DesiBees

Full Version: मजेदार हिंदी कहानी का खजाना
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नितिन की टल्ली










मित्रों नमश्कार,

मैं हूँ नेहा और मैं पंजाब कि रहने वाली हूँ! मेरी उम्र २१ साल है और मेरा
रंग गोरा है, चेहरा सुंदर और जिस्म आकर्षक है! मेरा कद पांच फुट छह इंच है,
और मेरे छुईमुई शरीर के पैमाने ३४-२४-३६ है! मेरे माता और पिता के स्वर्ग
सिधारने बाद मैं पिछले ५ साल से अपनी बड़ी बहन, जीजाजी और उनके इकलौते बेटे
नितिन के साथ, पंजाब के एक बड़े शहर में रहती हूँ! मैंने बी एससी करने के
बाद अब एम एससी कर रही हूँ! जीजा जी बैंक में एक बड़े अफसर हैं और दीदी
स्कूल में टीचर हैं! उनका बेटा नितिन १८ साल का है और बी बी ऐ कर रहा है!
हमारा घर बहुत बड़ा है और हर एक को अलग अलग कमरा मिला हुआ है! हर कमरे के
साथ बाथरूम भी लगा हुआ है! मैं अपने कमरे में जयादातर अर्धनग्न ही रहती
हूँ! जीजाजी के जाने के बाद मैं अक्सर एक छोटीसी निकर और एक लो नेक की
बनियान (बिना कच्छी और ब्रा के) ही पहनती हूँ जिस से मेरी लंबी टाँगे और
मेरे मम्मों के दर्शन सब को आराम से हो जाते हैं!



मैंने अपना छोटा सा परिचय तो आप को दे दिया, अब मैं आप को उस घटना के बारे
में बताना चाहूंगी जिस ने मेरे जीवन में बदलाव लाया और मुझे बेशर्म बना
दिया! पहले मैं अपने जिस्म कि नुमाइश नहीं होने देती थी और हमेशा सलवार
कमीज ही पहने रहती थी! लेकिन उस घटना के बाद मेरे पहनावे में बदलाव आगया और
मैं घर में जिस्म की नुमाइश करने लगी! जीजाजी के सामने तो मैं अपने जिस्म
को ढक के रखती हूँ और ढंग के कपड़े ही पहनती हूँ पर दीदी और नितिन के सामने
नेकर बनियान में ही घूमती रहती हूँ, कभी कभी तो उनके सामने ही टॉपलेस हो कर
अपने कपड़े भी बदल लेती हूँ! दीदी बहुत टोकती है पर मैं परवाह ही नहीं करती
हूँ!

वह घटना आज से एक साल पहले हुई थी! उस समय मुझे टाईफाइड हो कर हटा था और
मैं बहुत कमजोर हो गई थी! कहीं वह पीलिया न बन जाए इसलिए डाक्टर ने मुझे
हिलने डुलने से मना कर दिया था और बिस्तर पर ही आराम करने को कहा! उन्होंने
कुछ दिनों के लिए नहाने धोने को भी मना किया और दीदी से मेरे जिस्म को
स्पंज (गीले कपड़े से पोंछना) करने को कहा! सिर्फ बाथरूम जाने कि इजाजत दी
और वहां भी कोई पकड़ के ले जाए! ज्यादातर तो दीदी ही यह सब करती थी लेकिन
कभी कभी नितिन भी मुझे बाथरूम ले जाता था! वह मुझे अंदर छोड़ कर बाहर खड़ा हो
जाता था और जब मैं आवाज देती थी तो वह वापिस मुझे बिस्तर तक छोड़ देता था!
दो सप्ताह के बाद मेरा बुखार तो उतर गया था लेकिन ज्यादा कमजोरी के कारण
डाक्टर ने अगले १५ दिन के लिए भी वैसा ही आराम करने को कह दिया था! दीदी कि
जिद पर और जीजाजी कि आज्ञा के कारण मैं बिस्तर पर ही लेटी रहती थी और जब
जरूरत पड़ती थी तब दीदी को या नितिन को आवाज़ लगा देती थी! इस तरह अभी पांच
दिन ही बीते थे कि खबर आई कि गांव में जीजाजी के पिताजी का निधन हो गया था
और इसलिए जीजाजी और दीदी को तुरंत वहां जाना पड़ा! जाने से पहले दीदी ने
मुन्नी (कामवाली बाई) को घर के बाकी काम के साथ साथ मेरा स्पंज करने और
खाना बनाने को भी कह दिया था, इसलिए वह दिन में हमारे घर पर ही रहती थी और
शाम का खाना बना कर अपने घर चली जाती थी! देर शाम और रात में तो मुझे नितिन
पर ही निर्भर रहना पड़ता था! दीदी के जाने के अगले दिन सुबह जब मुन्नी ने
मेरे कपड़े उतार कर मेरे बदन को स्पंज कर रही थी तब मैंने देखा कि नितिन
खिड़की से झांक कर मुझे देख रहा था! मुझे बहुत गुस्सा आया पर उस समये मैं
चुप रही! जैसे ही मुन्नी वहां से चली गई तब मैंने नितिन को बुला कर उसकी उस
हरकत पर बहुत डांटा! मेरी डांट सुन कर तो वह खिलखिला कर हंस पड़ा! जब मैंने
उससे हँसने का कारण पुछा तो वह कहने लगा कि यह नज़ारा तो वह रोज देखता रहता
था, जब उसकी मम्मी भी मेरा स्पंज करती थी तब भी वह इसी तरह झाँक कर यह सब
देखता रहता था! मेरे पूछने पर कि उसे यह सब देखने से क्या मिलता है, तो
उसने कहा कि उसे मेरे गोरे रंग का जिस्म, मेरे मम्में और उनके उपर लगी काली
काली निप्प्लें तथा नीचे चूत के उपर के भूरे रंगे के बाल देखने बहुत अच्छे
लगते हैं और वह उन्हें छूने कि इच्छा भी रखता है! यह सुन कर मैं दंग रह गई
और उसे एक बार फिर से डांट कर वहां से भगा दिया!

अगले दिन सुबहे मुझे बहुत पसीना आने कि वजह से जिस्म में खुजली हो रही थी
और उधर से मुन्नी का सन्देश आया था कि वह देर से आयेगी! जब मुझसे खुजली
बर्दास्त नहीं हुई, तब मैंने सोचा कि क्यों न नितिन का सहारा लिया जाए और
उसे ही स्पंज करने को कह दूं! उसने तो मुझे नग्न देखा हुआ ही था तो मुझे
उससे किसी बात कि शर्म नहीं आनी चाहिए! यह सोच कर मैंने नितिन को आवाज दी
और उसे मुन्नी के देर से आने के बारे में बताया तथा उसे आग्रह किया कि वह
मेरा स्पंज कर दे! यह सुन कर वह पहले तो हिचकचाया फिर पूछने लगा कि क्या
मैं उसे जिस्म की सब जगहें स्पंज करने दूंगीं! जब मैंने उसे हाँ कही तब वह
खुशी खुशी भाग कर बाथरूम में गया और स्पंज सारा सामान ले आया! फिर उसने आगे
बढ़ कर मेरे कपड़े उतारने शुरू किये! पहली मेरी कमीज उतारी, फिर मेरी ब्रा
उतारी, फिर मेरी सलवार और कच्छी भी उतार दी! अब मैं उसके सामने बिलकुल नग्न
थी! यही वह क्षण था जब से मेरे जीवन में बदलाव आया था और मैं शर्मसार से
बेशर्म बन गई थी तथा घर भर में कम कपड़ों में ही घूमना शुरू कर दिया था तथा
दीदी और नितिन के सामने अर्धनग्न भी हो जाती थी!

नितिन ने बड़े ध्यान से मेरी नग्नता को निहारा, मेरे मम्मों, निप्पलों तथा
चूत के बालों पर हाथ फेरा! फिर मुझे उल्टा कर के मेरी पीठ और टांगो को
स्पंज किया, मेरे चूतडों को जोर जोर से रगड़ कर स्पंज किया और मेरी गांड में
ऊँगली भी कर दी! जब मैंने उससे पुछा कि वह यह क्या कर रहा था तो उसने कहा
कि अंदर तक स्पंज कर रहा था! उसका इस तरह गांड में ऊँगली करना और मेरे
चूतडों को दबाना तथा मसलना मुझे बहुत अच्छा लग रहा था इसलिए मैंने उसे कुछ
देर ऐसा करने दिया! कुछ देर के बाद में उसने मुझे सीधा किया और मेरे सिर और
चेहरे, मेरी गर्दन, छाती, मम्मों, पेट, कमर, जाहंगों और टांगों को स्पंज
किया! इसके बाद उसने मेरी दोनों टांगो को चौड़ा कर उन के बीच में विराजमान
मेरी चूत को भी रगड़ते हुए स्पंज कर दिया! जब वह चूत का स्पंज कर रहा था तब
उसने उसमे भी ऊँगली करने कि कोशिश की पर मैंने उसे रोक दिया! फिर मैंने उसे
जल्दी से स्पंज खतम करने को कहा! इस के बाद उसने मुझे सूखे तौलिए से पोंछ
दिया और मेरे मम्मो और उन की निप्पलों को पकड़ कर मसला और थोड़ी देर बाद वह
मेरी चूत के बालों के उपर हाथ फेरने लगा! उस कि इस हरकत से मैं बहुत गर्म
होने लगी थी लेकिन अपनी बिमारी की कमजोरी को ध्यान में रखते हुए मैंने अपने
पर काबू रखा तथा उसे अलग हटने को और कपड़े पहनाने के लिए कहा! नितिन मेरे
साफ़ कपड़े निकाल लाया और सब से पहले उसने मुझे कच्छी पहनाई लेकिन उपर करने
से ने पहले मेरी चूत के बालों को अच्छी तरह मसला और एक बार फिर ऊँगली करने
कि नाकाम कोशिश की! इसके बाद उसने मुझे सलवार पहनाई! ब्रा पहनाने से पहले
उसने मेरे मेरे मम्मों को बड़े प्यार से मसला! उसका ऐसा करना मुझे बहुत
अच्छा लगा लेकिन बात आगे ना बढ़ जाये इसलिए मैंने उसे कहा कि वह अब बस कर दे
और बाकी के कपड़े पहना दे! मेरी बात सुन कर उसने मुझे ब्रा और कमीज पहना दी
तथा स्पंज का सामान उठा कर वहां से चला गया! जब वह जा रहा था तब मैंने
देखा कि उसका पजामा आगे से उठा हुआ था और कुछ गीला सा भी लग रहा था! जब वह
मेरे कमरे में वापिस आया तो उसने पेंट पहन रखी थी! मैंने उसे पूछा कि पेंट
पहन ली है क्या कहीं जाना है तो वह बोला नहीं, सपंज का पानी गिरने से पजामा
गीला हो गया था इसलिए बदल लिया! मैंने मुस्कराते हुए उसे देखा और कह दिया
कि मैं तो समझी थी कि कुछ लीक हो गया था! वह कुछ नहीं बोला और वहीँ चुपचाप
बैठा नीचे देखता रहा!

दुपहर को मुन्नी आई और उसने जब मुझे स्पंज के लिए पूछा तो मैंने उसे मना कर
दिया और कहा कि जब काम खतम कर के शाम को घर जाने से पहले कर देगी! क्योंकि
नितिन ने मेरे जिस्म को इतनी अच्छी तरह मसला और दबाया था इसलिए मुझे खाना
खाने के बाद तुरंत नींद आ गयी! शाम को मुन्नी ने मेरा स्पंज करके बाद जब
अपने घर चली गई तब नितिन मेरे कमरे में आ गया और मेरे पास बैठ गया! मैंने
जब पुछा कि क्या बात है तो उसने मेरे मम्मों पर हाथ रख कर उन्हें दबाने तथा
मसलने कि इजाजत माँगी!! मेरे हाँ कहने पर उसने बड़े प्यार से मेरी कमीज और
ब्रा उतर दी और मेरे पास लेट कर मेरे मम्मों पर हाथ फेरने लगा और मसलने
लगा! कुछ देर के बाद उसने मेरे मम्मों कि निप्पलों को बारी बारी अपने मुहँ
में डाल कर अहिस्ता अहिस्ता चूसने लगा! उस कि इस तरह मम्मों की प्यारी
चुसाई से मैं सातवें आसमान पर तैरने लगी, मेरी चूत में भी गुदगदी होने लगी!
तभी मुझे नितिन कि जाह्न्गों के बीच में कुछ हलचल महसूस हुई और पेंट भी
उभरी हुई सी लगी! मैंने जैसे ही उस तरफ अपना हाथ बढ़ाया तो नितिन ने मेरा
हाथ थाम लिया! तब मैंने उसे अपने से दूर कर दिया और कह दिया कि उसने तो
मेरा पूरा जिस्म अच्छी तरह से देख लिया है और उससे खेल भी लिया है लेकिन
अपना जिस्म अभी तक नहीं दिखाया! अब जब तक वह मुझको अपने शरीर नहीं दिखता और
उससे खेलने नहीं देता तब तक मैं उसे अपने मम्मों को छूने भी नहीं दूंगी!

मेरी यह बात सुन कर नितिन कुछ देर तक सोचता रहा और फिर कहा कि अगर मैं पूरी
नग्न हो कर उसके साथ लेटूंगी तभी वह भी नग्न हो कर मुझे अपना जिस्म
दिखायेगा और उससे खेलने देगा! मेरे मान जाने पर वह उसने अपनी टी शर्ट,
बनियान, जींस तथा जांघिया उतार कर मेरे सामने खड़ा हो गया! उसका शरीर बहुत
हष्टपुष्ट था और उसका लौड़ा (जो अभी पूरा खड़ा नहीं हुआ था) काफी तगड़ा लग रहा
था! इस हालात में उसके लौड़े कि लम्बाई लगभग ७ इंच और मोटाई १ १/४ इंच लग
रही थी! उसके टट्टे नीचे की ओर लटके हुए थे, उसके लौड़े के उपर का मांस पीछे
हटा हुआ था तथा सुपाडा बाहर निकला हुआ था! यह देख कर मुझसे रहा नहीं गया
और मैंने झट से उस के लौड़े को हाथ में ले लिया और उसे हल्के हल्के मसलने
लगी! कियोंकि मैंने किसी लौड़े को इतनी नज़दीक से पहली बार देखा और पकड़ा था
इसलिए मुझे कुछ अजीब लग रहा था! तभी वह एकदम सख्त हो कर तनने लगा! मैंने
घबरा कर लौड़े को एकदम छोड़ दिया! इस पर नितिन ने हँसते हुए कहा के डरो मत यह
काटेगा नहीं, यह तो खुश हो कर सलामी दे रहा था! उसका तन्ना हुआ लौड़ा बहुत
ही सुंदर दिख रहा था और मुझे उस पर बहुत प्यार आने लगा! उसका सुपाडा तो
एकदम चमक रहा था और १ १/२ इंच के गोल गोल दोनो लटके हुए टट्टे अब सिकुड कर
उपर कि ओर चिपक गए थे!

ऐसा मनभावन नज़ारा देख कर मेरी चूत में अब गुदगदी के साथ साथ खुजली भी होने
लगी थी, वह गीली भी होने लगी थी तथा उसमें से पानी रिसने लगा था जिस के
कारण मेरी कच्छी भी गीली होने लगी थी! मुझे पहली बार चूत और लौड़े के बीच का
अद्रश्य रिश्ता समझ में आने लगा था! मैंने नितिन कि लौड़े को हाथ में पकड़
कर आगे पीछे करने लगी (मुठ मारने लगी) जिससे नितिन एकदम घबरा गया और
सिकुड़ने तथा हिलने लगा! अब उसका लौड़ा मस्त हो गया था और उसकी लम्बाई ८ इंच
और मोटाई १ १/२ इंच हो गया था! मैंने नितिन से पूछे बिना उसके लौड़े को चूम
लिया और सुपाडे को जीभ से चाटने लगी! उसी समय नितिन को एक झटका लगा और उसके
सुपाडे के छिद्र में से पानी जैसी एक बूँद बाहर निकली! यह देख कर मैंने
नितिन की ओर देखा तो उसने इशारे से चाटने के कहा, तब मैंने उस बूँद को चाट
लिया! मुझे उस का स्वाद बहुत अच्छा लगा और मेरे से रहा नहीं गया! मैंने
अपने होंट सुपाडे के उस छिद्र पर लगा कर जोर से चूसा और उसके अंदर से सारा
पानी खींच कर पी गई! इसके बाद मैंने मुंह खोल कर सुपाडे को अंदर लेने कि
कोशिश की लेकिन उसे पूरा अंदर नहीं कर सकी इसलिए उसको फिर से चाटने लगी!

नितिन ने पांच मिनट तक मुझे अपने लौड़े के सुपाडे को चाटने दिया और फिर मुझे
अलग कर उसने मेरी सलवार और कच्छी उतार दी! कच्छी का गीलापन देख का उसने
मेरी जाहंगो के बीच में हाथ डाल कर चूत को छू कर देखा और गीले हाथ को अपने
मुहँ में रख कर चाटा और मेरी ओर देखा! जब मैंने पुछा कि स्वाद कैसा है तो
उसने कहा शरबत जैसा! फिर वह जल्दी से मेरे बिस्तर पर मेरी टांगों की तरफ
सिर कर के लेट गया और मेरी टांगो को चौड़ा कर के अपना मुहँ मेरी चूत पर लगा
दिया और मेरा रस खींच कर चूसने तथा पीने लगा! मैंने भी जब उसके लौड़े को
अपने चेहरे के पास देखा तो मेरा मुहँ भी अपने आप खुल गया और मैं उसका
सुपाडा चूसने लगी! कुछ देर के बाद नितिन ने मेरे छोले पर जीभ घुमाई तो
मुझको झटका लगा और मेरी चूत में से एकदम पानी छूटा जिसे नितिन ने पी लिया!
मैंने भी अपने मुहँ को और ज्यादा खोला तो नितिन का पूरा सुपाडा मेरे मुहँ
के अंदर चला गया और मैं उसे बड़े प्यार से चूसने लगी! दस मिनट तक ऐसे ही
दोनो कि चुसाई चलती रही और फिर जब मुझे एक और झटका लगा तो मैं चिल्लाई
आईईईईईई…………… और नितिन के मुहँ में पानी कि टंकी खोल दी! नितिन ने सारा
पानी पी लिया! मैं बहुत गरम होगी थी इसलिए नितिन के लौड़े को जोर से चूसने
लगी, तभी उसका लौड़े ने फडफडा कर अपना रस मेरे मुहँ में उड़ेल दिया! मुझे ऐसा
लगा कि उसने मेरे मुहँ में रबड़ी डाल दी है और मैं उसे मजे ले कर खा गई!
इसके बाद नितिन मेरे साथ लिपट के लेट गया और मुझ को किस किया! अब उसका
ढीलाढाला लौड़ा मेरी चूत के बालों से चिपका हुआ था और मेरे मम्में उसकी छाती
से चिपके हुए थे!

करीब एक घंटे के बाद हम अलग हुए और नितिन ने मुझे सिर्फ सलवार और कमीज पहना
दी और मेरी ब्रा तथा कच्छी को बाथरूम में डाल दी! बाद में उसने पजामा और
टी-शर्ट पहनी और रसोई से खाना लाया! हम दोनो ने मिल कर एक ही थाली में खाना
खाया! खाने के दौरान मैंने नितिन से कहा कि दीदी और जीजाजी के आने तक वह
मेरे ही कमरे में मेरे साथ ही सो जाये करे ताकि रात में मुझे बाथरूम जाने
आने में उसकी मदद मिल सकेगी! नितिन मान गया और बर्तन रसोई में रखने के बाद
वह मेरे पास आ कर लेट गया! उसने अपना एक हाथ मेरे मम्मों पर रख दिया और
मैंने भी उसके लौड़े को पकड़ लिया! हम बहुत देर तक बाते करते रहे और फिर सो
गए! बातों बातों में नितिन ने मुझसे चुदाई के बारे टोहने कि कोशिश की लेकिन
मैंने उसे टाल दिया और बात आगे नहीं बढ़ने दी! मैं अपनी कमजोरी कि वजह अभी
ऐसा कुछ नहीं करना चाहती थी जिस से मैं दुबारा बीमार पढ़ जाऊं! इसलिए अगले
चार दिन तक हमने अपनी दिनचर्या इसी तरह मसला मसलाई, चूसा चुसाई और शरबत
पीने तथा रबड़ी खाने तक ही सीमत रखी!

पांचवें दिन भी जब दीदी का फोन आया तो उन्होंने बताया कि वह लोग सात दिन
बाद अगले इतवार रात तक ही वापिस आ पाएँगे! क्योंकी जीजाजी बड़े हैं इसलिए वह
सभी रीति रिवाज समाप्त होने के बाद ही यहाँ से चलेंगे! दीदी ने मुझे एक
बार डाक्टर को बुला कर दिखने की सलाह भी दी! उनके ऐसा कहने पर मैंने डाक्टर
साहिब को फोन करा और उन्हें आ कर देख जाने को कहा, तो उन्होंने शाम को चार
बजे तक पहुचने का कहा! तब मैंने नितिन को कालेज में फोन कर के सब बता दिया
और कहा कि वह चार बजे से पहले ही घर पहुँच जाये!

शाम को ४ बजे डॉक्टर साहिब आये और मेरा चेकअप किया और कहने लगे कि मेरा
स्वस्थ पहले से बहुत बेहतर हो गया है और मैं अब उठ बैठ सकती हूँ तथा नहा धो
भी सकती हूँ! लेकिन मुझे अभी खाने पीने का ध्यान रखना होगा और आराम भी
करना होगा! मैं सिर्फ घर में चल फिर सकती हूँ! डॉक्टर साहिब के जाने के बाद
मैंने मुन्नी को कह दिया कि उसे अगले दिन से जल्दी आने कि जरुरत नहीं है
और जैसे पहले आती थी वैसे ही आया करे! मुन्नी के जाने के बाद मैं उठ कर
बाथरूम गई और बाद में नितिन के कमरे में उसके पास जा कर बैठ गई! नितिन
बिस्तर पर बैठा पढ़ रहा था तो मैं भी उसी के पास बैठे बैठे लेट गई! आधे घंटे
के बाद नितिन का काम समाप्त हो गया तो वह भी मेरे पास लेट गया और मेरे
चेहरे पर हाथ फेरने लगा! अचानक उसने मेरे चेहरे को दोनों हाथों से पकड़ कर
मेरे मुहँ को चूम लिया! मुझसे भी नहीं रहा गया और मैंने भी उसके होंठों पर
जोर से किस कर दिया! फिर क्या था नितिन मेरे साथ लिपट गया और होटों को
होटों से भिड़ा कर किस करने लगा! हम बहुत देर तक एक दुसरे कि जीभ को भी मुहँ
में ले कर बारी बारी चूसते रहे और किस करते रहे!

रात का खाना खाने के बाद हम दोनों नग्न हो कर एक ही बिस्तर पर लेट गए!
नितिन कभी मेरे मम्मों को चूसता और कभी हाथों से मसलता! बीच बीच में वह
अपने हांथों से मेरी चूत और चूत के बालों को सहला भी देता! मैं भी उसके
लौड़े और टट्टों से खेलती रही, कभी आगे पीछे हिलती, कभी मरोड़ती, कभी सुपाडे
को मॉस से ढक देती और कभी सुपाडे को बाहर निकल कर उसे जीभ से चाट लेती! इस
तरह आधे घंटे तक हम एक दुसरे से खेलते रहे और रोज कि तरह के एक दूसरे को
चूसते चसाते रहे! जब हम दोनों ने अपनी अपनी शरबत और रबड़ी की टंकियां खाली
कर दी तब सीधे हो कर एक दूसरे से लिपट के सो गए! सुबह नितिन कि नींद खुली
तो वह किचन में जा कर चाय बना लाया और हम दोनों ने चाय पी! फिर हम दोनों एक
ही बाथरूम में घुस गए और एक साथ टोयेलेट सीट पर बैठ कर मूता भी और हगा भी!
बाद में नितिन ने मुझे खूब साबुन लगा कर नहलाया, उसने हर जगह हाथ लगा लगा
कर मसला और मस्ती ली! मैंने भी उसे खूब साबुन लगाया और उसके लौड़े और टट्टों
को रगड़ रगड़ नहलाया! फिर हमने एक दुसरे को कपड़े पहनाये, दोनो ने मिल के
नाश्ता बनाया और खाया! कालेज जाने से पहले नितिन मेरे पास बाई कहने आया और
मेरे मेरे मम्मों को दबा कर मुझे किस किया! जब वह किस कर रहा था तब मैंने
भी उसके लौड़े और टट्टों को कस के दबा दिया, जिससे वह एक दम सी सी कर उठा
था!

नितिन के जाने के बाद मैं कुछ देर के लिए मैंने बिस्तर पर आराम किया और
मुन्नी के आने पर उठ कर उस को काम समझाया तथा किचन का काम समेटने में लग
गई! दुपहर को जब मुन्नी काम खतम कर के चली गई तो मैं नितिन का इन्तजार करते
हुए फिर बिस्तर पर लेटे लेटे सो गई! तीन बजे के बाद नितिन आया और मुझे
जगाया, तब हम ने खाना खाया और फिर उसीके कमरे में लेट कर एक दुसरे के अंगों
से छेड़खानी करते हुए सो गये! पांच बजे नींद खुली तो मैंने उठ के कपड़े पहने
और बाहर वाले कमरे आ कर बैठ गई! नितिन ने भी कपड़े पहने और पढ़ने बैठ गया!
साढ़े पांच बजे मुन्नी आई और उसने हमें चाय पिलाई, फिर रात का खाना बनाया और
बाकी का काम समेट कर चली गई! मुन्नी के जाने के बाद मैंने ब्रा और कच्छी
सहित अपने कपड़े उतार दिए और निकर तथा बनियान पहन कर नितिन के पास बिस्तर पर
लेट गई! नितिन पढाई के साथ साथ अपने एक हाथ से मेरे मम्मों और निप्पलों को
मसलता रहा!

जब वह पढ़ कर उठा तो मैंने खाना लगाया और हमने एक दूसरे को खिलाया! खाने के
दौरान नितिन ने कहा कि उस रात हम उसीके कमरे में सोते हैं! मेरे हाँ कहने
पर उसने बिस्तर को ठीक किया और अपने कपड़े उतार दिए! फिर मेरी निकर तथा
बनियान उतार कर मुझे भी नग्न कर दिया और मुझ से चिपट गया! बातों ही बातों
में नितिन ने बताया कि उसने मुझे और दीदी को छोड़ कर और किसी भी लड़की या औरत
को नग्न नहीं देखा था! मुझे और दीदी को वह अक्सर बाथरूम में नहाते हुए
देखा करता था! जब मैंने पूछा कि कैसे देखता था तो उसने बताया कि जब मैं और
दीदी नहाने जाती थीं तो अक्सर बाथरुम का दरवाज़ा आधा खुला छोड़ देती थीं और
वह उस में से झांक कर देखा करता था! उसने यह भी बताया कि दीदी तो चूत के
बाल हमेशा साफ़ रखती है और उसने उन्हें कई बार शेव करते हुए भी देखा था!
उसने बताया कि उसका किसी भी लड़की या औरत के साथ कोई भी सम्बन्ध नहीं था और
मैं पहली लड़की हूँ जिसे उसने छूआ था, हाँ उसने दीदी के पास लेटे लेटे उनके
मम्मों पर कई बार हाथ रख कर सोया था! उसने बताया कि लड़कियों से क्या और
कैसे करना होता है इसके बारे में उसे कुछ भी पता नहीं है और इसीलिए डरता है
कि अगर वह बाहर किसी लड़की से रिश्ता बनाए तो कहीं उसका मजाक ना उड़ जाये!
इसलिए उसने इस बारे में मुझे उसकी सहायता करने का आग्रह किया ताकि बात घर
में ही रहेगी! जब मैंने उससे पूछा कि किसी तरह कि सहायता चहिये तो उसने
मेरे साथ चुदाई करने की इच्छा प्रकट की!

मैंने उसे बताया कि मैं तो पहले कभी चुदी नहीं और मुझे इस बारे में जयादा
मालूम नहीं है तो उसने कहा कि वह भी पहली ही बार करगा! उसने बताया कि उसने
इन्टरनेट पर इस बारे में बहुत कुछ देखा हुआ है! तब मैंने भी उसे बताया कि
नेट पर तो मैंने भी बहुत कुछ देखा है पर कुछ करने को डर लगता है! इसके बाद
हम रोज कि तरह किस करते रहे और चूत और लौड़े को चूसते रहे! नितिन की बातों
और चुसाई के कारण मैं बहुत गरम हो गई और मुझ से रहा नहीं गया तो मैंने
नितिन के कान में कहा कि मेरी चूत में बहुत खुजली हो रही है और उसको मिटाने
के लिए कुछ करे! तब नितिन ने उठ कर मुझे सीधा किया और मेरी टांगों को चौड़ा
कर के मेरी चूत को चूसने लगा! वह बार बार मेरे छोले पर जीभ फेरने लगा जिस
की वजह से मैं आह्ह्ह आहह्ह्ह और सी सी सी की आवाजें निकालने लगी! मेरे
अंदर की आग बहुत जयादा भडकने लगी तब मैंने नितिन से कहा कि अब और सहा नहीं
जाता और अब थे आग तो तुम्हारी बौछार से ही बुझेगी! तब नितिन ने मेरी दोनों
टाँगे उपर उठा कर अपने कंधों पर रखा और अपने लौड़े को मेरी चूत के मुहँ पर
रख के उसे अंदर डालने के लिए धक्का लगाने लगा लेकिन उसका लौड़ा बार बार फिसल
जाता था!

कई कोशिशों के बाद जब नितिन को सफलता नहीं मिली तो उसने मुझसे मदद के लिए
इशारा किया! तब मैंने हाथ नीचे कर के नितिन के लौड़े को पकड़ कर चूत के मुहँ
पर लगा दिया और उसे धक्का लगाने को कहा! नितिन ने जैसे ही अहिस्ता से धक्का
लगाया तो उसका लौड़ा फिसला नहीं और मेरी चूत के मुहँ पर टिक गया! अगले
धक्के लगने से उसका सुपाडा मेरी चूत के अंदर घुसने लगा और मेरी चूत में
दर्द होनी शुरू हो गई! मैंने उस दर्द को बर्दाश कर लिया और मैंने नितिन को
धक्का लगाते रहने को कहा! जैसे ही नितिन ने एक और धक्का लगाया तो उसका आधा
सुपाडा चूत के अंदर चला गया और मेरी उईईईईई………………… कर के चीख निकल गई! मुझे
लगा कि मेरी चूत फट रही थी और वह दर्द मुझ से सहन नहीं हो रहा था! नितिन
ने पूछा भी कि क्या वह लौड़े को हटा ले लेकिन मैंने उसे मना कर दिया और
धक्का लगाने को कहा! इस बार नितिन ने थोड़ा जोर से धक्का लगाया और उसका पूरा
सुपाडा मेरी चूत के अंदर चला गया और मेरी तो उईईईईई………..माँ……….
उईईईईई………..माँ………. की चीखे निकल गई! मैंने नितिन को थोड़ा रुकने को कहा!

लगभग पांच मिन्ट रुकने के बाद मुझे कुछ आराम मिला तो मैंने नितिन को फिर से
धक्के लगाने को कह दिया! जब उसने अगला धक्का लगाया तो उसका लौड़ा मेरी चूत
में दो इंच घुस गया था और दर्द के मारे मेरी चीखें पूरे कमरे में गूँज गई!
मैं तड़पने लगी और मेरे आंसू निकल आये! इस बार नितिन रुका नहीं और एक और
धक्का मार कर अपने आहा लौड़ा मेरी चूत के अंदर घुसा दिया! अब तो मैं हाथ पैर
पटकने लगी, उईईईईई………..माँ………. उईईईईई………..माँ………. करके चीखें मारने लगी
और नितिन को गालियां भी देने लगी! नितिन का अब सुपाडे समेत चार इंच मेरी
चूत में था इसलिए वह कुछ देर के लिए रुक गया! जब मैं शांत हुई तो मुझे लगा
कि मेरी चूत से कुछ रिस रहा था, मैंने अपना हाथ अपनी चूत पर लगाया और
उँगलियाँ को खून से लथपथ देखा तो मैं घबराह गई लेकिन फिर सोचा कि जब ओखली
में सिर दिया है तो डरना किस बात का, यह तो होना ही था! इसके बाद नितिन ने
मुझे शांत देख कर एक और धक्का पूरे जोर से लगा दिया और पूरा का पूरा आठ इंच
का लौड़ा मेरी चूत के अंदर घुसा दिया! इस बार भी मुझे दर्द भी हुआ और मैं
उईईईईई………..माँ………. कर के चीखी भी लेकिन यह दर्द अब मुझे मीठा लगने लगा था!

अब नितिन ने अहिस्ते अहिस्ते धक्के लगाने शुरू कर दिए और कुछ ही देर में
ऊन्हे तेज भी कर दिए! मुझे आनंद आने लगा था और मैं भी उसके धक्कों का साथ
देने लगी थी! लगभग दस मिन्ट कि तेज चुदाई के बाद मेरी चूत एकदम सिकुड गई और
नितिन के लौड़े को जकड लिया! उसे धक्के लगाने में दिक्कत होने लगी थी तब वह
थोड़ी देर के लिए रुका और मेरे ढीले होने का इंतज़ार करने लगा! जब उसे
ढीलापन महसूस होने लगा तो वह फिर से धक्के लगाने लगा! इस बार वह बहुत तेज
धक्के लगा रहा था और मैं उसे और तेज और तेज शाबाश नितिन बहुत तेज़ी से करने
की आवाजें लगा रही थी! इसी तेज धक्कों में अचानक नितिन का लौड़ा फडफडाया और
मेरी चूत भी एक दम से सिकुड़ी और हम दोनों की एक साथ चीखे निकली
उन्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्………….. उन्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह………..
आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…………… आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…………… उईईईईईईईईई……………..
उईईईईईईईईई…………….. आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…………… आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…………… और नितिन
के लौड़े ने बरसात कर दी! एक बोछार, दो बोछार, तीन बोछार, चार बोछार, पांच
बोछार , छह बोछार………… और फिर मैं गिनती भूल गई! पता नहीं नितिन ने कितनी ही
बोछारें करी, मेरी चूत में तो जैसे बाढ़ आगई थी जिससे मेरी सारी आग बुझ गई!
हम दोनों बहुत थक गए थे इसलिए नितिन ने मेरी टाँगे अपने कंधों से उतारी और
निढाल हो कर मेरे ऊपर ही लेट गया, मेरी चूत भी ढीली होने लगी थी और उसका
सिकुड़ा हुआ लौड़ा अब टल्ली (सुकड़ा हुआ लौड़ा) बन कर मेरी चूत से बहार निकलने
लगा था! लगभग पांच मिन्ट के बाद नितिन का साँस में साँस आई तो वह मेरे ऊपर
से हटा तथा अपनी टल्ली को मेरी चूत से बाहर निकला!

हम दोनों उठ कर बाथरूम गए और एक दूसरे को धोया तथा साफ़ किया, तब मैंने देखा
कि नितिन कि टल्ली एकदम लाल हो गई है और उस पर नीले रंग कि नसें उभर आईं
हैं! जब मैंने नितिन को इस बारे में बताया तो उसने कहा कि इतनी रगडाई के
कारण तह तो होना ही था! फिर कमरे में आ कर नितिन ने मुझे लिटाया और मेरी
चूत को ध्यान से देखा और बताया के वह भी काफी खुल गई थी, उसके बाहर का भाग
बहुत लाल हो गया था तथा सूज गया था! अंदर का भाग गुलाबी रंग का होगया था!
इस चुदाई से मुझे इतना आनद तथा संतोष मिला था कि मैंने पागलों कि तरह नितिन
को अपने पास खींच कर लिटा लिया और उसे और उसकी टल्ली को चूमने लगी! नितिन
भी मुझे और मेरी चूत को चूमता रहा और फिर हम दोनों एक दूसरे को लिपट तथा
चिपट के नींद कि आगोश में खो गए!

अगले दिन क्या हुआ यह मैं आप को कुछ समय के बाद ही बताउंगी! तब तक कृपया
इंतज़ार कीजिये और इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दीजिए! बाई बाई ……………!
क्या नजारा था !










हाय दोस्तो, मैं हेनरी अमेरिका से ! मेरी उम्र तीस साल है और मैं एक मैगजीन
के लिए फोटो-शूट करता हूँ। इस काम में मेरे चार दोस्त भी सहायता करते हैं।
हमारा एक स्टूडियो है, हम लड़कियों की सेक्सी और बिना कपड़ों की तस्वीरें
शूट करके मैगजीन को बेच देते हैं। इससे हमें अच्छी कमाई हो जाती है।



मेरी बीवी का नाम जेनी है। वो छब्बीस साल की सुंदर और सेक्सी औरत है। वो तो
वैसे स्लिम है लेकिन उसके वक्ष और कूल्हे बड़े और जानलेवा हैं। मेरे
स्टूडियो के चारों दोस्त जिनके नाम टॉम, रोजर, हैरी और माइक हैं, मेरी बीवी
से कभी नहीं मिले हैं।



ये चारों भी मेरी उम्र के हैं, फोटो-शूट के लिए मॉडल खोजते हैं और उनकी
फोटो उतारते हैं। इसके काम के लिए हम मॉडल को पैसे देते हैं, कभी-कभी कोई
सेक्सी मॉडल राजी हो जाये तो सेक्स भी कर लेते हैं। लेकिन यह बहुत कम ही
होता है।



एक दिन हमारी शूटिंग तय हुई और हमने मॉडल भी तैयार कर ली थी। लेकिन एक दिन
पहले उसने इंकार कर दिया और हम लोग मैगजीन से अग्रिम भुगतान भी ले चुके थे।
उनको तय समय पर फोटो नहीं देने पर हम परेशानी में पड़ सकते थे।



इस मॉडल को मैंने ही तैयार किया था। इसलिए मुझे ज्यादा चिंता हो रही थी।
मैं रात में घर आकर यही सोच रहा था की कल कैसे फोटो-शूट होगा।



रात में सोने के वक्त जेनी मेरी बीवी मेरे पास आई। वो सेक्स के मूड में थी लेकिन मैं चिंता ग्रस्त था।



उसने पूछा- क्या हुआ?



मैंने उसे बताया कि कैसे एक मॉडल ने इन्कार कर दिया शूटिंग से !



उसने पूछा- तुम लोग मॉडल लड़की को कितना पैसा देते हो?



मैंने कहा- एक हजार डॉलर तक !



उसका मुंह खुला का खुला रह गया- इतने पैसे? इतने पैसे के लिए तो मैं कुछ भी
कर सकती हूँ ! क्या मैं तुम्हारे स्टूडियो के लिए मॉडल बन सकती हूँ?



मैंने कहा- बेकार की बातें मत करो। तुमको नहीं पता कि कैसी फोटो हम लेते हैं। कम कपड़ों में और कुछ नंगी फोटो भी। तुम ऐसा कर पाओगी?



उसने कहा- हजार डॉलर के लिए कुछ भी कर सकती हूँ मैं ! तुम चिंता मत करो,
अगर तुमको अपने दोस्तों के सामने मेरी फोटो उतारने में कोई दिक्कत नहीं है
तो मुझे कोई परेशानी नहीं है।



मेरे पास और कोई उपाय भी नहीं था, मैंने अपने दोस्तों को फ़ोन करके बता
दिया कि नई मॉडल मिल गई है और हम कल स्टूडियो में मिलेंगे।उनमें से किसी ने
भी जेनी को नहीं देखा था इसलिए कोई समस्या नहीं थी। फिर मैंने उसके साथ जम
कर सेक्स किया और सो गया।



अगले दिन सुबह जेनी ने मुझसे कहा- तुम अपने स्टूडियो जाओ। मैं तैयार होकर आती हूँ।



मैं स्टूडियो चला आया लेकिन भीतर भीतर डर रहा था कि मेरी बीवी ऐसा कर पायेगी या नहीं।



मैंने अपने बाकी दोस्तों से कहा- वो एक घण्टे में आ जाएगी। कैमरा, लाइट वगैरह तैयार रखो।



थोड़ी देर के बाद जेनी भी आ गई।



मैं तो पहचान ही नहीं पाया उसे पहले। काले रंग की मिनी स्कर्ट और सफ़ेद टॉप
में कहर ढा रही थी, बाल कटा लिए थे, शरीर से चिपके हुए टॉप में उसके चूचे
लगता था कि फाड़ कर बाहर निकल आ जायेंगे। कसी हुई स्कर्ट में उसकी पैंटी की
आउट लाइन नजर आ रही थी। मेरा तो देखते ही खड़ा हो गया। मेरे सारे दोस्तों
का भी यही हाल था।



एक ने धीरे से कहा- यह तो सेक्स-बम लग रही है !



हमने उसका स्वागत किया और बैठाया। हम अपने माडलों के लिए शराब का इंतजाम
रखते हैं। कई बार नई मॉडल अपने कपड़े उतारने में झिझकती है तो थोड़ी ड्रिंक
कर लेने से अपने को उन्मुक्त महसूस करती है।



मेरे दोस्त टॉम ने हम सभी के लिए एक एक पैग तैयार किया और सभी के हाथ में दे दिया।



पी लेने के बाद जेनी ने कहा- मैं तैयार हूँ ! काम शुरू किया जाये।



हमने अपने कैमरे तैयार किए। वो सोफे पर बैठ कर विभिन्न मुद्राओं में
तस्वीरें खिंचवाने लगी। हर मुद्रा पहले के मुकाबले ज्यादा कामुक होती जा
रही थी। हमने कुछ तस्वीरें पूरे कपड़ों में ली।



फिर उसने अपनी टांगें थोड़ी चौड़ी की, उससे उसके स्कर्ट के भीतर का नजारा
दिखने लगा। सफ़ेद पैंटी की झलक मिली, उस तरह से भी कई तस्वीरें ली। वो एक
व्यव्सायिक मॉडल की तरह मुद्राएं बना रही थी। मैं उसे देख देख कर उत्तेजित
होता जा रहा था। इसके बाद उसने अपनी टॉप के बटन खोलना शुरू किया। मैंने सभी
की ओर देखा। सभी की पैंट के सामने वाला हिस्सा धीरे-धीरे फूलता जा रहा था।



उसने अपनी टॉप उतार दी। भीतर उसने काली लेसी ब्रा पहनी हुई थी जिसमे उसकी
36″ की चूचियाँ बड़ी मुश्किल से समाई थी। इतने लोगों के सामने ऐसे तस्वीरें
खिंचवाने से वो भी उत्तेजित हो गई थी। उसके कड़े चुचूक ब्रा के ऊपर से ही
महसूस हो रहे थे। उसने अपने हाथ ऊपर उठा कर, खड़े होकर कई मुद्राएँ की और
हमने तस्वीरें ली।



इसके बाद उसने धीरे से अपनी स्कर्ट भी उतार दी। अब वो ब्रा और सफ़ेद पैंटी में थी।



क्या क़यामत लग रही थी काली ब्रा और सफ़ेद कसी हुई पैंटी में !



चूत के उभार तक महसूस हो रहे थे। पीछे घूमी तो जैसे उसके कूल्हे पैंटी फाड़
कर निकल जायेंगे ! सभी के चेहरे लाल हो गए थे। अपने को काबू करना मुश्किल
हो गया था। किसी को भी मालूम नहीं था कि यह मेरी बीवी है, सभी के मन में
उसे चोदने का ख्याल शायद आने लगा था।



उसने केवल ब्रा पैंटी में कई सेक्सी चित्र खिंचवाए। इसके बाद नग्न चित्रों की बारी थी।



हमने उसे कहा तो वो बोली- मैं तैयार होकर आती हूँ ! तब तक तुम लोग मेरे लिए एक और पैग तैयार करो।



फिर वो चेंजरूम में चली गई। हमने आपस में धीरे धीरे बात की। मेरे सभी दोस्त
एक बात पर सहमत थे कि जेनी जैसी सेक्सी और बिंदास लड़की उन्होंने आज तक
नहीं देखी थी। माइक तो अपने लंड को पैंट के ऊपर से ही दबा रहा था।



तब तक वो आ गई, उसने एक लाल रंग की एक लम्बी शर्ट पहन रखी थी। बाहर से
देखने से यही लगा कि उसने शर्ट के भीतर और कुछ नहीं पहन रखा है। बहुत
सेक्सी लग रही थी वो लाल शर्ट में। फिर उसने शर्ट के ऊपर के दो बटन खोल कर
आधी दिखाई देती हुई चूचियों के साथ कुछ चित्र दिए। फिर पीछे घूम के शर्ट
उठा के अपनी कसी हुई नंगे कूल्हों के कुछ चित्र दिए। उसने ब्रा-पैंटी उतार
दी थी।



फिर उसने शर्ट के सारे बटन खोल दिए और दोनों हाथ फैला दिए।



उफ़ ! क्या नजारा था ! बड़ी बड़ी तनी हुई चूचियाँ ! कड़े चुचूक ! सपाट पेट ! उसके नीचे बिना बालों की चूत !



जैसे मैं भी अपनी बीवी को पहली बार ऐसे देख रहा हूँ !



कई तस्वीरें हमने इस तरह ली। फिर उसने अपनी शर्ट उतार कर फेंक दी। अब वो
पूरी तरह से नंगी थी। सोफे पर बैठ कर कुछ मुद्राओं में तस्वीरें दी। अपने
टांगें चौड़ी करके, चूत को फैला कर !



मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था।



फिर वह एक घोड़ी की तरह अपने हाथ-पांव पर हो गई, जैसे वो हमसे कह रही हो- देख क्या रहे हो ? चोदो मुझे !



मुझसे अब सहन नहीं हुआ, कुछ सोच नहीं पा रहा था मैं ! मैंने अपना कैमरा
नीचे रखा और 30 सेकंड से भी कम समय में अपने सारे कपड़े उतार दिए और अपना
खड़ा लंड उसकी चूत में एक झटके में घुसा दिया। उसके पतली कमर को दोनों हाथों
से पकड़ के जोर जोर से उसे चोदने लगा। वो भी मस्ती में आकर चुदाने लगी।



मेरे दोस्त भी धीरे धीरे अपने कपड़े उतारने लगे। माइक ने अपना लंड उसकी मुँह
की ओर बढ़ाया तो वो उसे अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। टॉम नीचे से उसके
चुचूक चूसने लगा, हैरी उसकी पीठ सहला रहा था और रोजर उसके चूतड़ !



सारे नंगे थे। सभी के लंड खड़े। मैं सोच कर ही घबरा रहा था कि आज मेरी बीवी
की चूत के बारह बज जाएंगे। लेकिन मैंने उसे चोदना बंद नहीं किया। जल्दी ही
मैं उसकी चूत में झड़ गया। फिर रोजर ने उसे सोफ़े पर सीधा लिटा दिया और उसके
ऊपर चढ़ कर उसे चोदने लगा। हैरी का लंड वो मुँह में लेकर चूस रही थी। माइक
और टॉम उसके चूचे दबा रहे थे और चुचूक चूस रहे थे।



मैं बगल में बैठ कर अपनी बीवी की चुदाई देख रहा था। क्या चुद रही थी !



लंडों की बारिश… मुँह से आवाज निकल रही थी….. और जोर से …….. ओह ….. आह
………. फाड़ डालो मेरी चूत को ……….. ओह … आह … आह …….. मुंह में दूसरा लंड
डालो………. चूचियां दबाओ…….. मैं आज स्वर्ग में हूँ…….. चोदो मुझे……..



क्या नजारा था !



मेरी बीवी मेरी आँखों के सामने मेरे दोस्तों से चुद रही थी मजे ले ले कर !



रोजर उसकी चूत में झड़ गया। वो उठकर बाथरूम गई और अपनी चूत साफ़ करके आई। फिर
टॉम को अपनी चूत चूसने को कहा। मैं उसके होंठों को अपने होंठों में लेके
चूसने लगा। नीचे टॉम उसकी चूत को चूसने में लगा था। हैरी और माइक उसके एक
एक स्तन में लगे थे, रोजर झड़ने के बाद सुस्ता रहा था।



फिर टॉम की बारी आई उसे चोदने की। ऐसे हम पांचों ने मिल कर सारे दिन कई
तरीके से उसे चोदा। बहुत मजा आया। अन्त में हमने उसे पैसे दिए।



उसने पैसे लिए और बोली- इतना मजा आया कि पैसे लेने का दिल नहीं करता। अगली
बार मैं यह तुम लोगों के लिए मुफ़्त में कर दूंगी। बस मुझे ऐसे ही चोदना।



फिर यही सिलसिला चलने लगा।



आप लोगों को यह कहानी कैसी लगी ? मुझे जरूर बताइएगा।
शालू की बाहों में








आज मैं आपको अपनी एक सहेली की कहानी सुनाने जा रही हूँ।



मेरी एक बहुत ही प्यारी सहेली है शालिनी।



उसकी उमर कोई 28 साल, कद 5’6″, फ़ीगर 34-28-36, गुलाबी रंग, बड़ी-बड़ी आँखें,
गुलाबी होंठ, खूब फूले हुए स्तन, भरे-भरे चूतड़ और उनसे नीचे उतरती सुडौल
जांघें। बहुत ही प्यारी और सेक्सी लड़की है वो। हम दोनों कॉलेज से एक साथ
हैं और कोई बात एक दूसरे से छुपी हुई नहीं है। और हो भी कैसे सकती है
क्योंकि कॉलेज के ज़माने से ही हम दोनों के बीच एक रिश्ता और बन गया।



एक रोज़ मैं उसके साथ उसके घर गई तो घर मैं कोई नहीं था। हम दोनों मज़े से
बातें कर रहे थे और मैं उसे सता रही थी कि रविवार को तुम कपिल से मिली थी
तो तुम दोनों ने क्या किया था बताओ न मुझे !



शालू शरमा रही थी। कपिल उसका चचेरा भाई था और दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार
करते थे। दोनों अक्सर घूमने और पिक्चर देखने जाते थे। मेरे आग्रह करने पर
उसने बड़े शरमाते हुए बताया कि उस दिन कपिल ने उसका चुम्बन लिया था।



मैंने उसे लिपटा कर उसका गुलाबी गाल चूम लिया- हे बेईमान ! अब बता रही हो?



तो वो शरमा कर हंस दी।



हे शालू ! बता ना और क्या किया था तुम दोनों ने?



बस ना ! सिर्फ़ चुम्मा लिया था उसने ! वो शरमा कर मुस्कराई।



ऐ शालू ! बता न प्लीज ! कैसे किया था?



हट बदतमीज़ ! वो प्यार से मुझे धक्का देकर हंस दी।



मैं उसकी भरी-भरी जांघों पर सिर रख कर लेट गई, उसके गोल गोल दूध मेरे चेहरे
के ऊपर थे, मैंने धीरे से उसके दाएँ दूध पर उंगली फेरी- क्यों शालू ! ये
नहीं दबाये कपिल ने?



तो उसके चेहरा शरम से लाल हो गया और धीरे से बोली- हाँ !



तो मैंने उसका खूबसूरत गुलाबी चेहरा अपने दोनों हाथों में लेकर गाल चूम लिये- कैसा लगा था शालू?



हाय आइना ! क्या बताऊँ ! मेरी तो जैसे जान निकल गई थी जब उनकी गर्म-गर्म
ज़बान मेरे मुँह में आई ! मैं मदहोश हो गई ! उसने मुझे अपनी बाहों में ले
लिया और एकदम से अपना हाथ यहाँ रख दिया !



वो आइना का हाथ अपनी बाईं चूची पर रख कर सिसकी।



मैं तड़प उठी और बहुत मना किया पर वो न माने और दबाते रहे।



फिर शालू ?



आइना, बड़ी मुश्किल से कपिल ने मुझे छोड़ा।



शालू की बातें सुनकर मेरी हालत अजीब होने लगी, ऐसा लग रहा था कि जैसे पूरे जिस्म पर चीटियां दौड़ रही हों।



मेरा यह हाल देख कर शालू मुस्कुराई और मेरे गाल सहला कर बोली- तुमको क्या हो गया आइना?



तो मैंने शरमा कर उसकी जांघों में मुँह छुपा लिया। वो मेरी पीठ सहला रही थी
और मेरी हालत खराब हो रही थी क्योंकि मेरा चेहरा बिल्कुल उसकी चूत के ऊपर
था जो खूब गर्म हो रही थी और महक रही थी।



मैंने धीरे से उसकी चूत पर प्यार कर लिया तो वो सिसक उठी- आह ! आह आह ! आइना उफ़ ! नहीं ! ना ! प्लीज मत करो !



और मेरे चेहरा उठाया। हम दोनों के चेहरे लाल हो रहे थे, शालू के गुलाबी
होंठ कांप रहे थे, मेरे चेहरे को अपने हाथों में लेकर वो सिसकी- आइना !



और मैं भी अपने को ना रोक सकी और उसके गुलाबी कांपते होंठ चूम लिये।



एक आग सी लगी हुई थी हम दोनों के जिस्मों में !



मैं उसके होंठों पर होंठ रख कर सिसक उठी- शालू ! प्लीज मुझे बताओ न कपिल ने कैसे चूमे थे ये प्यारे होंठ?



तो अपने नाज़ुक गुलाबी होंठ दांतों में दबा कर मुस्कुराई- आइना, उसके लिये तो तुमको शालू बनना पड़ेगा।



मैं हंस दी !



उसके गाल चूम कर बोली- चलो ठीक है ! तुम कपिल बन जाओ।



शालू ने अपनी बाहें फैला दी तो मैं उनमें समा गई और वो मेरे गाल, होंठ, आँखें, नाक और गर्दन पर प्यार करने लगी।



तो मैं तड़प उठी- आह आ आह शा शाआलू ऐ ए मा नहीं ओह ओह ओह ऐ री उफ़ ये अह ओह ऊ
ऊम अह अह क्या कर रही हो अह है है बस बस नहीं न ऊफ और उसके होंठ मेरे
होंठों से चिपक गये और उसकी गुलाबी ज़बान मेरे होंठों पर मचलने लगी।



उसका एक हाथ जैसे ही मेरे दूध पर आया तो मेरी चीख निकल गई- नाआ हि आअ ह अह
शाअलु ऊफ़ मत करो प्लीज ये आअह क्या कर रही हो, तो मेरे होंठ चूस तु !



शालू बोली- वो ही तो कर रही हूँ जो कपिल ने मेरे साथ किया था।



वो मुझ से जुड़ गई और उसकी ज़बान मेरे होंठ खोल रही थी धीरे-धीरे और फिर अंदर
घुस गई तो मैं उसकी ज़बान की गर्मी से पागल हो उठी और उससे लिपट गई।



शालू ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरे दोनों दूध दबाते हुए मेरे होंठ
चूसने लगी। ऊफ़ उसकी ज़बान इतनी चिकनी, गर्म और इतनी लम्बी थी कि मेरे पूरे
मुँह में मचल रही थी और मेरे गले तक जा रही थी।



हम दोनों के चेहरे पूरे लाल हो रहे थे और थूक से भीग चुके थे। मुझे बहुत
मज़ा आ रहा था, मैं भी उसका साथ दे रही थी और उसका प्यारा सा गुलाबी चेहरा
हाथों में लेकर उसके होंठ और ज़बान चूस रही थी, सिसकार रही थी- आह अह शालू
अह अह हां अह !



आइना मेरी जान !



ऊफ़ शालू ! कितनी मज़ेदार ज़बान है तेरी ! इतनी लम्बी ! ऊफ़ ! सच्ची कपिल को मज़ा आ गया होगा !



आअह धीरे आइना ! अह आअह सच्ची आइना ! बहुत मज़ा आया था क्या बताऊँ तुझे ! आह धीरे से मेरे होंठ ! आह आइना !



उठो न प्लीज अब !



हम दोनों उठे तो फिर से मुझे लिपटा कर मेरे होंठ चूसने लगी और मेरे कुरते
की ज़िप खोली और मेरी ब्रा का हुक खोल दिया और मेरे मुँह में सिसकी- उतारो न
आइना प्लीज !



और मेरे हाथ ऊपर करके मेरा कुरता अलग कर दिया।



आअह शालू ! ये आह !



तो मेरे होंठ चूम कर सिसकी- कुछ न बोलो आइना ! सच्ची बहुत मज़ा आ रहा है !



मैं उसके सामने टॉपलेस बैठी थी, शर्म से मेरी बुरी हालत थी। मैंने अपने
दोनों हाथों से अपने भरे-भरे दूध छुपा लिये और देखा तो शालू ने भी अपना
कुरता और ब्रा अलग अपने बद्न से हटा दिए थे और मैं उसे देखती रह गई- उफ़ !
कितने प्यारे दूध हैं शालू के ! खूब बड़े बड़े बिल्कुल गुलाबी रंग, तनी हुई
लम्बे चुचूक ! जिनके आस पास लाल रंग का गोल घेरा !



उसने मुझे अपनी तरफ़ देखते हुए पाया तो मेरी आँखें चूम लीं, मेरे दोनों हाथ
मेरे दूधों पर से हटाये और अपने दूधों पर रख लिर और होंठ चबा कर सिसकी- ऊई
मां आह आह !



और फिर उसने मेरे दूध पकड़े तो मेरी जान निकल गई- आऐ आ आऐ र अह्ह अह आअह ऊओह ऊऊम आआअह नहीं शा…लू !



और मैंने भी उसके दूध ज़ोर से दबाये तो शालू भी मुझसे लिपट कर सिसक उठी- आईए ऊउइ उ अह अह अह धीरे आह आइना ! धीरे आह मेरे दूधु !



और मेरे होंठों पर होंठ रखे तो एक साथ हम दोनों की ज़बाने मुँह के अंदर घुस पड़ी।



उसकी लम्बी चिकनी और गर्म ज़बान ने मुझे पागल कर दिया और फिर मुझे लिटा कर
वो भी मेरे ऊपर लेट गई। हमारे दूध आपस में जैसे ही टकराये तो दोनों की
चीखें निकल पड़ी और हम दोनों झूम गईं और मेरी चूत रस से भर गई।



मैंने उसे अपने बदन से लिपटा लिया और उसकी चिकनी पीठ और नर्म-नर्म चूतड़ सहलाने लगी।



इस पर वो मेरे जिस्म पर मचलने लगी। मैंने उसका गुलाबी चेहरा उठाया तो उसकी आँखें नहीं खुल पा रही थी, बहुत हसीन लग रही थी शालू !



मैं उसके गाल और होंठ चूसने लगी, उसके गोल नर्म नर्म दूध मेरे सांसों से टकराते तो जैसे आग लग जाती।



मैंने उसको थोड़ा ऊपर किया तो उसके खूबसूरत चिकने गुलाबी दूध मेरे सामने थे
मैं अपने आप को रोक न सकी और उसकी लाल चूची पर ज़बान फेरी तो वो मस्ती में
चिल्ला पड़ी- आईई माँ ! मर जाऊँगी मैं ! आह अह ओह ऊओफ़ अह आइना !
आह अह्ह हाँ ! ये ये ये भी किया था अश… अह कपिल ने ! शालू बोली।



और मैंने उसका पूरा का पूरा दूध अपने मुँह में ले लिया तो मज़ा आ गया। और
शालू ने मेरा चेहरा थाम कर अपने दूधों में घुसा लिया और सिर झटक कर मचलने
लगी- आ आ इए आइना ! धीरे प्लीज ऊफ़ ऐई री ! माँ ! धीरे से ! न आअह ! बहुत
अच्छा लग रहा है ! आह ! पूरा ! पूरा चूसो न ! ऊफ़ मेरा दूध आह ! आइना सची
ऐईए ऐसे नहीं ! न काटो मत प्लीज ! उफ़ तुम तो अह कपिल से अच्छा चूसती हो !
आअह आराम से मेरी जान !



और वो मेरे दूध दबाने लगी- सच्ची कितनी नरम दूध हैं तेरे आइना ! मुझे दो न प्लीज आइना !



तो मैंने होंठ अलग किये उसके दूध से और देखा तो उसका दूध मेरे चूसने से लाल और थूक से चिकने हो रहे थे।



मैंने जैसे ही दूसरा दूध मुँह में लेना चाहा वो सिसक उठी- आह आइना ! प्लीज
मुझे दो न अपनी ये प्यारी प्यारी चूचियाँ ! कितनी मुलायम हैं !



उइ सच्ची ? मैं उसकी चूचियाँ मसलने लगी तो मैंने उसके गीले लाल होंठ चूम लिये। शालू मेरी चूचियाँ चूसने लगी !



और मेरे मुँह से आवाजें निकलने लगी- अह आअह शालू ! आराम से मेरी जान ! आह ! और ! और क्या किया था कपिल ने बताओ न !



तो मेरे दूध पर से अपने चिकने गुलाबी होंठ हटाते हुए मुस्कुरा कर बोली- और
कुछ नहीं करने दिया मैंने !तो मैंने पूछा- क्यों शालू ! दिल नहीं चाहा
तुम्हारा।



वो मेरे ऊपर से उतर कर अपने पैर फैला कर बैठी और मुझे भी अपने से चिपका कर
बिठा लिया और मेरे दूधों से खेलते हुए बोली- आइना, सच दिल तो बहुत चाहा
लेकिन मैंने अपने को बड़ी मुश्किल से रोका क्योंकि डर लग रहा था।



और मेरे दूधों पर ज़बान फेरने लगी तो मेरी आंखें बंद हो गई मज़े में !



मेरा हाथ उसके चिकने मुलायम पेट पर आया और मैं उसकी गोल नाभि में उंगली
घुमाने लगी- आह शालू ! सच्ची कितनी लम्बी ज़बान है तुम्हारी ! मैं क्या करूं
! आह मेरे दूध आऐ ए माँ ! अह्ह ! धीरे ! ना ! इतनी ज़ोर से मत नोचो मेरे
दूध ! आह आह ओह ऊ ओफ़ शालू प्लीज नहीं ! आअह हन हां अन बस ऐसे ही चूसे जाओ
बहुत मज़ा आ रहा है !



आइना ! मेरी जान, सच्ची कहां छुपा रखे थे ये प्यारे-प्यारे दूधु तूने ! तो
मैं शरम से लाल हो गई उसकी बात सुनकर और उसकी एक चूची ज़ोर से दबाई तो वो
चिल्ला कर हँस पड़ी- ऊऊउइ माँ आइना। तो मैंने उसके होंठ चूम लिये।



शालू !



हूम्म !



तुमने बताया नहीं कपिल और क्या कर रहा था या करना चाह रहा था?



तो वो शरमा कर मुस्कुराई- आइना ! वो तो !



हाँ बोलो ना शालू प्लीज !



तो शालू ने मेरा हाथ अपनी सलवार के नाड़े पर रखा और धीरे से बोली- वो तो इसे खोलने के मूड में था।



फिर शालू?



मैंने रोक दिया उसे !



क्यों शालू ? क्यों रोक दिया ? बेचारा कपिल !



शालू मेरे गाल पर ज़ोर से काट कर हंस दी- बड़ी आई कपिल वाली !



मैं भी ज़ोर से चिल्ला कर हंस दी- ऐ शालू बताओ ना क्यों रोक दिया?



तो वो मुसकराई, मैंने कह दिया- ये सब अभी नहीं !



और वो फिर मेरे दूध चूसने लगी ज़ोर ज़ोर से तो मैं पागल हो उठी- आह शालू ! आराम से मेरी जान !



और मैंने उसकी सलवार खोल दी तो वो चौंक गई और मेरा हाथ पकड़ कर बोली- ये ! ये क्या कर रही हो आइना?



तो मैंने उसके गीले रस भरे होंठ चूम लिये- मेरी शालू जान ! कपिल को नहीं तो मुझे तो दिखा दो !



वो मुझसे लिपट कर मेरे पूरे चेहरे पर प्यार करने लगी- हाय मेरी आइना ! कब से सोच रही थी मैं ! आह मेरी जान !



और एकदम से उसने मेरी सलवार भी खोल दी और उसका हाथ मेरी चिकनी जांघों पर था।



मैं मज़े में चिल्ला पड़ी- ऊऊउइ शा..आ..लू !! ना..आ.. हाय !!



वो मेरे होंठ चूस रही थी और मेरी जांघें सहला रही थी, मैं मचल रही थी- नहीं
शालू ! प्लीज मत करो ! आ..इ..ए ऊ..ऊ..ओ..फ़ ना..आ..ही ना ! ओह मैं क्या
करूँ !



और उसने एकदम से मेरी जलती हुई चूत पर हाथ रखा तो मैं उछल पड़ी- हाय रे ! आह ! ये क्या कर दिया शालू !



मुझे कुछ होश नहीं था, उसका एक हाथ अब मेरी चूत सहला रहा था जो बुरी तरह
गरम हो रही थी, दूसरे हाथ से वो मेरा दूध दबा रही थी और उसकी लम्बी गरम
ज़बान मेरे मुँह में हलचल मचा रही थी।



मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरी चूत झड़ने वाली है। मैंने उसे लिपटा कर उसके चूतड़ों पर हाथ फेरा तो वो मचल उठी और मैं भी मस्त हो गई।



उसकी सलवार भी उतर चुकी थी, अब हम दोनों बिल्कुल नंगी थी और बिस्तर पर मचल
रही थी- आह आइना ऊ..ओफ़ सच्ची, बहुत गरम चूत है ! उफ़ कितनी चिकनी है छोटी सी
चूत ! सच्ची बहुत तरसी हूँ इस प्यारी चूत के लिये मैं ! दे दो न प्लीज
आइना ये हसीन छोटी सी चूत मुझे !



हाय शालू ! मैं जल रही हूँ ! प्लीज ! आह ! मैं क्या करूँ !



मेरा पूरा जिस्म सुलग रहा था और मैंने शालू के नरम-गरम चूतड़ खूब दबाए और जब
एकदम से उसकी चूत पर हाथ रखा तो वो तड़प उठी- ऊ..ऊ..उइ नी..ईइ..ना कर !



और मैं तो जैसे निहाल हो गई, उसकी चूत बिल्कुल रेशम की तरह मुलायम और चिकनी थी, खूब फूली हुई !



मैं एकदम से उठी और उसकी चूत पर नज़र पड़ी तो देखती रह गई, बिल्कुल चिकनी चूत जिस पर एक बाल भी नहीं था, शालू की चूत लाल हो रही थी।



क्या देख रही हो आइना ऐसे?



तो मैं अपने होंठों न पर ज़बान फेर कर सिसकी- शालू !!



और एकदम से मैंने उसकी चूत पर प्यार किया तो वो उछल कर बैठ गई।



हम दोनों एक दूसरे की चूत सहला रहे थे।



शालू !



हू म्म !



कपिल को नहीं दी यह प्यारी सी चीज़ ?



तो वो शरमा कर मुस्कुराई- ऊँ..हूँह !



क्यों?



तो वो शरारत से मुस्कुरा कर बोली- तुम्हारे लिये जो बचा कर रखी है।



तो मैं हंस दी- हट ! बदतमीज़ !



सच्ची आइना !



वो मेरी चूत धीरे से दबा कर सिसकी- हमेशा सोचती थी कि तुम्हारी यह कैसी होगी?



तो मैं शरमा कर मुसकुराई- मेरे बारे मैं क्यों सोचती थी तुम?



पता नहीं बस ! तुम मुझ बहुत अच्छी लगती हो ! दिल चाहता है कि तुम्हें प्यार करूँ !



मैंने मुस्कुरा कर उसके होंठ चूम लिये- तो फिर आज से पहले क्यों नहीं किया यह सब?



तो मेरे दूधों पर चेहरा रख कर बोली- डर लगता था कि तुमको खो न दूँ कहीं !



मैंने उसे अपने नंगे बदन से लिपटा कर उसके होंठ चूस लिये, आहिस्ता से उसे
लिटा दिया और झुक कर चूत के उभार पर प्यार किया तो वो मचल उठी-
आअह्ह..आआह.. आइना ! मुझे दे दो न अपनी हसीन सी चूत !



ले मेरी जान ! मेरे प्यार ! और मैंने घूम कर अपनी चूत उसकी तरफ़ की तो शालू
ने मेरे नरम चूतड़ पकड़ कर नीचे किये और मेरी चूत पर होंठ रखे तो मैं कांप
गई- आह.. आह.. आह.. ऊऊ..औइ शालू !



और जैसे ही उसकी ज़बान मेरी चूत पर आई, मैं नशे में उसकी चूत पर गिर पड़ी और उसकी चूत पर प्यार करने लगी और चूसने लगी।



हम दोनों की चीखें निकल पड़ी, दोनों के चूतड़ उछल रहे थे।



शालू मेरे चूतड़ दबा रही थी और अचानक उसकी ज़बान मेरी चूत के छेद में घुस पड़ी
तो ऐसा लगा जैसे गरम पिघलता हुआ लोहा मेरी चूत में घुस गया हो, मैं चिल्ला
पड़ी उसकी चूत से झूम कर- आ..ऐ..ई..ए.. मा..अ मर जा..ऊँ..गी.. ना..
आ..अ..हि शलु अर्रर्रर्ररे.. आह.. ऊ..ओम ऊमफ ऊऊओह्ह ओह ओह ह्हह्है ह्हअ आआइ
मैं निकल रही हूँ.. ओ शालू !



मेरे चूतड़ उछलने लगे और शालू के चूतड़ भी मचले और वो भी मेरी चूत में
चिल्लाने लगी- आइना ! चूसो अ आआइउ अयययो मा अर्रर्रर्रे रीईईए आआआअह ऊफ़्फ़
आआह्ह ह्हाआआआ आआअह्हह्ह ह्हाआआअ !



और मुझे ऐसा लगा जैसे चूत से झरना बह निकला हो !



रोकते-रोकते भी मेरे गले से नीचे उतर गया !



यही हाल शालू का भी था।



हम दोनों के चेहरे लाल हो रहे थे, सांसें तेज़ तेज़ चल रही थीं और हम दोनों एक दूसरे से लिपट कर पता नहीं कब सो गये।



मज़ा आया पढ़ कर?
अकेली मत रहियो








मेरे पति एक सफ़ल व्यापारी हैं। अपने पापा के कारोबार को इन्होंने बहुत आगे
बढ़ा दिया है। घर पर बस हम तीन व्यक्ति ही थे, मेरी सास, मेरे पति और और मैं
स्वयं। घर उन्होंने बहुत बड़ा बना लिया है। पुराने मुहल्ले में हमारा मकान
बिल्कुल ही वैसे ही लगता था जैसे कि टाट में मखमल का पैबन्द ! हमारे मकान
भी आपस में एक दूसरे से मिले हुए हैं।



दिन भर मैं घर पर अकेली रहती थी। यह तो आम बात है कि खाली दिमाग शैतान का
घर होता है। औरों की भांति मैं भी अपने कमरे में अधिकतर इन्टर्नेट पर
ब्ल्यू फ़िल्में देखा करती थी। कभी मन होता तो अपने पति से कह कर सीडी भी
मंगा लेती थी। पर दिन भर वासना के नशे में रहने के बाद चुदवाती अपने पति से
ही थी। वासना में तड़पता मेरा जवान शरीर पति से नुचवा कर और साधारण से लण्ड
से चुदवा कर मैं शान्त हो जाती थी।



पर कब तक… !!



मेरे पति भी इस रोज-रोज की चोदा-चोदी से परेशान हो गए थे… या शायद उनका काम
बढ़ गया था, वो रात को भी काम में रहते थे। मैं रात को चुदाई ना होने से
तड़प सी जाती थी और फिर बिस्तर पर लोट लगा कर, अंगुली चूत में घुसा कर किसी
तरह से अपने आप को बहला लेती थी। मेरी ऐशो-आराम की जिन्दगी से मैं कुछ मोटी
भी हो गई थी। चुदाई कम होने के कारण अब मेरी निगाहें घर से बाहर भी उठने
लगी थी।



मेरा पहला शिकार बना मोनू !!!



बस वही एक था जो मुझे बड़े प्यार से छुप-छुप के देखता रहता था और डर के मारे मुझे दीदी कहता था।



मुझे बरसात में नहाना बहुत अच्छा लगता है। जब भी बरसात होती तो मैं अपनी
पेन्टी उतार कर और ब्रा एक तरफ़ फ़ेंक कर छत पर नहाने चली जाती थी। सामने
पड़ोस के घर में ऊपर वाला कमरा बन्द ही रहता था। वहाँ मोनू नाम का एक जवान
लड़का पढ़ाई करता था। शाम को अक्सर वो मुझसे बात भी करता था। चूंकि मेरे स्तन
भारी थे और बड़े बड़े भी थे सो उसकी नजर अधिकतर मेरे स्तनों पर ही टिकी रहती
थी। मेरे चूतड़ जो अब कुछ भारी से हो चुके थे और गदराए हुए भी थे, वो भी
उसे शायद बहुत भाते थे। वो बड़ी प्यासी निगाहों से मेरे अंगों को निहारता
रहता था। मैं भी यदा-कदा उसे देख कर मुस्करा देती थी।



मैं जब भी सुखाए हुए कपड़े ऊपर तार से समेटने आती तो वो किसी ना किसी बहाने
मुझे रोक ही लेता था। मैं मन ही मन सब समझती थी कि उसके मन में क्या चल रहा
है?



मैंने खिड़की से झांक कर देखा, आसमान पर काले काले बादल उमड़ रहे थे। मेरे मन
का मयूर नाच उठा यानि बरसात होने वाली थी। मैं तुरन्त अपनी पेण्टी और ब्रा
उतार कर नहाने को तैयार हो गई। तभी ख्याल आया कि कपड़े तो ऊपर छत पर सूख
रहे हैं। मैं जल्दी से छत पर गई और कपड़े समेटने लगी।



तभी मोनू ने आवाज दी,”दीदी, बरसात आने वाली है …”



“हाँ, जोर की आयेगी देखना, नहायेगा क्या ?” मैंने उसे हंस कर कहा।



“नहीं, दीदी, बरसात में डर लगता है…”



“अरे पानी से क्या डरना, मजा आयेगा.” मैंने उसे देख कर उसे लालच दिया।



कुछ ही पलों में बूंदा-बांदी चालू हो गई। मैंने समेटे हुए कपड़े सीढ़ियों पर
ही डाल दिए और फिर से बाहर आ गई। मोटी मोटी बून्दें गिर रही थी। हवा मेरे
पेटीकोट में घुस कर मुझे रोमांचित कर रही थी। मेरी चूत को इस हवा का मधुर
सा अहसास सा हो रहा था। लो कट ब्लाऊज में मेरे थोड़े से बाहर झांकते हुए
स्तनों पर बूंदें गिर कर मुझे मदहोश बनाने में लगी थी। जैसे पानी नहीं
अंगारे गिर रहे हो। बरसात तेज होने लगी थी।



मैं बाहर पड़े एक स्टूल पर नहाने बैठ गई। मैं लगभग पूरी भीग चुकी थी और
हाथों से चेहरे का पानी बार बार हटा रही थी। मोनू मंत्रमुग्ध सा मुझे आंखे
फ़ाड़ फ़ाड़ कर देख रहा था। मेरे उभरे हुए कट गीले कपड़ों में से शरीर के साथ
नजारा मार रहे थे। मोनू का पजामा भी उसके भीगे हुए शरीर से चिपक गया था और
उसके लटके हुए और कुछ उठे हुए लण्ड की आकृति स्पष्ट सी दिखाई दे रही थी।
मेरी दृष्टि ज्यों ही मोनू पर गई, मैं हंस पड़ी।



“तू तो पूरा भीग गया है रे, देख तेरा पजामा कैसे चिपक गया है?” मैं मोनू की ओर बढ़ गई।



“दीदी, वो… वो… अपके कपड़े भी तो कैसे चिपके हुए हैं…” मोनू भी झिझकते हुए बोला।



मुझे एकदम एहसास हुआ कि मेरे कपड़े भी तो … मेरी नजरें जैसे ही अपने बदन पर
गई। मैं तो बोखला गई। मेरा तो एक एक अंग साफ़ ही दृष्टिगोचर हो रहा था। सफ़ेद
ब्लाऊज और सफ़ेद पेटीकोट तो जैसे बिलकुल पारदर्शी हो गए थे। मुझे लगा कि
मैं नंगी खड़ी हूँ।



“मोनू, इधर मत देख, मुझे तो बहुत शरम आ रही है।” मैंने बगलें झांकते हुए कहा।



उसने अपनी कमीज उतारी और कूद कर मेरी छत पर आ गया। अपनी शर्ट मेरी छाती पर डाल दी।



“दीदी, छुपा लो, वर्ना किसी की नजर लग जायेगी।”



मेरी नजरें तो शरम से झुकी जा रही थी। पीछे घूमने में भी डर लग रहा था कि मेरे सुडौल चूतड़ भी उसे दिख जायेंगे।



“तुम तो अपनी अपनी आँखें बन्द करो ना…!!” मुझे अपनी हालत पर बहुत लज्जा आने
लगी थी। पर मोनू तो मुझे अब भी मेरे एक एक अंग को गहराई से देख रहा था।



“कोई फ़ायदा नहीं है दीदी, ये तो सब मेरी आँखों में और मन में बस गया है।”
उसका वासनायुक्त स्वर जैसे दूर से आता हुआ सुनाई दिया। अचानक मेरी नजर उसके
पजामे पर पड़ी। उसका लण्ड उठान पर था। मेरे भी मन का शैतान जाग उठा। उसकी
वासना से भरी नजरें मेरे दिल में भी उफ़ान पैदा करने लगी। मैंने अपनी बड़ी
बड़ी गुलाबी नजरें उसके चेहरे पर गड़ा दी। उसके चेहरे पर शरारत के भाव स्पष्ट
नजर आ रहे थे। मेरा यूँ देखना उसे घायल कर गया। मेरा दिल मचल उठा, मुझे
लगा कि मेरा जादू मोनू पर अनजाने में चल गया है।



मैंने शरारत से एक जलवा और बिखेरा …”लो ये अपनी कमीज, जब देख ही लिया है तो
अब क्या है, मैं जाती हूँ।” मेरे सुन्दर पृष्ट उभारों को उसकी नजर ने देख
ही लिया। मैं ज्योंही मुड़ी, मोनू के मुख से एक आह निकल गई।



मैंने भी शरारत से मुड़ कर उसे देखा और हंस दी। उसकी नजरें मेरे चूतड़ों को
बड़ी ही बेताबी से घूर रही थी। उसका लण्ड कड़े डन्डे की भांति तन गया था।
उसने मुझे खुद के लण्ड की तरफ़ देखता पाया तो उसने शरारतवश अपने लण्ड को हाथ
से मसल दिया।



मुझे और जोर से हंसी आ गई। मेरे चेहरे पर हंसी देख कर शायद उसने सोचा होगा
कि हंसी तो फ़ंसी… उसने अपने हाथ मेरी ओर बढ़ा दिये। बरसात और तेज हो चुकी
थी। मैं जैसे शावर के नीचे खड़ी होकर नहा रही हूँ ऐसा लग रहा था।



उसने अपना हाथ ज्यों ही मेरी तरफ़ बढाया, मैंने उसे रोक दिया,”अरे यह क्या
कर रहे हो … हाथ दूर रखो… क्या इरादा है?” मैं फिर से जान कर खिलखिला उठी।



मैं मुड़ कर दो कदम ही गई थी कि उसने मेरी कमर में हाथ डाल कर अपनी ओर खींच लिया।



“नहीं मोनू नहीं … ” उसके मर्द वाले हाथों की कसावट से सिहर उठी।



“दीदी, देखो ना कैसी बरसात हो रही है … ऐसे में…” उसके कठोर लण्ड के चुभन
का अहसास मेरे नितम्बों पर होने लगा था। उसके हाथ मेरे पेट पर आ गये और
मेरे छोटे से ब्लाऊज के इर्द गिर्द सहलाने लगे। मुझे जैसे तेज वासनायुक्त
कंपन होने लगी। तभी उसके तने हुआ लण्ड ने मेरी पिछाड़ी पर दस्तक दी। मैं मचल
कर अपने आप को इस तरह छुड़ाने लगी कि उसके मर्दाने लण्ड की रगड़ मेरे चूतड़ों
पर अच्छे से हो जाये। मैं उससे छूट कर सामने की दीवार से चिपक कर उल्टी
खड़ी हो गई, शायद इस इन्तज़ार में कि मोनू मेरी पीठ से अभी आकर चिपक जायेगा
और अपने लण्ड को मेरी चूतड़ की दरार में दबा कर मुझे स्वर्ग में पहुँचा देगा
!



पर नहीं … ! वो मेरे पास आया और मेरे चूतड़ों को निहारा और एक ठण्डी आह भरते
हुए अपने दोनों हाथों से मेरे नंगे से चूतड़ो की गोलाइयों को अपने हाथो में
भर लिया। मेरे दोनों नरम चूतड़ दब गये, मोनू की आहें भी निकलने लगी, मेरे
मुख से भी सिसकारी निकल गई। वो चूतड़ों को जोर जोर से दबाता चला गया। मेरे
शरीर में एक मीठी सी गुदगुदी भरने लगी।



“मोनू, बस कर ना, कोई देख लेगा …” मेरी सांसें तेज होने लगी थी।



“दीदी, सीधे से कहो ना, छिप कर करें !” उसके शरारती स्वर ने मुझे लजा ही दिया।



“धत्त, बहुत शरीर हो… अपनी दीदी के साथ भी ऐसा कोई करता है भला ?” लजाते हुए मैंने कहा।



“कौन सी वास्तव में तुम मेरी दीदी हो, तुम तो एटम-बम्ब हो” मोनू ने अपने दिल की बात निकाली।



मैंने उसे धीरे से दूर कर दिया। दीवार के पास पानी भी कम गिर रहा था। मैं
फिर से बरसात में आ गई। तेज बरसात में आस पास के मकान भी नहीं नजर आ रहे
थे। मेरी चूत में मोनू ने आग लगा दी थी। अचानक मोनू ने मुझे कस कर अपनी ओर
खींच लिया और अपना चेहरा मेरे नजदीक ले आया। मैं निश्चल सी हो गई और उसकी
आँखों में झांकने लगी। कुछ झुकी हुई, कुछ लजाती आंखें उसे मदहोश कर रही थी।
उसके होंठ मेरे लरजते हुए भीगे होठों से छू गये, कोमल पत्तियों से मेरे
होठ थरथरा गये, कांपते होंठ आपस में जुड़ गए। मैंने अपने आप को मोनू के
हवाले कर दिया। मेरे भीगे हुए स्तनों पर उसके हाथ आ गए और मेरे मुख से एक
सिसकारी निकल पड़ी। मैं शरम के मारे सिमट सी गई।



मेरे सीने को उसने दबा दबा कर मसलना जारी रखा। मैं शरम के मारे उससे छुड़ा
कर नीचे बैठने का प्रयास करने लगी। जैसे ही मैं कुछ नीचे बैठ सी गई कि मोनू
का कड़कता लण्ड मेरे मुख से आ लगा। आह, कैसा प्यारा सा भीगा हुआ लण्ड, एकदम
कड़क, सीधा तना हुआ, मेरे मुख में जाने को तैयार था। पर मैंने शरम से अपनी
आँखें बंद कर ली … और … और नीचे झुक गई।



मोनू ने मेरे कंधे पकड़ कर मुझे सीधे नीचे चिकनी जमीन पर लेटा दिया और अपने
पजामे को नीचे खिसका कर अपना तन्नाया हुआ लण्ड मेरे मुख पर दबा दिया। मैंने
थोड़ा सा नखरा दिखाया और अपना मुख खोल दिया। बरसात के पानी से भीगी हुई
उसकी लाल रसीली टोपी को मैंने एक बार जीभ निकाल कर चाट लिया। उसने अपने हाथ
से लण्ड पकड़ा और दो तीन बार उसे मेरे चेहरे पर मारा और लाल टोपी को मेरे
मुख में घुसेड़ दिया। उसका गरम जलता हुआ लण्ड मेरे मुख में प्रवेश कर गया।
पहले तो मुझे उसका भीगा हुआ लण्ड बड़ा रसदार लगा फिर उसका लाल सुपारा मैंने
अपने मुख में दबा लिया। उसके गोल लाल छल्ले को मैंने जीभ और होंठों से दबा
दबा कर चूसा।



हाँ जी, लण्ड चूसने में तो मैं अभ्यस्त थी, गाण्ड मराने के पूर्व मैं अपने
पति के लण्ड को चूस चूस कर इतना कठोर कर देती थी कि वो लोहे की छड़ की भांति
कड़ा हो जाता था।



अब बरसात के साथ साथ तेज हवा भी चल निकली थी। इन हवाओं से मुझे बार बार
तीखी ठण्डी सी लगने लगी थी। शायद उसे भी ठण्ड के मारे कंपकंपी सी छूट रही
थी।



“दीदी, चलो अन्दर चलें… ” वो जल्दी से खड़ा हो गया और मेरा भारी बदन उसने
अपनी बाहों में उठा लिया। उसने जवान वासना भरे शरीर में अभी गजब की ताकत आ
गई थी।



“अरे रे … गिरायेगा क्या… चल उतार मुझे…” मैं घबरा सी गई।



उसने धीरे से मुझे उतार दिया और दीवार फ़ांद गया। मैंने भी उसके पीछे पीछे
दीवार कूद गई। मोनू ने अपना कमरा जल्दी से खोल दिया। हम दोनों उसमे समा
गये। मैंने अपने आप को देखा फिर मोनू को देखा और मेरी हंसी फ़ूट पड़ी। हम
दोनों का क्या हाल हो रहा था। उसका खड़ा हुआ पजामे में से निकला हुआ लण्ड,
मेरा अध खुला ब्लाऊज… पेटीकोट आधा उतरा हुआ… मोनू तो मुझे देख देख कर बेहाल
हो रहा था। मैं अपना बदन छिपाने का भरकस प्रयत्न कर रही थी, पर क्या क्या
छुपाती। उसने मेरे नीचे सरके हुए गीले पेटीकोट को नीचे खींच दिया और मेरी
पीठ से चिपक गया। मेरे पृष्ट भाग के दोनों गोलों के मध्य दरार में उसने
अपना लण्ड जैसे ठूंस सा दिया। यही तो मैं भी चाहती थी … उसका मदमस्त लण्ड
मेरी गाण्ड के छेद पर जम कर दबाव डाल रहा था।



मैं अपनी गाण्ड के छेद को ढीला छोड़ने की कोशिश करने लगी और उसके हेयर ऑयल
की शीशी उसे थमा दी। उसे समझ में आ गया और मेरी गीली गाण्ड को चीर कर उसमे
वो तेल भर दिया। अब उसने दुबारा अपना लाल टोपा मेरे चूतड़ों की दरार में
घुसा डाला।



“मोनू… हाय रे दूर हट … मुझे मार डालेगा क्या ?” मैंने उसका लण्ड अपनी गाण्ड में सेट करते हुए कहा।



“बस दीदी, मुझे मार लेने दे तेरी… साली ने बहुत तड़पाया है मुझे !”



उसने मुझे अपने बिस्तर पर गिरा दिया और मेरी पीठ के ऊपर चढ़ गया। उसका लण्ड
गाण्ड के काले भूरे छेद पर जम कर जोर लगाने लगा। मैंने अपनी गाण्ड ढीली कर
दी और लण्ड को घुसने दिया।



“किसने तड़पाया है तुझे…” मैंने उसे छेड़ा।



“तेरी इस प्यारी सी, गोल गोल सी गाण्ड ने … अब जी भर कर इसे चोद लेने दे।”



उसका लण्ड मेरी गाण्ड में घुस गया और अन्दर घुसता ही चला गया। मुझे उसके
लण्ड का मजा आने लगा। उसने अपना लण्ड थोड़ा सा बाहर निकाला और एक जोर के
धक्के से पूरा फ़िट कर दिया। मुझे दर्द सा हुआ, पर चिकना लण्ड खाने का मजा
अधिक था।



“साली को मचक मचक के चोदूंगा … गाण्ड फ़ाड़ डालूंगा … आह्ह … दीदी तू भी क्या
चीज़ है… ” वो मेरी पीठ से चिपक कर लण्ड का पूरा जोर लगा रहा था। एक बार
लण्ड गाण्ड में सेट हो गया फिर धीरे धीरे उसके धक्के चल पड़े। उसके हाथों ने
मेरी भारी सी चूचियों को थाम लिया। कभी वो मेरे कड़े चुचूक मसलता और कभी वो
पूरे संतरों को दबा कर मसल देता था।



मेरी गाण्ड में भी मिठास सी भरने लगी थी। मैंने अपनी टांगे और फ़ैला ली थी।
वो भरपूर जोर लगा कर मेरी गाण्ड चोदे जा रहा था। मुझे बहुत मजा आने लगा था।
मुझे लगा कि कहीं मैं झड़ ना जाऊँ …



“जरा धीरे कर ना … फ़ट जायेगी ना … बस बहुत मार ली … अब हट ऊपर से !”



“दीदी, नहीं हटूंगा, इसकी तो मैं मां चोद दूंगा …” उसकी आहें बढ़ती जा रही थी। तभी उसने लण्ड गाण्ड से बाहर निकाल लिया।



“आह्ह्ह क्या हुआ मोनू … मार ना मेरी …”



“तेरी भोसड़ी कौन चोदेगा फिर … चल सीधी हो जा।” उसकी गालियाँ उसका उतावलापन
दर्शाने लगी थी। मैं जल्दी से सीधी हो गई। मुझे मेरी गाण्ड में लण्ड के
बिना खाली खाली सा लगने लगा था। मोनू की आँखें वासना से गुलाबी हो गई थी।
मेरा भी हाल कुछ कुछ वैसा ही था। मैंने अपने पांव पसार दिए और अपनी चूत
बेशर्मी से खोल दी। मोनू मेरे ऊपर चढ़ गया और मेरे शरीर पर अपना भार डाल
दिया, मेरे अधरों से अपने अधर मिला दिये, नीचे लण्ड को मेरी चूत पर घुसाने
का यत्न करने लगा।



मेरे स्तन उसकी छाती से भिंच गये। उसका तेलयुक्त लण्ड मेरी चूत के आस पास
फ़िसल रहा था। मैं अपनी चूत भी उसके निशाने पर लाने यत्न कर रही थी। उसने
मेरे चेहरे को अपने दोनों हाथों से सहलाया और मेरी आँखों में देखा।



“दीदी, तू बहुत प्यारी है … अब तक तेरी चुदाई क्यूँ नहीं की…”



“मोनू, हाय रे … तुझे देख कर मैं कितना तड़प जाती थी … तूने कभी कोई इशारा भी नहीं किया … और मेरा इशारा तो तू समझता ही नहीं…”



“दीदी, ना रे …तूने कभी भी इशारा नहीं किया … वर्ना अब तक जाने कितनी बार चुदाई कर चुके होते।”



“बुद्धू राम, ओह्ह्… अब चोद ले, आह घुसा ना… आईईईई मर गई … धीरे से … लग जायेगी।”



उसका मोटा लण्ड मेरी चूत में उतर चुका था। शरीर में एक वासना भरी मीठी सी
उत्तेजना भरने लगी। वो लण्ड पूरा घुसाने में लगा था और मैं अपनी चूत उठा कर
उसे पूरा निगल लेना चाह रही थी। हम दोनों के अधर फिर से मिल गए और इस जहां
से दूर स्वर्ग में विचरण करने लगे। उसके शरीर का भार मुझे फ़ूलों जैसा लग
रहा था। वो कमर अब तेजी से मेरी चूत पर पटक रहा था। उसकी गति के बराबर मेरी
चूत भी उसका साथ दे रही थी। कैसा सुहाना सा मधुर आनन्द आ रहा था।



आनन्द के मारे मेरी आँखें बंद हो गई और टांगें पसारे जाने कितनी देर तक
चुदती रही। उसके मर्दाने हाथ मेरे उभारों को बड़े प्यार से दबा रहे थे, सहला
रहे थे, मेरे तन में वासना का मीठा मीठा जहर भर भर रहे थे। सारा शरीर मेरा
उत्तेजना से भर चुका था। मेरा एक एक अंग मधुर टीस से लौकने लगा था। यूँ लग
रहा था काश मुझे दस बारह मर्द आकर चोद जाएँ और मेरे इस जहर को उतार दें।
अब समय आ गया था मेरे चरम बिन्दु पर पहुंचने का। मेरे शरीर में ऐठन सी होने
लगी थी। तेज मीठी सी गुदगुदी ने मुझे आत्मविभोर कर दिया था। सारा जहां
मेरी चूत में सिमट रहा था। तभी जैसे मेरी बड़ी बड़ी आँखें उबल सी पड़ी … मैं
अपने आपको सम्भाल नहीं पाई और जोर से स्खलित होने लगी। मेरा रज छूट गया था …
मैं झड़ने लगी थी।



तभी मोनू भी एक सीत्कार के साथ झड़ने को हो गया,”दीदी मैं तो गया…” उसकी उखड़ी हुई सांसें उसका हाल दर्शा रही थी।



“बाहर निकाल अपना लण्ड … जल्दी कर ना…” मैंने उसे अपनी ओर दबाते हुए कहा।



उसने ज्यों ही अपना लौड़ा बाहर निकाला … उसके लण्ड से एक तेज धार निकल पड़ी।



“ये… ये … हुई ना बात … साला सही मर्द है … निकला ना ढेर सारा…”



“आह … उफ़्फ़्फ़्फ़्… तेरी तो … मर गया तेरी मां की चूत … एह्ह्ह्ह्ह्ह”



“पूरा निकाल दे … ला मैं निचोड़ दूँ …” मैंने उसके लण्ड को गाय का दूध
निकालने की तरह दुह कर उसके वीर्य की एक एक बूंद बाहर निकाल दी। बाहर का
वातावरण शान्त हो चुका था। तेज हवाएँ बादल को उड़ा कर ले गई थी। अब शान्त और
मधुर हवा चल रही थी।



“अरे कहां चली जाती है बहू … कितनी देर से आवाज लगा रही हूँ !”



“अरे नहा कर आ रही हूँ माता जी …” हड़बड़ाहट में जल्दी से पानी डाल कर अपने बदन पर एक बड़ा सा तौलिया लपेट कर नीचे आ गई।



मेरी सास ने मुझे आँखें फ़ाड़ कर ऊपर से नीचे तक शक की निगाहों से देखा और
बड़बड़ाने लगी,”जरा देखो तो इसे, जवानी तो देखो इसी मुई पर आई हुई है ?”



“जब देखो तब बड़बड़ाती रहती हो, बोलो क्या काम है, यूँ तो होता नहीं कि चुपचाप बिस्तर पर पड़ी रहो, बस जरा जरा सी बात पर…।”



सास बहू की रोज रोज वाली खिच-खिच आरम्भ हो चुकी थी … पर मेरा ध्यान तो मोनू
पर था। हाय, क्या भरा पूरा मुस्टण्डा था, साले का लण्ड खाने का मजा आ गया।
जवानी तो उस पर टूट कर आई थी। भरी वर्षा में उसकी चुदाई मुझे आज तक याद
आती है। काश आज पचास की उमर में भी ऐसा ही कोई हरा भरा जवान आ कर मुझे मस्त
चोद डाले … मेरे मन की आग बुझा दे …
Driver ne Maa ka Rape Kiya






ye kahani waise to kuchh purani hai lekin mere samne jab bhi wo din yaad
ata hai to mujhe aisa lagta hai ki ye kal ki hi baat hai. meri maamujhe
leke delhi ayi thi. hamlog apna kam khatm karne ke baad saam ko
chhatarpur mandir ghumne chale gaye. waha hamlogo ko ghumte ghumte kafi
der ho gayi. jab hamlog bus stop par pahuche us samay sat baz raha tha.
hamlog kuchh der tak wahi intazar kar rahe the ki ek car ake ruki aur
usmese ek admi jiski umar saath saal ki thi ne window kholke mujhe
bulaya aur puchha ki kaha jana hai to hamne bataya to usne bola ki use
bhi udhar hi jana hai maine maase puchha to wo uske gadi me chalne ke
liye taiyar ho gayi. hamlog uske gadi me baith gaye.



mai pichhe wale sit par baith gaya aur maa age wale sit par baith gayi.
maine raste me jab dekha ki chandra maa ko ek ajib nazar se ghur raha
tha. maine tabhi samajh gaya ki aaj kuchh gadbad hone wala hai. raste me
hamlogo ka plan change ho gaya kyoki usne bataya ki ab is samay bus
nahi mil sakati isliye usne apne bangle par chalne ke liye bola. dekhne
me wo bada hi bhola lag raha tha so hamlogo ke paas aur koi upay nahi
tha. maauske bangle par chalne ke liye taiyar ho gayi. hamlog uske
bangle par pahuche to main gate par tala laga hua tha. usne gate khol ke
gadi ko gairez me laga diya. main gate band kar ke wo hamlog ko leke
apne bangle me gaya to mai samajh gaya ki aaj kuchh gadbad hone wala
hai. maine dekha ki kuchh der ke baad jab maa ne apne kapade ko change
kar ke nighty pahan liya to wo lungi pahn liya. ab mai ek kamare me bed
par jake so gaya. maadusre kamare me sone chali gayi.lagbhag ek ghante
ke baad maine apne kamare ke darwaje ko band hone ki awaj suni to mai
jag gaya.



maine dekha ki wo maa ke kamare ke taraf chala gaya. mai samajh gaya ki
ab wo maa ke saath kuchh khel khelne wala hai. mai ab ek aise jagah par
jake baith gaya jaha se mai maake kamare ke sare chije dekh sakata tha.
maine dekha ki wo maake kamare me jake unke kamare ke darwaje ko andar
se band kar diya. band karne ke baad wo maake paas gaya aur ammaa ko
kuchh der tak dekhta raha. us samay so rahi thi. maine dekha ki wo maake
dono pairo par apna hath rakhne ke saath maake nighty ko upar uthane
laga to maauth gayi aur baith gayi.maaapne pair ko khichne ki kosis
karte huye boli aap yaha kya kar rahe hai. to wo haste huye bola ki wahi
jo ek admi ko ek aurat ke saath karna chahiye aur kya. maaboli nahi ye
galat hai. to wo bola kya galat hai aur kya sahi ye mujhe na batao ab
bas chupchap mai jaisa kahata hu waisa karti jao samjhi. uske muh se
aisa sunke mai to dar gaya. maaapne pairo ko khichne lagi to wo maake
dono pairo ko khichke maako bed par patak diya ab ammaa apne apko uske
changul se chhodane ke liye har kosis karne lagi lekin unka har kosis
nakam hone laga. wo maake nighty ko thoda upar karne ke baad pairo par
baith gaya aur maake nighty ko upar uthane laga. udhar maauska birodh
karne lagi. is tarah se unke birodh karne se uske upar koyi asar nahi
pad raha tha. maine dekha ki usne maako pet ke bal lita diya aur maake
nighty ko nikal ke alag kiya. ab maake gand ko dekh ke uska lund to
jaise funkar marne laga. maine dekha ki wo maa ke jangh par baith gaya
tha aur maa ke gand ko faila ke apne muh se thoda sa thuk nikal ke maa
ke gand me laga diya. ab usne apne lund ko lungi se nikala jo ki sat
inch lamba tha. maa ke gand ke chhed par apne lund ko rakh ke ek jor se
jhatka mara to maa jor se chikh padi lekin uska lund andar nahi gaya.
usne fir se ek bar dubara kosis kiya lekin is baar bhi wahi hal hua.



ab wo uth ke kamare ke dusre kone par sthit almire ke paas gaya to maa
uth ke bhagne ke liye jaise hi darwaje ke paas gai to darwaje ki
chitkini itni upar thi ki maa ke hath waha tak nahi pahuch pa rahe the.
wo maa ke paas dibe ko leke gaya aur usmese thoda sa tel nikal ke maa ke
gand me laga diya iske baad usne apne lund par tel lagane ke baad dibe
ko pass ke khidki par rakhne ke baad apne dande ko maa ke gand se satane
ke baad ek jor se jhatka mara to maa jor se chilane ke saath
chhatpatane lagi to mai samajh gaya ki maa me uska danda chala gaya tha.
ab wo apne kamar ko hilane laga. iske saath hi maa ke muh se ajib chikh
nikal jati thi. kuchh der ke baad jab maine dekha ki usne jor jor se
jhatke lagane laga to maa chhatpatate huye dande ko nikalne ke liye
bolne lagi to wo bola ki bas ab aur thoda sa hi rah gaya hai rani.itni
sundar chiz ko bhi koi chhodta hai kya. aisa kahte huye usne ek jor se
jhatka mara to maine dekha ki maa dard ke maare bilkul hi nachne lagi to
maine dekha ki maa ke jangho se khun niche girne laga to mai samajh
gaya ki maa ki gand fat gayi thi. ab usne bola ki rani ab tum mere pure
dande ko andar le chuki ho ab aur do minut ruk jao. aur maa ke gand me
apne dande ko jor jor se jhatke ke saath andar bahar kar raha tha. uske
aise karne ke saath maa ke muh se chikh nikal rahi thi. mai wahi khada
ho ke sab kuchh dekh raha tha.



kuchh der ke baad jab maa ke gand me uska pura lund chala gaya. ab wo
maa ke gand me apne pure dande ko andar bahar kar raha tha. kuchh der ke
baad uska biz maa ke gand me gir gaya. uske baad usne apne lund ko maa
ke gand se nikala aur maa ke hanth ko pakad ke maa ko baath room me leke
gaya. waha jane ke bad usne apne lund ko nal ko chala ke dhoya. iske
baad maa ke chud ko sahlate huye maa se pesab karne ke liye bola. kuchh
der tak uske aise hi chud ke sahlane se maa ko pesab lag gaya aur jaise
hi maa pesab karne ke liye baithi to usne maa ke muh me apne lund ho dal
diya aur maa ke baal ko pakad ke apne kamar ko hilane laga. maa ke muh
me uska lund chala gaya tha. ab maa uske lund ko leke chatne lagi. kuchh
der waise hi karne ke baad maine dekha ki jab uska lund fir se taiyar
ho gaya to usne maa ko uthaya aur maa ke chud par ek maaga se pani maara
aur maa ko tang ke leke waha se fir se usi room me leke chala gaya.
waha le jake maa ko bed par leta diya aur maa ke jangh par baith gaya.
ab maa ke dono hatho ko ek rashi se bed ke sahare baandh diya. iske baad
ab maa ke dono pairo ko mod diya aur jangho ko failate huye apne muh ko
maa ke chud ke paas le gaya aur maa ke chud ko chatne laga. kuchh der
tak wase hi maa ke chud ko chatta raha. kuchh der ke baad jab maa ke
chud se pani nikal pada to wo ma ke chud ko thik waise hi chatne laga
jaise koi sandh kisi gaiya ki chud ko chatta hai. iske baad wo uth ke
baith gaya aur maa ke chud par apne lun ko sata ke ek jor se jhatka ke
saath apne kamar ko hilaya to maa ke muh se jor se chikh ko nikali to
mai samajh gaya ki maa ke chud me uska lund chala gaya hai. maa
aaaaahhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh uuuuuuuuuuuuhhhhhhhhhhhh
aaaaauuuuuuuuuuuuuuu iiiiiiiiiiisssssssssssssssss ki awaj nikal rahi thi
aur wo apne kamar ko dhire dhire hilane laga. maine dekha ki uske lund
ka top hi maa ke chud me gaya tha.



maa ke aise aahe ko bharte sun ke wo bola abhi to sirf top hi gaya hai.
abhi to pura bahar hi hai. aur abhi se is tarah se kyo chikh rahi ho
rani. aaj mai tumhe raat bhar chodunga. tumhare chud se aur gand se aaj
rat ke kiraye ko khub wasul karunga aur aisa kahate huye ek jor se
jhatke ke sath jab apne kamer ko hilaya to maa aaaaahhhhhhhhhhhhhh
aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh uuuuuuuuuuuuhhhhhhhhhhhh aaaaauuuuuuuuuuuuuuu
iiiiiiiiiiisssssssssssssssss aaaaahhhhhhhhhhhhhh
aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh uuuuuuuuuuuuhhhhhhhhhhhh aaaaauuuuuuuuuuuuuuu
iiiiiiiiiiisssssssssssssssss ki awaj ke saath apne sar ko utha utha ke
uske har ek jhatke ke saath sisakne lagi to uska jos aur badh gaya aur
wo maa ke braa ko kholane ka prayash kiya aur jab maa ka braa nahi khula
to usne maa ke braa ko fad diya. aur maa ke dono chuchio ko jo ki
bilkul hi tane huye the ko chusne ke liye maa ke upar let gaya aur maa
ke baye chuchi ko apne muh me le liya aur maa ke dudh ko pine ke sath hi
apne kamar ko hilane laga. aur maa uske har ek jhatake ke saath jor jor
se aaaaahhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh
uuuuuuuuuuuuhhhhhhhhhhhh aaaaauuuuuuuuuuuuuuu
iiiiiiiiiiisssssssssssssssss aaaaahhhhhhhhhhhhhh
aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh uuuuuuuuuuuuhhhhhhhhhhhh aaaaauuuuuuuuuuuuuuu
iiiiiiiiiiisssssssssssssssss aaaaahhhhhhhhhhhhhh
aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh uuuuuuuuuuuuhhhhhhhhhhhh aaaaauuuuuuuuuuuuuuu
iiiiiiiiiiisssssssssssssssss aaaaahhhhhhhhhhhhhh
aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh uuuuuuuuuuuuhhhhhhhhhhhh aaaaauuuuuuuuuuuuuuu
iiiiiiiiiiisssssssssssssssss ki awaj ke saath uske har ek jhatke ke
saath chila rahi thi. kuchh der ke baad jab maine dekha ki maa ke chud
ke uske lund ka adha hisa chala gaya to maa kuchh der tak masti ke saath
aaaaahhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh uuuuuuuuuuuuhhhhhhhhhhhh
aaaaauuuuuuuuuuuuuuu iiiiiiiiiiisssssssssssssssss aaaaahhhhhhhhhhhhhh
aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh uuuuuuuuuuuuhhhhhhhhhhhh aaaaauuuuuuuuuuuuuuu
iiiiiiiiiiisssssssssssssssss ki awaj ke saath masti me ahe nikal ne lagi
to usne ek jor ka jhatka mara to maa puri tarah se chhatpatane lagi.
maine dekha ki maa ke chud me uska lagbhag pura lund chala gaya tha. ab
wo maa ke hotho ko chusne laga to maa ne dono pairo ko pura faila diya
aur maa ke dono pair puri tarah se tight ho gaye the. ab maa ko uske
lund ko bardast karna muskil ho raha tha.



ab wo maa ke chud me apne lund ko andar bahar kar raha tha aur maa dard
ke mare chhatpata rahi thi. kuchh der ke baad usne maa ke chud me apne
lund ko puri tarah se dalne ke liye ek aur jhatka mara to maa ne apne
hotho ko uske hotho se chudne ke saath hi dard ke maare tadap uthi.
maine dekha ki maa ke chud se khun nikal padi. ab wo bola ab tumhari
kuwara pan khatam ho gaya rani ab tum puri tarah se meri rakhail ho
chuki ho. ab maajor jor se siski mar rahi thi. lekin iska uske upar koi
prabhaw nahi pad raha tha. wo amaa ke chud me apne lund ko andar bahar
andar bahar kar raha tha. maaki halat dekh ke aisa lagata tha ki aaj
sahi me unki kuwarapan khatam hua tha. maako is tarah se chilate huye
dekh ke wo maake hoto ko chusna suru kar diya. usne amaa ke hotho ko jab
chusna suru kiya to aur jor jor se apne kamar ko hilane laga. ab
maakuchh der tak chhatpatane ke baad dhire dhire sant padne lagi to mai
samajh gaya ki ab maako bhi maja ane laga tha. kuchh der ke baad wo bhi
sant pad gaya to mai samajh gaya ki maake chud me uska bij gir gaya tha.
ab kuchh der tak maake upar waise hi lete rahne ke baad jab usne apne
lund ko nikalte huye amaa ke upar se hata to amaa uth ke jane lagi.
maake uth ke jate dekh ke usne maake hath ko pakad ke bola kaha jaa rahi
ho rani. mere saath hi so jao. aisa kahte huye usne maako apne baho me
bhar liya. aur waise hi dono so gaye. mai bhi wahi bed par so gaya.



bhor me jab meri nind khuli to maine dekkha ki wo dono waise hi soye
huye the. achanak maaki nind khuli to wo apne apko uske baho me nangi
awastha me dekha to samajh gayi. wo bhi jag gaya tha. ab usne maake gal
par ek chuma liya. ab wo maake gand ko apne taraf karne kaha to maane
pahle to waisa karne se mana kar diya lekin jab wo maake pith ko apne
taraf karne laga to maauske age kamjor pad gayi aur unhone bina kuchh
kahe apne pith ko uske taraf kar diya. ab wo uth ke maake gand me apne
lund ko ghusane ke liye sabse pahale maake gand par apne lund ko ragada
to maine deka ki maake gand par uske lund ka pani chhut gaya. ab usne
maake gand ko gila kar diya. ab usne maase gad failane ke liye kaha to
maane apne gaand ko apne hatho se faila diya. usne apne lund ke top ko
maake gand me dalne ke baad usne maake kamar ko pakad ke jor jor se tin
jhatke mara to maapuri tarah se chatpata uthi. aur
aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaauuuuuuuuuuuuuuu
aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ki awaj ke saath chikh padi. ab maane apne
kamar ko khichne lagi to wo maako patak ke maake upar chadh gaya. aur
maake gand me apne lund se pumping karne laga. udhar maajor jor se siski
maar rahi thi. kuchh der ke baad maasant pad gayi. wo maake upar chadh
ke maako bis minut tak pelta raha tab wo saant ho gaya. kuchh der waise
hi pade rahne ke baad wo maake upar se hat gaya.



ab maako sidha karne ke baad maake pair ko halka sa failaya to maane
bola ki peshab lagi hai. wo maako leke baathroom me gaya waha se jab
wapas aye to maine dekha ki maane ab uske lund ko apne muthi me pakad
rakha tha. ab maabed par let gayi. ab usne ek dibe ko leke aye aur maake
kamar ke paas rakha . ab maake chud me tel lagane lage to maane bhi
apne hatho me tel le ke uske lund me tel lagane lagi. tel lagane ke baad
wo maake jangh par baith gaye ab maane apne chud ko faila diya. usne
apne lund ko maake chud par sata ke jor se jhatka mara to maake muh se
ek aji si chikh nikali mai maake chikh ko sun ke samajh gaya ki maake
chud me uska lund chala gaya ab usne maake chuchio me tel lagane ke baad
chuchio ko masalne ke saath hi maake chud me apne lund ko andar aur
andar le jane ke liye jor jor se jhatke marne laga to amaa jor jor se
aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaauuuuuuuuuuuuuuu
aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh auuuuuuuhhhhhhhhhaaaa aaaaaaaaahhhhhhhhhhhh
naaaaaaaaaiiiiiiiiiiiiiiiiiiii aauuuuuuuuuuuuuuuu ki awaj nikalne lagi
to wo bola kya hua dard kar raha hai kya. to amaa boli hhhhaaaaaaaaaa
aaaaaaaaaaahhhhhhhhhh nnnnikkkkkkkkaaaaaaaaaaal doooooaaaaaaaaaa. maake
aise karne par uska jos aur badh gaya. ab maako aur jor jor se jhatke
marne laga. aur amaa aaaaauhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooohhhhhhhhhhhh
aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh thooooooooodaaaaaaaaaa
dhiiiiiiiiiiiireeeeeeeeeeeeee aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh
ruuuuuuuuukkkkkkkkkkkkkiiiiyaaaaaaaaaa amaa ke aise karte dekhke uski
mardangi aur jor jor se ufan marne lagi to wo amaa ke dono chuchio ko
masalane laga. aur amaa naaaaaaaaahiiiiiiiiiiiiiii
uuuuuuuuuuffffffffffffffffffffffffff oooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhh ki
awaj nikale ja rahi thi.



ab usne amaa ke baye chuchi ko apne muh me leke pine laga. aur amaa ke
chud me apne lund ko andar bahar karne laga to amaa ki to jaise hos hi
nahi tha. kuchh der ke baad mane dekha ki amaa bhi ab masti me ane lagi
thi. ab wo bhi apne chudai ka maja lene lagi thi. is tarah se amaa ke
dono chuchio ke dudh ko pine ke baad unse amaa ke hotho ko chusne laga
to amaa bhi uska saath dene lagi. kuchh der tak aisa karne ke baad jab
dono sant pad gaye to mai samajh gaya ki maane apne karj ko utarwa liya
tha. ab wo dono log kuchh der tak waise hi pade rahe. iske baad wo lund
ko amaa ke chud se nikal ke maake upar se hata aur maake chud ko dekhte
huye bola kya mast chud paya hai tumne. ab wo apne kapade ko pahan liya.
kuchh der ke baad amaa jab uth ke khada huyi to unke chud ko dekh ke
aisa lagata tha ki amaa ko abhi hi bacha hone wala ho.



maabhi uth ke apne kapade ko pahan liya. maako chala nahi jaa raha tha.
amaa kuchh der tak bed par baithne ke baad jab usne kamare ke darwaje ko
khola to mai jake bed par let gaya. usne mere kamare ke darwaje ko bhi
khol diya. mai kuchh der ke baad jab bahar nikala to dekha ki amaa apne
sadi ko pahan ke taiyar ho chuki thi. unko dekhke aisa lagata hi nahi
tha ki us admi ne unke saath raat bhar balatkar kiya tha. mai bhi fress
hone ke baad chalne ke liye taiyar ho gaya. wo bhi hamdono ko chhodne ke
liye taiyar ho gaya aur kuchh der ke baad hamlog waha se nikal gaye.
usi din hamlogo ko wapas ghar jana tha. hamlog station aye kuchh der ke
baad hi train ki time hone wali thi isliye hamlogo ko station par chhod
ke wo wapas chala gaya. hamlog train se apne raste ghar ke liye chal
pade.
Maa ka Rape






My name is AMAR…main eke Gujarati family ka hu. meri umar 25 hai.

Buchpan se mughe hindi movie dekhne ke adat hai..maa or meri do bhane

hum sub sath rehate thi. Meri do behno ki shadi ho chuki hai. Mai abhi

colluge me last year mai hu. Mughe acting karne ka bohut shoek

hai…specially rape seen. Jabhi bhi rape seen hota hta me apne maa pe

chad jata tha. Lakin use malum tha ke ye majak karta hai…kyo ke use

adat hai…Jab mai maa ke upper chad tha tha tab mai..movies ke dilog

bhi Martha tha…jaise ke … 'Aaj mai tughe nahi chodunga..kaha jayagi

bachkar mere se…..ajj to tu gai…' ayse sab.



Lakin maa mughe hata thi thi our "Chal hat …kuch bhi boltha hai.."



Aisa bolti thi kyon ki use majak lag tha ha..



Meri maa ka nam Rima hai.uski umar karib 49 hogi. Wo thodi moti thi

jaise ke app ko bataya hai mei ek guju family ka hu..to app samaz jao

ke maa ka mota hona normal bat hai. Lakin wo dekhne me bhaut sunder

hai..us wazese se uske motapan ka patha nahi chalta. Our mai ek

dubla-patla ladka hu. Jabhi bhi meri maa mughe khana khilathi thi. Tab

wo ..bolthi thi.." Kya re tum khata hai to wo jatha kidhar hai?'



Le's com 2 the point ek din ke bat hai…Mai college se jaldi aya tha,

mai ne our maa ne sath me khana khaya,our bhar ke kamre me aa ke baith

gaye.Mai palang pe soya hta our movie dekh raha tha our maa niche soi

thi wo bhi movie dekh rahi thi. Itne me Movie pe Rape seen laga..mera

dhyan meri maa ke taraph gaya..mughe uske boobs assani se dikh rehe

the.mai use dekh raha tha..shyad use ye bat malum thi..our achanak

usne bhi meri taraph dekha. Lakin maine mera dhya tv ke taraph

rakha..our usne halka sa smile dya..



Tabhi mai samaz gaya.. our jump mar ker apni maa per lait gaya..maa no

ke mai apni maa ki izzat lootna chaloo ki..our mai bol tha tha …

`Rani ajj mai tughe nahi chodunga..ajj to tu meri rani ber ker hi rahe

gi' ye sub filmi dylog me marne laga.Tabhi meri maa uthi usne apna

pallo kicha..jabke mai bhi uska sadi ka pallu kich raha tha..



wo bich bich mai bol rahi thi.." Chod re ky kar ra hai .chod de mughe

…CHAL HAT…" Aysa masti karte kate hum bedroom tak pahuch gaye.. our do

no bhi palang per gir gaye…



Mai maa ke baju me hi tha..our dono masti karte kate ek dusre ko lipte

huya the..tabhi..mera muhe maa ke BOOOBS pet ha..our mai uski taraph

dekh raha tha..



Tabhi Maa ne bola .."Kya dektha hai tu?...lag tha hai ab to bada

hogaya hai.."



Lakin mai use dekh raha tha. mai maa ke baju me pada tha mera ek hath

maa ke upper blouse ke upar se mamme per..



tabhi maa boli.."Lega mu me…Chal to bhi kya yad rekhe ga ke..apni maa

ne bhi kuch diya tha."…"lakin ye bat to kise se nahi bole ga".."THICK HAI"



Maine bhi"Thick Hai"' bola our maa ka mamme chussna chalu kya…maa moti

thi lakin sundar thi.uske mamme chatate chatate maine mera ek hath maa

ke sadi me dala.our maa ke nikar me hath dal ker me maa ke bur me

ungli dalna chalu kya…



thabi Maa boli "yeeee,…ye kya ker raha hai…maine thodi kya azadi de

to..kuch bhi kerne laga.



Lakin meine dhyan nahi dya..mai ek taraph muhse se maa ka BOOBS chuse

raha tha our ek taraph maa ke bur mai ungli dal raha tha. Thodi der ke

bad maa ko accha lagne laga. Wo halki se awaje nikal ne

lagi…"aaaaaaaaaa…….. uuuuuu…our kar acha lagta

hai……aaaaaaauuuuuuuuuoooooooooo….our kar…..our…our

aaaaaaaaaauuuuu…..mmmmmm .tabhai darwaje ki bel baji…

Hum uth gaye maa ne sadi thik ki..our mai.. uth ker palang per baith

gaya …



Tabhi maa ke ja ker darwaja khula. Dekha to meri papa gaa gaye..



Hamari market me dukan hai…papa hamesha dukan per hi hote hai..wo

subhe 9.30 se rat 11 baje tak wahi hote hai..wo kahana bhi wahi khate

hai..ek hi sehar me hote hua bhi wo dophar ko khana khane ke lye ghar

nahi ate the.



Us din wo aye our maa ko kha …chaolo hame Gaon jana hai..hamare gaon

me koi bimar hta use dekhne ke lye wo jana chathe the..hum 10/15 dino

ke lye uther hi rahenge..aysa maa ko bataya …mai naraz hta maa ko

samza..papa saman pac kar rahe the.tabhi maa aagai our usne mere gal

per hat rakh kar kha ke bus 10/15 dino ki hi bat hai..our wo chele gaye.



10/15 din chale gaye..mera man nahi lag raha tha..Tabhi Navaratri ke

din the. Mai rat ko mere dosto ke sath Dandya dekhne gaya tha. Rat ko

mai 2 baje ghar aya to mughe shock laga meri maa hamare pados wali

aunty ke sath bate ker rahi thi. Unone nai sadi pahne thi..mai ander

aya..thodi der ke bad maa bhi ander aye.



Mughe raha nahi gaya maine maa ko khicha our bedroom me le gaya .our

uske uper chad gaya..our bola.."10/15 din app ne mughe tarsaya..ab mai

app ko nahi chodunga….''our galit se meri maa ka blouse meri hato se

fat gaya. Tabhi meri maa ko mera ghussa aya..our bola.'10/15 din

intarzar kiya kya 10/15 minut nahai rook sakta?…., sale u ne mera naya

blouse fad diya…Harammmi kahi ka CHAL HAT' our unho ne mughe dhaka de

dya our kitchan me chali gai. Mai samaz gaya wo sadi badalne gai….mai

bhar aya our tv dekhne laga..



Thodi der ke bad maa ka awaz aya..mughe andar bedroom me bulaya..maine

tv band kya, our andar chala gaya . dekha to meri maa mere samne kahdi

thi, ek taraph palang per machar dani laga rakhi thi.our bola. "Aa ab

loot meri izzat' mai sidha maa ke uper chad gaya . meine unka blous

fada sadi thodi nichi ke..our unhe chumna chalu kya…maine mera muh maa

ke BOOOBs per our hath maa ke sadi me maa ke bur me dalna chalu kia

….maine ek ungli our bad me 2 ungli maa ke boor me dali. Maa ko acha

lag raha tha

…'ooooooooooooo.uuuuuuuuuummmmmmmmaaaaaaaaoooooooooo…..our.acha kartha

hai toooo.'



Contd.....
Tabhi maa ka dhyan gaya tub pe maa ne bola `wo tub band kar our dim

light chalu kar ke a'…our maa machar dani me chali gai.maine waisa kya

our mai bhi macchar dani me chala gaya. Mai whi kar raha tha…meri maa

moti lakin sundar lag rahi thi. Our mai ek dubla-patla ladka.



Tabhi mare man me ek sawal aya..



Maine maa ko pucha." Maa, kay me app ko ek sawal puche?"



Maa ne bola "Dar mat ….puch le jo puch nahai wo."



Maine pucha." Maa mai… itna dubla-patla…our app itni moti…kya mai app

ko khush kar sakta hu?'



Maa ne bola `Chal…aysa kuch nahi hota hai.motapan..our patla pan… Chal

muge dikha to ab to kitna bad ho gaya hai' our unonhe apna hath meri

paint tak lya our meri paint utar ne ko kha. Maine meri paint

utari…maa boli…"chal shrma mat ab chadi bhi utar"



Maine meri chadi bhi utari…our maine mera lund maa ko dikhaya…maa ne

wo hath me lya…our kha `kaphi bada hai'. Tabhi waha per ek skel padi

thi…maa ne wo li…our wo meri land ko mapne lagi..our boli

"hi, DAAAAAAYYYA….tera to..7.5inches hai…..ye meri boor kya gand bhi

fad dega…'tabhi maa ko raha nahi gaya..wo boli…'aaj to meri icha puri

karega..aaj to meri bur nahi meri gand mare ga…THICK HAI' mai bhi

khush hua..kyo ke boor to hamesha chudai jati hai lakin aaj mai phale

bar gand marne wala tha…



maa ne fata fat sadi utari our wo apne ghutane per baithe..our apne

hath age palang ke handal per rakhe.. jaya ke maine kha meri maa moti.

Nanga mota pan dikhne acha nahi lagkha ..maine maa ko kha ..;kuch to

apne uper le lo app nangi our moti achi nahi lagthi…tabhi maa ne uski

sadi uske uper rakhi our bola…"chal ab time pass mat kar…"



maine mera lund maa ke gand ke hole per rakha our dhake marne

laga…lakin wo ja nahi raha tha..Tabhi maa ne kha.." are Bewakhuf….tel

le ke aa our apne.lund ko laga nahi to wo nahi jayega..; mai ander

kitchan mei gay...tel utahya...tabhi mere me ek idea aya our mai tel

ke badle GHI lake aya. Maa ne bola…" Harrrrami itna time….?'



Maine phale Ghi apne lund ko lagaya…bad me maine maa ko kha gand ka

hole faila ne ko …maa ke gand ka hole falya..our maine ghi maa ke gand

me dala our maa ki gand dono hato se ghisne laga. Maine thoda our Ghi

dala…aysa karthe karthe maine 10/15 cahmas ghi maa ke gand me dala.'



Tabhi maa ko kuch alag feel hua..our usne kha.'Ye kya dala hai tu ne

mere me? Kuch chip chipasa lag raha hai?' tabhi meine maa ko bola `Tel

nahi GHI hai". Maa ne kha.' Kyo dala hai ye…maine tughe bola tha ke

tel dal naaaaa.? Maine kha ` Maa tel se to sabhi marte hai..lakin mai

aaj GHI se marna chata hu…" our thoda ghi maine mere lund ko

lagaya..maa ne kha "To Shitan hai ..sudhre ga nahi..kabhi…CHAL AB LAGA'



Maine mera lund maa ke gand per rakha our zor se ek zatkha dya…Maa

challi'aaaaaaaaaaaaaaaoooooooooooyeeeeeee…kyaaaaaaaaaaaaa kaaaaaaar

raaaaaha haiiiiiiiiiii.aaaaaaaaa kyaaaaaa mereeeeeereeeee gaaaaaaaaand

fade gaaaaaaaaa….ooooooooooiiiiiiiiiiadddddddiiiiiiii …mai kuch sun

nahi raha tha mera lund ab tak adhe se bhar tha …mai zor se jhatke de

raha tha…our maa pagalo ki tarah chila rahi thi……

ooooooooiiiiiiiittttoooooooooaaaaa ….ab busssssssooooo. Maine maa ka

hath lya our mere lund per rakha..our kha `Dekh abhi tak lund adha bhi

nahi ghusa hai'….



Our mai jhatke de raha

tha..maa:AAAAAAoooooooooouuuuuuuiiiiiiiiii…thoda dhereeeeeeee

….aaaaaaaaiiiiiiiiiii…haiiiiiii….maaaaaaaaaaa mai mer

jaaauuuuuuugiiiiiiiiii

aaaaaaaoooooooiiiiiiii..dhereeeee….beeeeeetaaaaa dhereeeeeee."

Mai bola aaj to gaiiii…aaaaaaa uuuuuuu..our kuch awaje meri bhi aa

rahi thai…



maine ek jor ka jathka mara our mera lund adha andar gaya…. Maine Bola

…"Maa, tere badi gand me mera land ab adha gaya hai….Maa ne kha"

Kuteeeeeeee…..kya mar dalega mugheeeeeeee iiiiiiiiii…' jab mai lund

andar bhar kar raha tha tab patch-patch ayse awase aa rahi thi…lakin

maa ko bhi thoda maza aa raha tha… Humne palang per machar dani lagi

thi our hum macchar dani me the andar bohut garmi ho rahi thi.

" aaaaaaaaaaaaauuuuuuuuuuuuiiiiiiiii…..uuuuuuu" maine thabi bola …papa

kyo nahi aye?



Maa ne bola "Papa, ne choda mughe meri gand marne ke leya terelaya…'

Kya puch raha hai to ……….aaaaaaaaaaauuuuuuuuuiiiiiiichod mughe………

UFFFFFFFFFFF..ek to ye machaaaaaaarrrrrrr daniiiiiiiiiiiii kii

garmiiiiiiiiii our uuuuuaaaarseeee ye ghiiiiiiiiiiiii.. badaaaaaaaa

ajibbb sa lag raha hai…' hum dono pasine pasine ho gaye the.



Tabhi maine jor ka our ek jhataka mara our mera lund pura maaaaa ke

gand me gaya…

Maa fir se challi.." aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

naaaaaaaaahiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii pleazee

ohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh

nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii thoda

nikaaaaaaaaaaallllllllldiijiiiiieeeeeeeeeeeee,

aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh, nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii…aaaaaaaaaaa

abbbbbbbb aaaaaaaaaa basssssss muuuut mere meeeeeeee dalllllll de tere

paniiiiiiii our kar mughe azzzzzzzzzzd aaaaaaaaaauuuuuu.lakin mai nahi

man raha tha…



Mare zor ke jatkhe maa per pad rehe the….tabhi maine maa ko bola..

" maa, aaaa meraaaaaaa paniiiiiii abhiiiiiiiiiiii nikalne walaaaaaaa

haiiiiiii.kyaaaaaaa meeeeee appp meeeee aaaaaaa daluuuuuuu?' maaaaa ne

bola …."Are HARAMI…terrrrrrrrrrraaaaa paniiiiiiiiiii

chhaiiiiiiiiiiiyeeeeeee issseeeeeeee lyeeeeeeee maiiiiii gaooon

seeeeee jaldiiiiiiiii….ayeeeee.soch sssssss……kyaaaaaa rahaaaahaiiiiiii

dallllllla bhi……….. our ek jor ka jatkha dya…our mara pani maa ke gand

me ghus gaya…………………



Maaaa ..ne kha" waa …kya ….garammmm ral rahaaaaahaiiiii. To wake hi

jawan ho gaya hai……. Tetre papa hamesha kam me….lakin aaj to to mere

kam aya…….tera to tere papase bhi bada hai………..? aaj se mai teri.

Jabhi cahai tabhi bol mai dungi tughe.



Lakin to bhi GHI lagana nahi bhoolna…………Ab ye bat dhayan me

rakh..dubla –patla kuch nahi hota hai…ourat ko khush rakhna hi jaurri

hai".



Aysa bol ker hum ek dusre per lait gaye…
मेरी पड़ोसन जिया





यारे दोस्तो, मेरा नाम
वीरू, बीस साल का हूँ। मैं कॉलेज के प्रथम वर्ष में हूँ। मैं एक
मध्यवर्गीय परिवार से हूँ। मैं शर्मीले स्वभाव का सीधा सा दिखने वाला
लड़का हूँ, राजस्थान के श्री गंगानगर में रहता हूँ।

मैं आपको अपनी पड़ोसन जिया के साथ हुए पहला अनुभव बताने जा रहा हूँ। वह 18
साल की एक ख़ूबसूरत और गोरी-चिट्टी लड़की है, उसकी चूचियाँ इतनी मदमस्त
कर देने वाली हैं कि किसी का भी लण्ड खड़ा हो जाए। मेरा और उसका घर एक दम
साथ-साथ था। मेरे को वो बहुत अच्छी लगती थी। पर मैं उससे कभी बात नहीं कर
पाया, मेरा मन बहुत करता था उससे बात करने का और उसको पटाने का, पर यह
कैसे होगा समझ नहीं आता था।

मेरे को एक आईडिया आया, उसका एक छोटा भाई था राहुल। मैंने उसको पटाने की
सोची, अगर इसको पटा लिया तो जिया को पटाना आसान हो जायेगा। इसलिए मैं जिया
के भाई को पटाने लगा और उसके साथ खेल खेलने लगा। उसको अपने घर पर बुला कर
पीसी पर गेम भी खिलाता, इस तरह वो मेरे साथ रहने लग गया और कभी कभी मैं
भी उसके घर भी चला जाता। कुछ समय बाद जिया से भी मेरी थोड़ी-थोड़ी बातें
होने लग गई और हम एक साथ मिल कर खेलने लग गए।

पर मैं तो जिया को पटा कर चोदना चाहता था, पर कैसे हो सकता था। मैं नए-नए
आईडिया सोचने लग गया कि किस तरह जिया को चोदूँ, मेरे मन में फ़िर एक
आईडिया आया।

मैं एक ब्लू फिल्म की सीडी लेकर आया, उस दिन उसके घर वाले बाहर गए हुए थे।
मैंने अपनी छत से उसकी छत पर पर उस सीडी को फेंक दिया और अपनी छत पर
घूमने लग गया। उसने मुझे देखा और वो भी छत पर आ गई और आते ही उसको वो सीडी
मिल गई। वो मेरे पास उस सीडी को ले कर आई और बोली- यह सीडी छत पर मिली
है।

मैंने पूछा- क्या है इसमें ?

तो उसने बोला- मुझे नहीं पता, मुझे तो छत पर पड़ी मिली है।

मैं उससे कहा- चलो देखते हैं कि क्या है इसमें !

तो वो राजी हो गई और मैं अपनी छत से उसकी छत पर आकर उसके घर पर चला गया।

वो जाते ही सीडी प्लेयर में उस सीडी को लगाने लगी। मेरा दिल बहुत जोर जोर
से धक-धक कर रहा था, पता नहीं क्या होगा। कहीं उसने अपने घर वालों को
इसके बारे में बता दिया तो?

मैं बहुत डर गया था।

उसने सीडी लगा कर टीवी ऑन किया। मैं अभी भी डर रहा था और टीवी चालू होते ही एक लड़का और एक लड़की आपस बातें कर रहे थे।

उसने मुझ से कहा- यह कोई हॉलीवुड फिल्म लगती है !थोड़ी देर में उस लड़के ने
उस लड़की के सारे कपड़े उतार दिए। उसने एक दम अनजान की तरह कहा- ये क्या कर
रहे हैं?

तो मैंने उससे कहा- यह एक ब्लू फिल्म है। पहले नहीं देखी क्या कभी ? उसने कहा- नहीं तो।

फिर धीरे धीरे वो लड़का उस लड़की की चूचियाँ दबाने और चूसने लग गया। उस
लड़की ने उस लड़के के भी सारे कपड़े उतार दिए और फिर उसका लण्ड चूसने लग गई।

उसने कहा- मुझे तो शर्म आ रही है, कितने गंदे है ये।

मैंने उससे कहा- ऐसे तो सब लोग ही करते हैं, इसको ही तो सेक्स बोलते हैं।

मैंने उससे पूछा- तूने कभी सेक्स किया है?

उसने कहा- नहीं किया।

मैंने उससे कहा- इसमें बहुत मजा आता है।

तभी मैंने उसके पास जाकर बैठ गया और अपना हाथ धीरे उसकी चूचियों पर रखा, तो उसने मेरा हाथ हटा दिया और बोली- यह क्या कर रहे हो तुम?

मैंने कुछ न बोलते हुए फिर से अपना हाथ उसकी चूचियों पर रखा और उसके टॉप
के ऊपर से चूचियाँ दबाने लगा। उस समय उसकी शक्ल देख कर ऐसा लग रहा था कि
उसको मजा आ रहा था। फिर मैं दोनों चूचियों को एक साथ मसल मसल कर दबाने से
ऐसा लगा और फिर मैं उसके टॉप मैं हाथ डाल कर चूचियों दबाने लगा और वो
सिसकियाँ लेने गई। अब मुझे पता चल गया कि उसको मजे आ रहे हैं।

मैंने उसको पूछा- मज़ा आ रहा है क्या?

तो उसने कहा- हाँ, आ रहा है। क्या इसको ही सेक्स कहते हैं?

मैंने कहा- अभी तो कुछ भी नहीं हुआ है, अभी तो और बहुत मजे आयेंगे।

उसने- कहा कैसे?

तो मैं कहा- तुझे मेरा साथ देना होगा !

तो उसने हामी भर दी।

मैंने उसका टॉप और जींस उतार दी। उसने लाल रंग की ब्रा और पैंटी पहन रखी
थी। वो बहुत ही गोरी थी और गोरे रंग पर लाल रंग बहुत सुन्दर लग रहा था।
फिर मैंने दोनों को उतार फेंका। मैं पहली बार किसी लड़की की नंगी चूत के
दर्शन कर रहा था, उसकी चूत में हल्के भूरे रंग के बाल थे।

उसने कहा- मुझे शर्म आ रही है !

और उसने अपने दोनों हाथ अपनी चूत और मोमो पर लगा लिए।

मैंने कहा- इसमें शर्माने की क्या बात है? सेक्स तो नंगे होकर ही किया जाता है।

मैंने प्यार से उसके दोनों हाथ हटा दिए और उसकी दोनों चूचियों को चूमने
लगा तो वह पागल होने लगी। मैंने दूसरा हाथ उसकी चूत पर रखा, उसकी चूत एक दम
गीली हो चुकी थी। अब मैं समझ गया कि ज़िया एक दम चुदने को तैयार है।

पर मैं उस को इतनी जल्दी नहीं चोदना चाहता था। इसलिए मैं उसकी चूत में
अपनी एक उंगली डालने लगा और थोड़ी सी उंगली अन्दर जाते ही वह चिहुँक
उठी,"दर्द हो रहा है।"

तो मैंने कहा,"जान पहली बार ज़रा दर्द होता है, आज तो इस दर्द सहन करना ही पड़ेगा।"

उसने कहा," ठीक है।"

फिर मैं उसको ऊँगली से चोदने लगा और उसके मुँह से सी सी की आवाज आ रही थी। फिर मैंने उसको मेरी शर्ट-पैंट उतारने के लिए बोला।

उसने कहा- मुझे शर्म आ रही है।

मैंने कहा- अब काहे की शर्म !

और मेरे कपड़े उतारने के लिए बोला तो उसने मेरी शर्ट-पैंट उतार दी और लगे
हाथ अण्डरवियर भी उतारने को बोला। ना ना करते हुए उसने उसको भी उतार ही
दिया। उसने मेरा लण्ड देखा और अपनी आँखें बंद कर ली।

मैंने उससे कहा- यह प्यार करने की चीज है इससे मुँह नहीं मोड़ा करते।

फिर मैंने उसके दोनों हाथ आँखों से हटा दिए और उसको अपना लण्ड दिखाते हुए
कहा- इसको लण्ड बोलते हैं और इसको ही चूत में डाल कर चुदाई करते हैं
जिससे चूत और लण्ड का मिलन होता है। इस को अन्दर डालने से दोनों को बहुत
मजा आता है !

तो उसने कहा- इतना बड़ा मेरी चूत में कैसे जायेगा? यहाँ तो उंगली भी ठीक से अन्दर नहीं जा रही है।

तो मैंने कहा- तुम चिंता मत करो, सब कुछ हो जायेगा। पर इसको चूत में डालने से पहले चूसना पड़ता है।

मैंने अपना लण्ड पकड़ कर उसके मुँह में डाल दिया। पहले तो उसने मुँह में
लेते ही निकाल दिया। मैंने उसके मुँह में फिर से अपना लण्ड डाल दिया तो इस
बार वो धीरे धीरे मेरे लण्ड का सुपारा चूसने लग गई और धीरे धीरे अपना
सारा लण्ड उसके मुँह में अंदर-बाहर करने लग गया।

फिर मैंने उस को बेड पर लिटाया और 69 की अवस्था में आकर उसकी चूत को उंगली
और जीभ से चोदने लगा। वो सिसकारियाँ लेने लगी और बोली- वीरू ! थोड़ा धीरे
करो, मुझे दर्द हो रहा है।

मैंने कहा- दर्द तो हो रहा है पर मज़ा आ रहा है या नहीं?

वो बोली- हाँ ! मज़ा तो आ रहा है पर दर्द भी हो रहा है।

मैंने कहा- थोड़ी देर में यह दर्द खत्म हो जाएगा।

उसके मुँह से कामुक सिसकियाँ निकल रही थी। उसके मुँह से आवाजें आने लगी- सी……सी…स्…आ…अच्छा लग रहा … और चूसो और !

उसकी चूत एक दम गीली हो चुकी थी और उसकी चूत ने अंदर से सफ़ेद सफ़ेद सा पानी
छोड़ दिया। जिसे मैंने अपने मुँह पर महसूस किया और मेरा भी वीर्य निकलने
वाला था और मैं उसके मुँह में झड़ गया।

उसने कहा- यह क्या है?

मैंने कहा- प्यार की निशानी है। उसने मेरा सारा वीर्य पी लिया।

इसके बाद मैंने उसे सोफे पर बैठा दिया और अंदर से तेल की शीशी ले आया और
उसकी चूत और अपने लण्ड पर तेल लगा लिया फिर उसकी टांगों को अपने कंधों पर
रख लिया। इससे उसकी चूत मेरे लण्ड के करीब आ गई और मैं अपना लण्ड उसकी चूत
पर रगड़ने लगा। ज़िया सिसकारियाँ भरने लगी।

फ़िर मैंने अपना लण्ड उसकी चूत के मुहाने पर रखा और अंदर करने लगा। जिया की
चूत कुंवारी होने के कारण काफी कसी थी। मैंने जोर लगा कर अपना लण्ड उसकी
चूत में ठेल दिया। लण्ड का सुपारा ही अंदर गया था कि जिया जोर जोर से
चीखने लगी। अपने हाथ-पाँव मारने लगी और बोलने लगी- मुझे छोड़ दो ! मुझे कुछ
नहीं करना।

मैंने अपने हाथों से उसका मुँह बंद कर दिया और जोर-जोर से धक्के लगा कर
अपना लण्ड उसकी चूत में घुसाने लगा। अभी आधा ही अंदर गया था कि उसकी आँखों
से आंसू आने लगे और उसका मुँह बंद था। मैंने धक्के लगाने चालू रखे। मेरे
हाथ से बंद होने के कारण उसके मुँह से गूँ-गूँ की आवाजें आने लगी। मैं
समझ गया कि उसको मजे आ रहे हैं, मैंने अपना हाथ उसके मुँह से हटा लिया,
उसके मुँह से सी सी की आवाज आ रही थी।

मुझे उसकी चूत से कुछ बहने का अहसास हुआ, नीचे देखा तो उसकी चूत पूरी खून
से भरी हुई थी। मैंने इस पर ध्यान ना देते हुए एक और जोर का झटका दिया
जिससे मेरा तीन चौथाई लण्ड उसकी चूत में समा गया। इस झटके के लिए वो तैयार
नहीं थी। और इस झटके के साथ ही जिया अपना सर जोर जोर से इधर उधर पटकने
लगी। अब मैं थोड़ी देर के लिए रुका और उसके मम्मे मसलने लगा। उसके होठों को
चूमने लगा, अपने लण्ड को धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा। अब उसका सर पटकना
कुछ कम हुआ और वो भी धीरे धीरे अपने चूतड़ उछालने लगी।

वो बोली- तुमने तो मेरी जान ही निकाल दी थी, एक बार लगा कि मैं जिन्दा बच पाउंगी।

मैं बोला- मेरी जान ! दर्द तो एक बार हुआ होगा, लेकिन अब मज़ा आ रहा है या नहीं?

जिया ने कहा- हाँ, मज़ा तो बहुत आ रहा है, बस ऐसे ही अपने लण्ड को मेरी चूत में डालते रहो। सच में आज ज़न्नत जैसा अहसास हो रहा है।

मैंने कहा- मेरी जानू ! अभी तुमने ज़न्नत देखी ही नहीं है, आगे आगे देखो, मैं तुम्हें क्या क्या और दिखाता हूँ।

इतना कहते ही मैंने एक जोरदार धक्का लगा कर अपना पूरा लण्ड उसकी चूत में
घुसा दिया। जिया इस अचानक हुए हमले के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी, इस कारण
उसकी जोर की चीख निकल गई और बोली- प्लीज़ ! तुम अपना लण्ड मेरी चूत से
निकाल लो, मुझे बहुत दर्द हो रहा है, मैं मर जाऊंगी, प्लीज़ निकाल लो अपना
लण्ड ! मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूँ।

मैं उसकी बातों पर ध्यान ना देकर उसके मम्मे चूसने लगा और अपने लण्ड को
उसकी चूत धीरे धीरे आगे पीछे पेलने लगा। थोड़ी देर में उसको पूरा मज़ा आने
लगा। उसकी सील टूट चुकी थी और वो अब मेरा लण्ड अपनी चूत में आराम से अंदर
ले रही थी। वो अपनी गाण्ड ऊपर नीचे उछालने लगी और बोलने लगी- यस यस्स्स और
जोर से चोदो वीरू , मेरी चूत फ़ाड़ दोओअओ, चोदो और जोर से चोदते जाओ, मेरी
चूत को फ़ाड़ दो और मेरी चूत की प्यास को मिटा दो।

इस पर मैं उसको और जोर-जोर से चोदना शुरु कर दिया।

मैंने अपनी गति बढ़ाई, फिर भी वह ज़ोर से करो ! की रट लगा रही थी।

मैंने कहा- हाँ जान और ज़ोर से करूँगा।

फिर मैंने उसके दोनों पाँव उठाए और काफी तेज़ी से लण्ड को उसकी चूत के
अन्दर-बाहर करने लगा। और थोड़ी ही देर में मैंने अपना सारा माल उसकी चूत
में डाल दिया। वो भी मेरे साथ ही झड़ गई, फिर हम दोनों एक साथ ले लेट गए।

फिर तो मैंने और जिया ने एक बार और सेक्स किया! उसको घोड़ी स्टाईल में
खड़ा कर उसकी गांड में लण्ड घुसाने लगा। उसकी गांड भी बहुत कसी थी। मैंने
पूरा दम लगा कर पूरा का पूरा लण्ड उसकी गांड में पेल दिया और धक्के मारने
लगा। एक बार तो उसको दर्द हुआ फिर उसको और मज़ा आने लगा। उसके चूतड़ मुझे
बहुत ही आनंद दे रहे थे। दो-तीन मिनट में ही वो अपने चूतड़ उठा-उठा कर
मेरे हर धक्के का जवाब देने लगी। मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी और लण्ड को
गांड से निकाल कर फिर से उसकी चूत में डाल दिया। कुछ ही देर में उसकी
चूत से पानी निकलने लगा।

उसने कहा- खूब ज़ोर-ज़ोर से धक्का लगाओ।

मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है। मैंने बहुत ही तेज़ी के साथ उसकी चुदाई शुरू कर दी।

वो बोली- आआआ!!! मैंऽऽऽ आआआऽऽऽ रहीऽऽऽ हूँऽऽऽ और तेज़ ऽऽऽ और तेज़ ऽऽऽ

उसकी चूत से पानी निकलने लगा और मेरा सारा लण्ड भीग गया। मैं भी बिना रुके
उसे आँधी की तरह चोदता रहा। लगभग बीस मिनट तक चोदने के बाद मैं उसकी चूत
में ही झड़ गया। इस दौरान वो भी तीन बार झड़ चुकी थी। लण्ड का पूरा पानी
उसकी चूत में निकल जाने के बाद मैं हट गया।

अब मुझे दर लगने लगा कि वो कहीं गर्भवती न हो जाये इसलिए मैंने उसको ई-पिल लाकर खिला दी।

अब जब कभी वो अकेली होती तो हम सेक्स करते और आज तक मैं उसके साथ सेक्स कर रहा हूँ।
:: seema ki chudai :: ::




मै सीमा हूँ. मुझे सेक्सी चैट करना
और सेक्सी कहानियां पढ़ना बहुत अच्छा लगता है। मेरी फ़ीगर का साइज़ ३४ डी
–२७–३२ है। मेरे मम्मे गोल गोल है। जब मैं टी–शर्ट और पैंट डालती हूं तो
३२ डी साइज़ की ब्रा डालती हूं। उसमे मेरे मम्मे बहुत टाइट लगते हैं और
बिल्कुल सीधे नोकदार हो जाते हैं। मेरे भैया को टी–शर्ट में मेरे मम्मे
बहुत आकर्षक लगते हैं। जब वो काम से आते हैं तो आते ही पहले मुझे जफ़्फ़ी
में ले लेते हैं। और बहुत डीप किस करने के साथ साथ मेरे मम्मे प्रेस करते
हैं और फिर टी–शर्ट को ऊपर उठा कर ब्रा के ऊपर से ही मेरे बूब्स जोर जोर
से दबाते हैं। उनको दर्द देने में बहुत मजा आता है। फिर वो मुझे टेबल पर
बिठा/लिटा कर मेरी टी–शर्ट ऊपर कर के मेरे बूब्स ब्रा से आज़ाद कर देते है…



थोड़ी देर बाद वो मेरे बूब्स चूसते हैं और बीच –२ में दांत से दर्द भी देते
हैं। फिर मेरे नीचे वाले कपड़े मतलब सलवार। या स्कर्ट जो भी होती है। वो
उतार देते हैं। मैं घर पर पैंटी बहुत ज़्यादा नहीं डालती। स्कर्ट/सलवार
उतारने के बाद वो मेरे बूब्स चूसते–२ मेरी चूत में उंगली करते हैं… और
मुझे और अपने आप को वार्म अप करते हैं…



एक दिन मुझे वार्म अप करने के बाद बोले, सीमा मैं तुझे आज ऐसी फ़िल्म
दिखाउंगा कि तूने कभी देखी नहीं होगी। मैं भी देखने के लिये बहुत बेताब
होने लगी, बोली भैया जल्दी से दिखाओ… भैया ने अपने बेग से
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