठों को चूम रही है। भाभी बोली- ऐसा ही माल निकला था रात में? मैंने कहा - हाँ भाभी. भाभी ने कहा- ये तो जवानी की निशानी है मेरे देवर जी. अब आप जवान हो रहे हैं. मैंने कहा- अब मै जाऊं भाभीजी ? भाभी बोली - अरे वाह राजा जी अभी तो खेल बाकी है।अब जरा मुझे चोदिये तो सही। मै बोला- क्या अभी भी कुछ बाकी है? लेकिन मै भी कुछ करना चाहता हूँ. भाभी बोली - आप क्या करना चाहते हैं? मै बोला - जिस तरह से आपने मेरे लंड को चूसा उसी तरह से मै भी आपके बूर को चूसना चाहता हूँ। भाभी बिस्तर पे लेट कर अपनी दोनों पैर को अगल बगल फैला दिया। अब मुझे भाभी का बुर का एक एक चीज साफ़ साफ़ दिख रहा था। मै नीच झुक कर भाभी के बुर में अपना मुंह लगा दिया। पहले तो बूर के बाल को ही अपने मुंह से खींचता रहा। फ़िर एक बार बुर के छेद पर अपने होठ रख कर उसका स्वाद लिया। बड़ा ही मज़ा आया। मै और जोर से भाभी के बुर को चूसने लगा। चूसते चूसते अपनी जीभ को भाभी के बूर के छेद के अन्दर भी घुसा दिया। भाभी को देखा तो वो अपनी आँख बंद कर के यूँ कर रही थी जैसे कि कोई दर्द हो रहा है।तभी भाभी के बुर से हल्का हल्का पानी के तरह कुछ निकलने लगा। मैंने उसका स्वाद लिया तो मुझे कुछ नमकीन सा लगा. थोडी ही देर में मेरा लंड तन के खड़ा हो गया था। मै भाभी के होठ को चूमने के लिए जब उनके ऊपर चढा तो मेरा लंड उनके बुर से सट गया। भाभी ने मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़ लिया और कहा - राजा जी अब मुझे चोदिये न । मैंने कहा - मगर कैसे भाभीजी? क्या और भी मज़ा हो सकता है? भाभी धीमे से मुस्कुराई और कहा - अब तो असली मज़ा बांकी है। मै कहा - क्या करुँ? भाभी बोली - अपने लंड को मेरे बूर में डालिए। मैंने कहा - इतना बड़ा लंड आपके बुर के इतने छोटे से छेद में कैसे घुसेगा? भाभी बोली- आप डालिए तो सही। भाभी ने अपने दोनों पैरों को और फैलाया। और मेरे लंड को पकड़ के अपने बूर के छेद के पास लेते आई। बोली- घुसाइए. मैंने संदेह्पुर्वक अपने लंड को उनके बूर के छेद में घुसना शुरू किया। ये क्या? मेरा सारा का सार लंडउनके बूर में घूस गया। मुझे बहूत ही मज़ा आया।
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भाभी की चूत चोद कर सीखी चुदाई
भाभी को देखा तो उनके मुंह से सिसकारी निकल रहा था। मैंने डर के मारे झट से अपने लंड को उनके बूर से बाहर निकल लिया। भाभी ने कहा - ये क्या किए? मैंने कहा- आपको दर्द हो रहा था ना? वो बोली- धत , आपके भइया तो रोज़ मुझे ऐसा करते हैं। इसमे दर्द थोड़े ही होता है। इसमे तो मज़ाआता है। चलिए डालिए फ़िर से अपन लंड मेरे बूर के छेद में। मै इस बार अपने लंड को अपने से ही पकड़ कर भाभी के बूर के छेद के पास ले गया और पूरा पूरा लंड उनके बूर में घूसा दिया। भाभी के मुंह से एक बार फ़िर सिसकारी निकली। मै उनके बुर में अपना लंड डाले हुए 1 मिनट तक पड़ा रहा। मुझे कुछ समझ में नही आ रहा था कि अब क्या करना है। मै अपने दोनों हाथो से भाभी के चुचियों से खेलने लगा। भाभी बोली- खेल शुरू कीजिये ना। मै बोला- अब क्या करना है? भाभी बोली - चोदना शुरू कीजिये ना। मै बोला- अभी भी कुछ बांकी है? अब क्या करुँ? भाभी बोली - मेरे बुध्धू राजा बाबू ! अपने लंड को धीरे धीरे मेरे बूर में ही आगे पीछे कीजिये। मै बोला - समझा नही। भाभी बोली- अपने कमर को आगे पीछे कर के अपने लंड को मेरे बूर में आगे पीछे कीजिये। मै ऐसा ही किया। अपने कमर को आगे पीछे कर के लंड को भाभी के बूर में अन्दर बाहर करने लगा। भाभी का शरीर एंठने लगा। मै बोला कि - निकाल लूँ क्या? भाभी बोली - नही। और जोर से चोदिये। मै भाभी के कमर को अपने हाथ से पकड़ लिए और अपने लंड को उनके बूर में आगे पीछे करने लगा। मुझे अब इसमे काफ़ी मजा आ रहा था। मेरा लंड उनके बूर से रगडा रहा था। मै पागल सा होने लगा। 5 मिनट तक करने के बाद देखा कि भाभी के बुर से पानी निकल रहा था। भाभी अब निढाल सी हो रही थी। मै भाभी के शरीर पर लेट कर उनकी चोदाई जारी रखी। भाभी बोली - जल्दी जल्दी कीजिये राजा जी । मै बोला - कितनी देर तक और करुँ? वो बोली - मेरा तो माल निकल गया है। आपका माल जब तक नही निकलता तब तक करते रहिये। मैंने और जोर जोर से उनको चोदना जारी कर दिया। उनका सारा शरीर मेरे चोदाई के हिसाब से आगे पीछे हो रहा था। उनकी चूचियां भी जोर जोर से हिल हिल कर ऊपर नीचे हो रही थी। मुझे ये सब देखने में बहूत मज़ा आ रहा था। मै सोच रहा था कि ये चोदाई का खेल कभी ख़तम ना हो। तभी मुझे लगा कि मेरे लंड से माल निकलने वाला है। मै भाभी को बोला- भाभी मेरा लंड से माल निकलने वाला है। भाभी बोली - लंड को बुर से बाहर मत निकालिएगा। सब माल बुर में ही गिरने दीजियेगा। मैंने उनको चोदना जारी रखा। 15-20 धक्के के बाद मेरे लंड से माल निकलना शुरू हो गया। मेरी आँख जोरो से बंद हो गई। मैंने अपने लंड को पूरी ताकत के साथ भाभी के बूर में धकेलते हुए उनके शरीर को कस के पकड़ के उनको लिप्त कर उनके ही शरीर पर गिर गया। बोला - भाभी , फ़िर माल निकल रहा है। भाभी ने मुझे कस के पकड़ के मेरे कमर को पीछे से पकड़ कर अपने तरफ़ नीचे की ओर खींचने लगी। 2 मिनट तक मुझे कुछ होश नही रहा। आँख खुली तो देखा मै अभी भी भाभी के नंगे शरीर पे पड़ा हूँ।
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