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Full Version: मजेदार हिंदी कहानी का खजाना
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मौलिका की कहानी








यह किसी एक लड़की या महिला की कहानी नहीं है। यह उन कई महिलाओं और लड़कियों
की दास्तान और अनुभवों को मिला कर लिखी गई है जिनसे मुझे मिलने का, बात
करने का, मौका मिला – और जीवन की सच्चाई भी पता चली। मौलिका एक काल्पनिक
नाम है। मैं आज तक किसी लड़की या महिला से नहीं मिला जिसका नाम मौलिका हो।



एक दिन दफ़्तर से घर पहुँचा तो माहौल कुछ तना-तना सा लगा। मुन्ने की माँ चाय बड़े बेमन से रख कर चली गई।



मैंने चुप रहने में ही खैर समझी। चाय चुपचाप पी, फिर कपड़े बदले और कम्प्यूटर पर।



थोड़ी देर बाद लगा कि पीछे से कोई घूर रहा है – आज तो शामत है। मैंने चुप रहने में ही भलाई समझी।



इतने में मुन्ने की माँ की तन्नाई हुई अवाज़ सुनाई पड़ी- यह क्या है?



मैंने तिरछी नज़र से देखा: कुछ पिकनिक की फोटो थीं।



मैंने कहा- मुन्ना या मुन्नी से पूछो, कहीं पिकनिक पर गये होंगे, वहीं की फोटो होंगी।



यह ब्लैक एन्ड वाईट हैं और आजकल रंगीन फोटो होती हैं और न तो मुन्ना,
मुन्नी दिखाई पड़ रहें हैं न ही उनके कोई दोस्त। फिर यह फोटो तुम्हारे बक्से
में क्या कर रहीं थीं?



लगा कि जैसे कोई गुर्रा रहा हो। अब तो ठीक से देखना लाज़मी हो गया।



देखा तो कई पुरानी यादें ताज़ी हो गई। विश्यविद्यालय के समय में हम लोग
पिकनिक में गये थे, तभी की फोटो थीं मैं कुछ भावुक होकर उसे पिकनिक के बारे
में बताने लगा। इकबाल, जो अब वकील हो गया है, अनूप जो बड़ा सरकारी अफसर हो
गया, दिनेश जो कि जाना माना वैज्ञानिक है।



‘मुझे इन सब में कोई दिलचस्पी नहीं है पर यह लड़की कौन जिसकी तुमने इतनी
फोटूवें खींच रखी हैं और क्यों इतना सहेज कर रखे हो, आज तक बताया क्यों
नहीं?’



मुझे एक पतली सी चीखती हुई आवाज़ सुनाई पड़ी। सारा गुस्सा समझ में आ गया।



यह लड़की मौलिका थी। वह हम लोगों के साथ पढ़ती थी, अच्छा स्वभाव था,
बुद्धिमान भी थी। वह सब लड़कों से बात करती थी और अक्सर क्लास में, बेन्च
खाली रहने के बावजूद भी, लड़कों के साथ बेन्च में बैठ जाती थी। वह इस बात का
ख्याल रखती थी कि वह सबसे बात करे तथा सब के साथ बैठे। हम सब उसे पसन्द
करते थे। पर वह हम से किसी को खास पसन्द करती हो ऐसा उसने किसी को पता नहीं
लगने दिया।



‘कहां रहती है?’



‘विश्वविद्यालय में साथ पढ़ती थी। मुझे मालूम नहीं कि वह आजकल कहां है, शायद नहीं रही।’



‘तुम्हें कैसे मालूम कि वह नहीं रही?’



‘विश्वविद्यालय के बाद वह मुझसे कभी नहीं मिली पर इकबाल से मुकदमे के सिलसिले में मिली थी। उसी ने बताया था।’



इकबाल मेरा विश्वविद्यालय का दोस्त है और इस समय वकील है, मुन्ने की माँ उसकी बात का विश्वास करती है।



‘इकबाल भाई, मौलिका के बारे में क्या बता रहे थे?’



आवाज से लगा कि उसका गुस्सा कुछ कम हो चला था।



मौलिका पढ़ने में तेज, स्वभाव में अच्छी वा जीवन्त लड़की थी। पढ़ाई के बाद
उसकी शादी एक आर्मी ऑफिसर से हो गई। मेरा उससे संपर्क छूट गया था। बाकी
सारी कथा यह है जो कि इकबाल ने मुझे बताई है।



शादी के समय मौलिका का पति सीमा पर तैनात था। शादी के बाद कुछ दिन रुक कर
वापस चला गया। एक दो बार वह और कुछ दिनों के लिये आया और फिर वापस चला गया।
वह उससे कहता था कि उसकी तैनाती ऐसी जगह होने वाली है जहाँ वह अपने परिवार
को रख सकता है तब वह उसे अपने साथ ले जायगा।



जब मौलिका का पति रहता था तो वह ससुराल में रहती पर बाकी समय ससुराल और
मायके के दोनों जगह रहती। मौलिका की ननद तथा ननदोई भी उसी शहर में रहते थे
जहाँ उसका मायका था इसलिये वह जब मायके में आती तो वह उनके घर भी जाती थी।



एक दिन मौलिका बाज़ार गई तो रात तक वापस नहीं आई। उसके पिता परेशान हो गये
उसके ससुराल वालों से पूछा, ननदोई से पूछा, सहेलियों से पूछा – पर कोई पता
नहीं चला।



पिता ने हार कर पुलिस में रिपोर्ट भी की। वह अगले दिन वह रेवले लाईन के पास
लगभग बेहोशी कि हालत में पड़ी मिली। उसके साथ जरूर कुछ गलत कार्य हुआ था।
उसका पति भी आया वह कुछ दिन उसके पास रहने के लिये गई और वह मौलिका को
मायके छोड़ कर वापस ड्यूटी पर चला गया। मौलिका फिर कभी भी अपने ससुराल वापस
नहीं जा पाई।



कुछ महीनों के बाद मौलिका पास उसके पति की तरफ से तलाक का नोटिस आया।



उसमें लिखा था कि,



मौलिका अपने पुरुष मित्र (पर कोई नाम नहीं) के साथ बच्चा गिरवाने गई थी;



उसके पुरुष मित्र ने उसे धोखा दिया तथा उसके ताल्लुकात कई मर्दों से हैं,
ऐसी पत्नी के साथ, न तो बाहर किसी पार्टी में (जो कि आर्मी ऑफिसर के जीवन
में अकसर होती हैं) जाया जा सकता है, न ही समाज में रहा जा सकता है, इसलिये
दोनों के बीच सम्बन्ध विच्छेद कर दिया जाय।



मौलिका का कहना था कि,



वह बाज़ार गई थी वहाँ उसके ननदोई मिल गये;



ननदोई के यह कहने पर कि मौलिका पति का फोन उससे बात करने के लिये आया था
तथा फिर आयेगा और वे उससे बात करना चाहते हैं वह उनके साथ घर चली गई
क्योंकि उसके घर का फोन कुछ दिन से खराब चल रहा था;



ननदोई के यहाँ चाय पीने के बाद उसकी तबियत खराब हो गई, जब होश आया तो उसने अपने आप को रेलवे लाईन के पास पाया।



उसे कुछ याद नहीं कि उसके साथ क्या हुआ।



वह अपने पति से प्रेम करती है सम्बन्ध विच्छेद न किया जाय।



सम्बन्ध विच्छेद के मुकदमे आज कल पारिवारिक अदालतों में चलते हैं। इनमें
फैमिली कांउन्सलर होते हैं जो कि महिलायें ही होती हैं इन फैमिली कांउन्सलर
ने मौलिका से बात की और अपनी रिपोर्ट में कहा कि,



मौलिका ज्यादातर समय रोती रही;



सारी बात नहीं बताना चाहती थी; और



लगता है कि झूठ बोल रही है।



निचली आदालत ने फैमिली कांउन्सलर की बात मान कर सम्बन्ध विच्छेद कर दिया।
तब वह इकबाल के पास पंहुची। इकबाल ने हाई कोर्ट में अपील करके उसे जितवा
दिया।



हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस बात पर विश्वास नहीं किया जा सकता कि
मौलिका किसी पुरुष मित्र के साथ बच्चा गिरवाने गई थी, क्योंकि,



मौलिका के किसी भी पुरुष मित्र का नाम भी किसी ने नहीं बताया;



किसी ने भी मौलिका को पुरुष मित्र के साथ जाते देखने की बात नहीं कही;



इस बात का कोई सबूत नहीं है कि मौलिका का चरित्र खराब है बलकि उसके अच्छे
चरित्र की गवाही है (यह बात तो मौलिका के ससुर ने गवाही में माना था);



मौलिका की शादी हो चुकी थी वह पति के साथ रह चुकी थी जो समय उसने अपने पति
के साथ बिताया था उसके कारण वह गर्भवती हो सकती थी। उसको बच्चा गिरवाने का
कोई कारण नहीं था।



हाई कोर्ट ने फैमिली कांउन्सलर की रिपोर्ट खारिज करते हुए कहा कि,



जिस महिला के साथ ऐसी बुरी दुर्घटना हुई हो उसके लिये वह सब ब्यान कर पाना मुशकिल है;



ऐसे मौके की याद ही किसी को दहला सकती है;



कोई भी महिला ऐसी बात को बताते समय सुसंगत नहीं रह सकती; और



ऐसी महिला के लिये उस बात के बारे में पूछे जाने पर रोना स्वाभाविक है।



हाई कोर्ट ने मौलिका की अपील मंजूर की तथा उसके पति के सम्बन्ध विच्छेद के
मुकदमे को यह कहते हुऐ खारिज किया कि ऐसे मौके पर पति को पत्नी के हालात
समझने चाहिएँ तथा उसे सहारा देना चाहिये न कि तिरस्कार करना।



सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फैसले को बहाल रखा।



हाई कोर्ट ने मौलिका की अपील मंजूर करते हुऐ उसे जीवन भत्ते के लिये पैसे
भी दिलवाये पर यह नहीं मालूम कि मौलिका ने पैसे लिये कि नहीं क्योंकि इस
सबके कुछ महीनों के बाद मौलिका तथा उसका परिवार शहर छोड़ कर मालूम नहीं कहां
चला गया। न मुझे न ही इकबाल को कुछ भी उसके बारे में पता है।



‘क्या मौलिका को बिल्कुल कुछ याद नहीं था कि उसके साथ क्या हुआ?’ मुन्ने की माँ ने पूछा।



‘सब याद था, मुन्ने की मां, सब ! वह शहर छोड़ने के एक दिन पहले इकबाल के पास
गई थी और इकबाल को उस रात की सच्चाई बताई। पर यह नहीं बताया था कि वह अगले
दिन शहर छोड़ कर जा रही है।’ मैंने कहा।



यह भी अजीब कहानी है उस दिन मौलिका ननदोई के घर में चली गई थी, वहाँ उसे
पता चला कि उसकी ननद घर में नहीं थी, वह अपने मायके यानि कि मौलिका के
ससुराल में थी, घर में ननदोई के मित्र थे। मौलिका वापस अपने मायके आना
चाहती थी पर ननदोई ने उससे सबके लिये चाय बनाने के लिये अनुरोध किया। इसको
वह मना नहीं कर पाई क्योंकि घर में चाय बनाने के लिये और कोई नहीं था।



वह जब चाय बनाने गई तब ननदोई तथा उनके मित्रों ने दरवाजा बन्द कर दिया।
उसके साथ उन सब ने रात भर गलत कार्य किया। वे लोग अगले दिन उसे बेहोशी की
हालत में रेवले लाईन के पास छोड़ आये।



मैंने जब इकबाल से पूछा कि उसने यह बात क्यों नहीं अपने पति या कोर्ट में कही?



इकबाल ने बताया कि उसने मौलिका से यह पूछा था पर मौलिका ने उसे कोई जवाब नहीं दिया।



यह कहानी बताने के बाद मैंने ऐसी ही टिप्पणी की,



‘मौलिका बेवकूफ थी उसे यह बात कोर्ट में कहनी चाहिये थी।’



मुन्ने की माँ ने कोई प्रतिवाद नहीं किया। कुछ देर बाद मैंने उसकी आँखों की
तरफ देखा तो उसका सारा गुस्सा काफूर हो चुका था और वह किसी गहरी सोच में
डूबी लग रही थी; वह मेरी बात से सहमत नहीं लगती थी। मुझे तो उसके हाव-भाव
से लगा कि वह कहना चाह रही है कि मर्द क्या समझें औरत का जीवन !



हा स्वामी ! कहना था क्या क्या…



कह न सकी… कर्मों का दोष !



पर जिसमें सन्तोष तुम्हें हो



मुझे है सन्तोष !



वह क्या इस पर विश्वास करती थी, मालूम नहीं, कह नहीं सकता। पर इस मौलिका के दर्द को क्या कोई समझेगा?



मैं एक बात अवश्य जानता हूं कि मौलिका एक साधारण लड़की नहीं थी वह एकदम
सुलझी, समझदार, बुद्धिमान व जीवन्त लड़की थी। उसने पुरानी बातों को भुला कर
नया जीवन अवश्य शुरू कर दिया होगा। उसका एक भाई विदेश में था क्या उसी के
पास चली गई। कुछ पता चलेगा तो बताऊँगा। आप में से तो बहुत लोग विदेश में
रहतें हैं कभी आपको मौलिका मिले तो कहियेगा कि हम सब उसे याद करते हैं;
मिलना चाहेंगे और मुन्ने की माँ भी मिलना चाहेगी।
रेलगाड़ी में मिली








बात तब की है जब मैं नई जॉब के इंटरव्यू के लिए पटियाला जा रहा था।



ट्रेन मैं एक लड़की मुझे दिखी दी जो बहुत देर से मुझे ही देख रही थी। वो
अपने परिवार के साथ बैठी थी। क्या लड़की थी मानो आसमान से परी उतर कर आई हो !
क्या फिगर था उसका ! मैं तो सिर्फ़ उसे देखे जा रहा था और दिल कर रहा था
कि अभी चोद डालूँ उसको।



वो भी मेरे को ऐसे देख रही थी जैसे वो मुझ खा जाएगी।



लेकिन मेरी हिम्मत नहीं पड़ रही थी उसे ज्यादा दे तक लगातार देखने की, फिर भी मैं हिम्मत कर उसे देखने लगा।



कुछ देर बाद वो मुझे देख मुस्कुराई तो मैं भी उसको देख कर मुस्करा दिया।



अब अम्बाला का स्टेशन आ चुका था। मैं पानी पीने के नीचे उतरा वो भी अपने
रिश्तेदारों के साथ नीचे आ गई ओर मेरे पास वाले नल से पानी पीने लगी।



उसके बाद उसने कैंटीन से कुछ खाने का सामान लिया और वापिस गाड़ी में चली गई।



कुछ देर बाद उसने मुझे इशारा लिया और खुद एक छोटी सी बच्ची के साथ टॉयलेट
की तरफ चली गई। उसके इशारे के कारण मैं भी थोड़ी देर बाद उसके पीछे चल दिया।
वो टॉयलेट के बाहर इधर–उधर देख रही थी, बच्ची टॉयलेट में थी। मैं दरवाजे
के पास खड़ा हो गया।



वो मुझसे बात करने लगी, वो बोली- मैं पटियाला जा रही हूँ, वहाँ मुझे लड़के वालों ने देखने आना है और वो एक होटल में ठहरे हैं।



वो मुझसे बात कर रही थी और मेरा लण्ड खंबे की तरह खड़ा हो गया था, मेरा दिल कर रहा था उसे अभी ट्रेन में ही चोद डालूँ।



वो मेरे लण्ड की तरफ बड़े प्यार से देख रही थी और मुस्कुरा रही थी।



उसने मुझसे मेरा मोबाइल नम्बर लिया ओर बोली- तुम मुझ जरूर मिलना।



मैंने भी हाँ कर दी।



वो बोली- मैं तुम्हारा इंतज़ार करूंगी।



फिर मैं फ्रेश होने टॉयलेट गया और वापिस अपनी जगह पर बैठ गया।



अब मेरी हिम्मत बढ़ने लगी, मैने उसे बहुत इशारे किए और उसने भी। सारा सफ़र ऐसे ही चलता गया।



फिर वो अपने साथ के लोगों के साथ खाने खाने लगी। मुझे भी भूख लगी थी तो मैं
राजपुरा प्लेटफ़ार्म पर उतरा और चाय के साथ ब्रैड लेकर वापिस ट्रेन मे आ
गया। थोड़ी देर में पटियाला आ गया और वो फोन का इशारा करके चली गई। मैं भी
अपने ऑफ़िस के काम पर चला गया। मैं अभी काम करके निपटा ही था कि उसका फोन आ
गया, वो बोली- मुझे तुमसे मिलना है, तुम शाम तो फ्री हो?



मैंने हाँ कह दी और उसके होटल का नाम पूछा। उसने होटल का नाम और अपना कमरा
नम्बर बताया। फिर उसी होटल में उसके पास ही मुझे कमरा मिल गया।



शाम के करीब 6 बजे थे, उसका फोन आया, बोली- मेरे कमरे में आ जाओ।



मैं भी देर ना करते हुए उसके कमरे में चला गया।



यारो ! वो क्या लग रही थी, एक दम परी ! या संगमरमर की मूरत ।



मैंने पूछा- बाकी लोग कहां हैं?



वो बोली- सभी लोग गुरुद्वारा साहिब गये हैं, मैं तबीयत ठीक ना होने का बहाना कर यहाँ रुक गई।



उसने मुझे बिठाया और खुद बाथरूम में चली गई। मैं भी उसके पीछे पीछे चल
दिया, उसको बाथरूम में ही पीछे से पकड़ लिया और उसको चूमने लगा।



वो भी मेरा साथ देने लगी। मैं उसको पागलों की तरह चूम रहा था, वो भी !



मैं उसके कपड़े उतारने लगा। वो भी बिना किसी हिचकिचाहट के मेरा साथ देने
लगी। फिर हम 69 की अवस्था में आ गये और मैं उसके दाने को चाटने लगा।



पूरा कमरा उसकी आवाज़ से गूँज रहा था, वो मेरा लण्ड लॉलिपोप की तरह चूस रही
थी।थोड़ी देर बाद वो झड़ गई पर मेरा लण्ड अभी भी उसके मुँह में था, थोड़ी
देर बाद मैं भी उसके मुँह में ही झड़ गया लकिन वो मेरे लण्ड को वैसे ही चूस
रही थी।



फिर से मेरा लण्ड तन कर तैयार हो गया था तो मैंने बिना वक़्त खोए उसकी
टाँगों के बीच में रखा ओर ज़ोर का झटका दिया, मेरा लण्ड उसकी चूत में चला
गया।



मैंने उससे पूछा- पहले किसी से सेक्स किया है?



वो बोली- नहीं ! पर मैं भी सेक्स का मज़ा लेना चाहती थी।



मैंने उसको आधा घण्टा चोदा, पूरा कमरा उसकी आवाज़ से गूँज रहा था, उसकी चूत
में से खून निकलने लगा था, शायद उसे दर्द भी हो रहा था, मेरा भी यही हाल
था।



मुझे मज़ा आने लगा फिर मैं उसके अन्दर ही झड़ गया और उसके ऊपर ही लेट गया।



फ़िर मैंने उसकी गाण्ड मारनी चाही तो उसने मना कर दिया, बोली- अभी मेरे घर
के लोग आने वाले होंगे, अगली बार तुम जो मर्ज़ी करना और बोली- मैं दोबारा
फोन करूँ तो आ जाना।



मैंने उससे दोबारा फोन पर बात करनी चाही तो उसने बताया कि उसकी शादी बंगलौर हो गई है।
मस्त राधा रानी












हाय दोस्तो !



जब कोई मुझे मस्त राधा रानी कहता है तो मुझे बहुत अच्छा लगता है। वैसे अगर
देखा जाए तो मैं हूँ भी बहुत मस्त! दिन दुनिया से बेखबर मैं हमेशा हिरणी की
तरह इधर उधर फुदकती रहती हूँ। अभी नई-नई जवानी जो चढ़ी है मुझ पर। मेरी
उम्र अभी 18 साल है और मैं +2 स्टेंडर्ड में पढ़ती हूँ।



मेरे जीवन में अभी कुछ महीने पहले एक खूबसूरत हादसा हुआ। जो मैं अपने
दोस्तों के साथ बांटना चाहती थी। पर इतने दिलचस्प हादसे को शब्दों में बयान
करना मेरे बस का नहीं था तो मैंने सोचा कि क्यूँ ना किसी ऐसे दोस्त की मदद
ले ली जाए जो इस किस्से को सही ढंग से आप लोगों के बीच में ले आये। मुझे
हिंदी में लिखना नहीं आता इसलिए मेरी यह कहानी मेरे एक मित्र राज शर्मा ने
संपादित और संशोधित की है :



दिसम्बर महीने की वो रात आज भी मुझे याद आती है तो मेरी फुदकन गिलहरी मस्ती में उछल पड़ती है।



मेरे मामा के लड़के की शादी थी और मैं गांव में गई हुई थी शादी के मज़े
लेने के लिए। आप यह मत कहना कि मैं अपने मुँह मिया मिटठू बन रही हू पर यह
शत प्रतिशत सच है कि शादी में आई सभी लड़कियों में मैं सबसे ज्यादा खूबसूरत
और देखने में सेक्सी थी। मेरे उरोज हिमालय की पहाड़ियों का एहसास देते
हैं, कूल्हे (गाण्ड) तो इतनी मस्त है कि जैसे दो मुलायम गद्दे जोड़ दिए
हों। लोग मेरे चेहरे की तुलना दिव्या भारती नाम की एक पुरानी फिल्म हिरोइन
से करते हैं।



शादी की मस्ती जारी थी, नाच गाना हँसी-मज़ाक चल रहा था। मैं तीन दिन पहले
ही आ गई थी इसलिए सबसे घुलमिल गई थी। मामा का लड़का मोहित जिसकी शादी थी वो
तो हर बात में मेरी सलाह ले रहा था। इसका एक कारण तो यह था कि मैं शहर से
आई तो और कुछ हद तक मॉडर्न थी। मेरी पसंद भी बेहद अच्छी है।



पर शादी में एक शख्स ऐसा भी था जिसकी तरफ मेरा ध्यान नहीं था पर वो मुझे हर
वक्त ताकता रहता था। अपनी आँखों से मेरी चढ़ती जवानी को निहार-निहार कर
आपनी आँखों की प्यास बुझाता रहता था, या यूँ कहें कि प्यास बढ़ा रहा था।



आखिर शादी हो गई और अब बारी थी सुहागरात की। शादी में मेरी दोस्ती शादी में
आई एक लड़की रेशमा से हो गई थी। मैंने रेशमा से पूछा- यह सुहागरात में
क्या होता है?



तो उसने आपने आँखें नचाते हुए कहा,”मेरी जान राधा रानी ! सुहागरात मतलब सारी रात ढेर सारी मस्ती !”



“मस्ती?” मैंने उत्सुकतावश पूछा।



“हाँ मस्ती ! सुहागरात पर दूल्हा दुल्हन की सील तोड़ता है फिर दोनों के जिस्म एक दूसरे से मिल जाते हैं और फिर शुरू होती है मस्ती !”



रेशमा ने अपने शब्दों में मेरे सवाल का जवाब दिया। पर इस जवाब ने मेरे दिल
में एक अजीब सी बेचैनी बढ़ा दी कि आखिर दूल्हा शील कैसे तोड़ता है ? मेरा
दिल बेचैन हो गया। जैसे-जैसे रात नजदीक आ रही थी, मेरे दिल की धड़कन बढ़ती
जा रही थी। फूल वाला आया और मोहित का कमरा फूलों से सजा कर चला गया। तभी
मेरी आँखों में फिल्मो का सुहागरात वाला सीन घूम गया। मेरा दिल अब करने लगा
कि देखना चाहिए आखिर यह सुहागरात होती कैसी है? कैसे इसे मनाते हैं?



मामा के घर के हर कोने से अब तक मैं वाकिफ हो चुकी थी। जो कमरा मोहित को
दिया गया था उसकी एक खिड़की बाहर खुलती थी पर उस खिड़की से सुहागरात देखना
खतरे से खाली नहीं था, कोई भी आ सकता था। मैं बेचैन सी कोई सुराख दूंढ रही
थी जिसमें से सुहागरात देखी जा सके पर कोई रास्ता नहीं मिला।



रात को करीब दस बजे दुल्हन को मोहित के कमरे में छोड़ने मोहित की भाभियाँ
गई तो दिल की बेचैनी और बढ़ गई क्योंकि अभी तक कोई सुराख नहीं मिला था। एक
बार तो दिल किया कि जाकर मोहित के कमरे में छुप जाती हूँ पर यह भी मुमकिन
नहीं था।



आखिर दुल्हन को कमरे में भेज कर भाभियाँ हँसती हुई वापिस आ गई। आते ही बड़ी
भाभी बोली,”मोहित का बहुत मोटा है, आज तो दुल्हन की चूत का बाजा बज
जायेगा।”



तो छोटी बोली,”तुमने कब देखा?”



बड़ी ने जवाब दिया,”अरी कितनी बार तो देख चुकी हूँ उसे पेशाब करते और एक बार तो वो करते भी देखा है !”



छोटी ने उत्सुकता से पूछा,”किसके साथ?”



बड़ी हंस पड़ी और बोली,”वो है ना अपने नौकर शम्भू की बेटी माया ! उसी को चोद रहा था एक दिन पिछले जानवरों वाले कमरे में !”



फिर तो उनके बीच लण्ड चूत की बातें शुरू हो गई जिसके कारण मेरी भी चूत पानी-पानी हो उठी।



सब बातों में लगे हुए थे। मैंने मौका देखा कर सुराख ढूँढने का एक और प्रयास
करने का सोचा और बाहर आकर कर खिड़की की तरफ चल पड़ी। बाहर कोई नहीं था।
मैं खिड़की के पास पहुँची और मैंने खिड़की को खोलने की हल्की सी कोशिश की
तो मेरे भाग्य ने मेरा साथ दिया और खिड़की खुल गई। शायद मोहित उसे बंद करना
भूल गया था।



अंदर का नज़ारा देखते ही मेरा दिमाग सन्न रह गया।



मोहित अपने कपड़े उतार रहा था और दुल्हन जिसका नाम नीलम था बिलकुल नंगी बेड
पर अपनी आँखें बंद किये पड़ी थी। जब मोहित ने आपने सारे कपड़े उतार दिए और
बेड की तरफ बढ़ा तो मेरी नज़र उसके हथियार यानि लण्ड देवता पर पड़ी। इतना
बड़ा और मोटा लंड मैं अपनी जिन्दगी में पहले बार देख रही थी। मोहित का कम
से कम 8 इंच लंबा तो जरुर होगा और मोटा भी बहुत था। वो काला नाग बिलकुल तन
कर खड़ा था।



सुहागरात शुरू हो चुकी थी। मोहित अब नीलम के बराबर में लेटा हुआ था और नीलम
के उरोजों को सहला रहा था। नीलम की चूचियाँ भी बड़ी-बड़ी थी और देखने में
बहुत सुन्दर लग रही थी। नीलम का एक हाथ अब मोहित के मोटे लण्ड को सहला रहा
था। चूमा-चाटी के बाद मोहित ने नीलम की टाँगें ऊपर की तो मुझे नीलम की चूत
नज़र आई। नीलम की चूत पर एक भी बाल नहीं था। मेरा हाथ अपने आप मेरी चूत पर
चला गया क्योंकि मेरी चूत पर तो बाल थे। मोहित ने नीलम की टाँगे अपने कंधों
पर रखी और अपना मोटा लण्ड नीलम की चूत पर सटा दिया।



मैं यह सब देखने में मस्त थी कि तभी मुझे मेरे कंधो पर किसी का हाथ महसूस हुआ जो मेरे कंधे सहला रहा था।
सुहागरात शुरू हो चुकी थी।
मोहित अब नीलम के बराबर में लेटा हुआ था और नीलम के उरोजों को सहला रहा था।
नीलम की चूचियाँ भी बड़ी-बड़ी थी और देखने में बहुत सुन्दर लग रही थी।
नीलम का एक हाथ अब मोहित के मोटे लण्ड को सहला रहा था। चूमा-चाटी के बाद
मोहित ने नीलम की टाँगें ऊपर की तो मुझे नीलम की चूत नज़र आई। नीलम की चूत
पर एक भी बाल नहीं था। मेरा हाथ अपने आप मेरी चूत पर चला गया क्योंकि मेरी
चूत पर तो बाल थे। मोहित ने नीलम की टाँगे अपने कंधों पर रखी और अपना मोटा
लण्ड नीलम की चूत पर सटा दिया।



मैं यह सब देखने में मस्त थी कि तभी मुझे मेरे कंधों पर किसी का हाथ महसूस हुआ जो मेरे कंधे सहला रहा था।



मैं चौंक गई। मैंने मुड़ कर देखा तो अँधेरे में वो पहचान में नहीं आया। पर
वो था कोई बलिष्ट शरीर का मालिक। उसके हाथ के स्पर्श में मर्दानगी स्पष्ट
नज़र आ रही थी। मैंने उसका हाथ हटा कर वहाँ से भागने की कोशिश की तो उसने
मुझे कमर से पकड़ लिया और मेरी एक चूची को पकड़ कर मसल दिया। मैं दर्द के
मारे कसमसाई पर डर के मारे मेरी आवाज नहीं निकल रही थी क्योंकि आवाज निकलने
का मतलब था कि मेरी चोरी पकड़ी जाती। मैं पुरजोर उससे छूटने का प्रयास
करती रही। पर जितना मैं छूटने का प्रयास करती उतना ही उसके हाथ मेरे शरीर
के अंदरूनी अंगों की तरफ बढ़ते जा रहे थे।



अब तो उसके हाथ का स्पर्श मेरे शरीर में एक आग सी लगाता महसूस हो रहा था।
ना जाने क्यों अब मुझे भी उसके हाथ का स्पर्श अच्छा लगने लगा था। मेरा
प्रतिरोध पहले से बहुत कम हो गया था। अब उसके हाथ बहुत सहूलियत के साथ मेरे
शरीर के अंगों को सहला रहे थे।



अचानक उसने मुझे अपनी ओर घुमाया और अपने होंठ मेरे कोमल गुलाब की
पंखुड़ियों जैसे होंठो पर रख दिए। उसकी बड़ी बड़ी मूछें थी। पर वो बहुत अछे
तरीके से मेरे होंठों की चुसाई कर रहा था।



अब वो मुझे खींच कर खिड़की की तरफ ले गया और मेरा मुँह खिड़की की तरफ करके
पीछे से मेरी चूचियाँ मसलने लगा साथ साथ उसका एक हाथ मेरी जाँघों को भी
सहला रहा था। मेरी चूत पानी छोड़ने लगी थी। पहली बार मेरा दिल कुछ ऐसा कर
रहा था कि मैं कोई चीज़ अपनी प्यारी चूत में घुसेड़ लूँ। मेरी आँखे बंद हो
गई थी कि तभी कमरे में उठी सीत्कार ने मेरी आँखे खोली तो देखा कि मोहित का
वो मोटा लण्ड अब नीलम की नाजुक और छोटी सी दिखने वाली चूत में जड़ तक घुसा
हुआ था और अब मोहित उसे आराम आराम से अंदर-बाहर कर रहा था और नीलम तकिये को
मजबूती से अपने हाथों में पकड़े और अपने होंठ दबाये उसके लण्ड का अपनी चूत
में स्वागत कर रही थी।



धीरे धीरे मोहित के धक्के जोर पकड़ने लगे और नीलम और जोर जोर से सीत्कार
करने लगी। बाहर उस आदमी का हाथ अब मेरी चूत तक पहुँच चुका था और उसकी एक
अंगुली अब मेरी चूत के दाने को सहला रही थी जिस कारण मेरी चूत के अंदर एक
ज्वार-भाटा सा उठने लगा था। उसने अपनी अंगुली मेरी चूत में अंदर करने की
कोशिश भी की पर मेरी चूत अब तक बिलकुल कोरी थी क्योंकि अभी तक तो मैंने भी
कभी अपनी चूत में अंगुली डालने की कोशिश तक नहीं की थी। उसकी अंगुली से
मुझे दर्द सा हुआ तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया तो उसने भी अंगुली अंदर
डालने का इरादा छोड़ दिया और वो ऐसे ही चूत के दाने को सहलाता रहा। अंदर की
चुदाई देख कर और अंगुली की मस्ती ने अपना रंग दिखाया और मेरा बदन अब
अकड़ने लगा। इससे पहले कि मैं कुछ समझती मेरी चूत में झनझनाहट सी हुई और
फिर मेरी चूत से कुछ निकलता हुआ सा महसूस हुआ। मेरा हाथ नीचे गया तो मेरी
चूत बिलकुल गीली थी और उसमें से अब भी पानी निकल रहा था।



मेरी चूत अपने जीवन का पहला परम-आनन्द महसूस कर चुकी थी। पर वो किसी लण्ड
से नहीं बल्कि एक अजनबी की अंगुली से हुआ था। मेरा शरीर अब ढीला पड़ चुका
था और मुझ से अब खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था।



तभी दरवाज़ा खुलने की आवाज आई और उसकी पकड़ थोड़ी ढीली हुई तो मैं एकदम
उसकी पकड़ से आज़ाद हो कर जल्दी से अंदर की तरफ भागी। भागते हुए मेरी शॉल
जो मैंने ठण्ड से बचने के लिये ओढ़ रखी थी, वो बाहर ही गिर गई। मैं जल्दी
से जाकर अपनी रजाई में घुस गई। कमरे में सब सो चुके थे। तभी मुझे अपनी शॉल
याद आई। पहले तो सोचा कि सुबह ले लूंगी पर फिर सोचा अगर मेरी शॉल किसी ने
मोहित के कमरे की खिड़की के नीचे देख ली तो भांडा फूटने का डर था।



मैं उठी और बाहर जाने के लिये दरवाज़ा खोला तो देखा वो अब भी मोहित की
खिड़की के पास खड़ा था। मैंने उस चेहरे को पहचानने की कोशिश की पर पहचान
नहीं पा रही थी क्योंकि उसने कम्बल ओढ़ रखा था। वो अब मोहित की खिड़की के
थोड़ा और नजदीक आया तो कमरे से आती नाईट बल्ब की रोशनी में मुझे उसका चेहरा
दिखाई दिया। मैं सन्न रह गई। ये तो मेरे मामा यानि मोहित के पापा रोशन लाल
थे। तो क्या वो मेरे मामा थे जो कुछ देर पहले मेरे जवान जिस्म के साथ खेल
रहे थे। सोचते ही मेरे अंदर एक अजीब सा रोमांच भर गया।



मेरी शॉल लेने जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी पर वो लेनी भी जरुरी था। डर
भी लग रहा था कि कहीं वो दुबारा ना मुझे पकड़ कर मसल दे। फिर सोचा अगर मसल
भी देंगे तो क्या हुआ, मज़ा भी तो आयेगा।



मैं हिम्मत करके वहाँ गई और अपनी शाल उठा कर जैसे ही मुड़ी तो मामा ने मुझे हलके से पुकारा,”राधा !”



मेरी तो जैसे साँस ही रुक गई। मेरे कदम एकदम से रुक गए। मामा मेरे नजदीक आए
और मेरे कंधे पकड़ कर मुझे अपनी तरफ घुमाया। मेरी कंपकंपी छूट गई। एक तो
सर्दी और फिर डर दोनों मिल कर मुझे कंपकंपा रहे थे। मामा ने मेरे चेहरे को
अपने बड़े बड़े हाथों में लिया और एक बार फिर मेरे होंठ चूम लिए।



फिर बोले,”राधा ! तू बहुत खूबसूरत हैं, तूने तो अपने मामा का दिल लूट लिया है मेरी रानी !”



“मुझे छोड़ दो मामा ! कोई आ जाएगा तो बहुत बदनामी होगी आपकी भी और मेरी भी !”



मामा ने मुझे एक बार और चूमा और फिर छोड़ दिया। मैं बिना कुछ बोले अपनी शॉल
ले कर कमरे में भाग आई। उस सारी रात मैं सो नहीं पाई। मामा की अंगुली का
एहसास मुझे बार बार अपनी चूत पर महसूस हो रहा तो और रोमांच भर में चूत पानी
छोड़ देती थी। बार बार मन में आ रहा था कि अगर मामा भी वैसे ही अपना लण्ड
मेरी चूत में घुसाते जैसे मोहित ने नीलम की चूत में घुसाया हुआ था तो कैसा
महसूस होता।



सुबह सुबह की खुमारी में जब मैं अपने बिस्तर से उठ कर बाहर आई तो सामने
मामा जी कुछ लोगों के साथ बैठे थे। मुझे देखते ही उनके चेहरे पर एक मुस्कान
सी तैर गई।



तभी मेरी मम्मी भी आ गई और वो भी मामा के पास बैठ गई। माँ और मामा आपस में
बात करने लगे और मम्मी ने मामा से जाने की इजाजत माँगी तो मामा ने मम्मी को
कहा,”राधा को तो कुछ और दिन रहने दो।”



मम्मी ने मेरी ओर देखा शायद पूछना चाहती थी कि क्या मैं रुकना चाहती हूँ।
अगर दिल की बात कहूँ तो मेरा वापिस जाने का मन नहीं था पर मुझे स्कूल भी तो
जाना था। बस इसी लिए मैंने मम्मी को बोला,”नहीं मम्मी मुझे स्कूल भी तो
जाना हैं, आगे जब छुट्टियाँ होंगी तो रहने आ जाउंगी।”



मामा ने एक भरपूर नज़र मुझे देखा। तभी मम्मी को किसी ने आवाज़ दी और मम्मी
उठ कर चली गई। अब मामा के पास सिर्फ मैं रह गई। मैं भी उठकर जाने लगी तो
मामा बोले,”राधा रानी, नाराज़ तो नहीं हो अपने मामा से ?”



मेरे से जवाब देते नहीं बन रहा था। पर मेरी गर्दन अपने आप ही ना में हिल गई
और जुबान ने भी गर्दन का साथ दिया,”नहीं… नहीं तो मामा जी !” मैंने ‘मामा
जी’ शब्द पर थोड़ा ज्यादा जोर दिया था।



“तो रुक जाओ ना !” मामा ने थोड़ा मिन्नत सी करते हुए कहा।



“नहीं मामा, मुझे स्कूल भी जाना होता है और रुकने से पढाई का बहुत हर्ज होगा। मैं बाद में छुट्टियों में आ जाउंगी।”



“चल जैसी तेरी मर्ज़ी, पर अगर रूकती तो मुझे बहुत अच्छा लगता !”



अब हम दोनों रात की बात को लेकर बिलकुल निश्चिन्त थे। ना तो मामा ने और ना
ही मैंने रात की बात का जिक्र किया था। पर हम दोनों की ही आँखें रात की
मस्ती की खुमारी बाकी थी जो दिल की धड़कन बढ़ा रही थी।



खैर मम्मी और मैं शाम की गाड़ी से वापिस आ गए।



घर पहुँच कर मेरा बिल्कुल भी दिल नहीं लग रहा था। पर फिर जब स्कूल आना जाना
शुरू हो गया तो सहेलियों के साथ पढ़ने घूमने और गप्पें मारने में मैं वो
बात दिन में तो भूल जाती थी पर रात को अपने बिस्तर पर लेटते ही मुझे मामा
की याद फिर से सताने लगती।



कुछ दिन के बाद मामा का फोन आया। संयोग ही था कि उस समय मैं घर पर अकेली ही
थी। मम्मी पड़ोस में गई हुई थी और पापा ऑफिस। मामा की आवाज़ सुनते ही मेरी
चूत गीली हो गई। मामा पहले तो ठीक बात करते रहे पर जब उन्हें पता चला कि
मैं घर पर अकेली हूँ तो मामा ने बात करने का टॉपिक बदल दिया।



“कैसी हो राधा रानी?” राधा बेटी से मामा सीधे राधा रानी पर आ गए।



“ठीक हूँ मामा जी।”



“मामा की याद आती है राधा रानी?”



“आती तो है ! क्यूँ ???”



“मुझे तो बहुत याद आती है तुम्हारी…. मेरी जान !”



“मामा, अपनी भांजी को ‘जान’ कह रहे हो ! इरादे तो नेक हैं ना तुम्हारे ?”



मामा थोड़ा झेंप गया।



“अरी नहीं…. बस उस रात को याद कर कर के दिल में दर्द सा होने लगता है राधा रानी !”



“मामा तुम भी ना !”



“क्या तुम भी ना?”



“मैं नहीं बोलती आप से। आप बहुत बेशर्म हैं।”



“अच्छा ऐसा मैंने क्या किया ?”



मैंने बात का टॉपिक फिर से बदलते हुए पूछा,”शहर कब आओगे मामा ?”



“जब मेरी राधा रानी बुलाएगी तो चले आयेंगे।”



“तो आ जाओ, तुम्हें पूरा शहर घुमा कर लाऊंगी।”



“चल ठीक है, मैं एक दो दिन में आने का कार्यक्रम बनाता हूँ, पर तू अपना वादा मत भूलना, पूरा शहर घुमाना पड़ेगा।”



“ठीक है ….ये लो मम्मी आ गई मम्मी से बात करो।”



मम्मी आ गई थी तो मैंने फोन मम्मी को दिया और बाथरूम में चली गई।



बाथरूम में जाने का एक कारण तो ये था कि मामा से बात करते करते मेरी पेंटी
पूरी गीली हो गई थी और चूत भी चुनमुनाने लगी थी। मैं बाथरूम में गई और चूत
को सहलाने लगी और तब तक सहलाती रही जब तक उसने पानी नहीं छोड़ दिया।



अब तो मुझे मामा के आने का इंतज़ार सा हो गया।
अब तो मुझे मामा के आने का इंतज़ार सा हो गया।



मामा चार दिन के बाद आये। आने से पहले उन्होंने पापा को फोन कर दिया था पर
मुझे इस बात का पता नहीं था। मेरे लिए तो यह एक सरप्राइज से कम नहीं था।
जैसे ही मैं स्कूल से वापिस आई तो घर में घुसते ही सामने मामा बैठे थे। मैं
अवाक सी उन्हें देखती रही। तभी मामा ने आगे आकर मुझे गले से लगा लिया और
इसी दौरान मेरे कूल्हे को भी स्कर्ट के ऊपर से ही दबा दिया।



“मामा पहले बताना तो चाहिए था ना !” मैंने ऊपरी मन से नाराज़ होने का नाटक सा किया।



“बस अपनी बेटी से मिलने का दिल किया और और दौड़ते हुए आ गए मिलने के लिए !” मामा ने मुझे आपनी बाहों में अच्छे से जकड़ते हुए कहा।



मम्मी मामा का और मेरा प्यार देख कर हँस रही थी। उसे अंदर की खिचड़ी का पता
थोड़े ही था। मैंने महसूस किया की मामा के स्पर्श मात्र से मेरी चूत गीली
हो गई थी। मैं भाग कर बाथरूम में गई और चूत को सहला दिया।



कपड़े बदल कर मैं फिर से मामा के पास आकर बैठ गई। तभी मम्मी को बुलाने
पड़ोस की एक औरत आई और मम्मी उससे बात करने के लिए बाहर चली गई। मैं भी
उठकर जाने लगी तो मामा ने मेरी बाहँ पकड़ कर अपनी और खींचा तो मैं सीधे
मामा की गोद में जाकर गिरी। मुझे अपनी गाण्ड के नीचे कुछ चुभता हुआ सा
महसूस हुआ तो मेरा दिमाग एक दम से ठनका कि कहीं यह वही तो नहीं ?? मोटा सा,
लंबा सा, मोहित के जैसा। सोचते ही मैं फिर से झनझना गई। वो मुझे बहुत कठोर
महसूस हो रहा था। मामा ने मेरा मुँह पकड़ा और मेरे नाजुक होंठों पर अपने
होंठ रख दिए और मस्त हो चूसने लगे।



“मामा तुम्हारी मूछें बहुत गुदगुदी करती हैं।”



मेरी बात सुन कर मामा हँस पड़े। मैं अपने को छुड़वाते हुए मामा से अलग हुई
तो मामा के पायजामे में तम्बू बना हुआ था। उस तम्बू से उस के अंदर छुपे
काले नाग का एहसास मुझे हो गया था। इसे महसूस करके मेरा मन थोड़ा डर भी गया
था कि अगर मामा इसे मेरी चूत में घुसाने लगा तो मेरी तो फट ही जायेगी। जिस
चूत में अंगुली भी नहीं जाती उसमे इतना मोटा लण्ड कैसे जाएगा भला ???



मैं इसी उधेड़बुन में थी कि मामा खड़े होकर मेरे पीछे आ गया और पीछे से
मेरी चूचियों को पकड़ कर सहलाने लगे। मामा का लण्ड अब मुझे अपने कूल्हों पर
महसूस होने लगा था।



तभी मम्मी आ गई और मामा मुझ से दूर होकर सोफे पर बैठ गए।



अभी दोपहर के तीन बजे थे, मौसम बहुत सुहाना हो रहा था, मामा बोले “राधा
बेटा ! तुम तो कह रही थी कि जब मैं शहर आऊंगा तो तुम मुझे शहर घुमाओगी, अब
क्या हुआ ??”



मैं मामा के शहर घूमने का मतलब अच्छे से समझ रही थी। मैंने भी हँसते हुए बोला,”आप पापा के साथ घूम आना।”



“पर बेटा वादा तो तुमने किया था !”



“ठीक है, माँ से पूछ लो अगर वो बोलेगी तो घुमा लाऊंगी।”



मम्मी जो वहीं बैठी थी बोली,”अरी बेटी, घुमा लाओ ! इसमें पूछने वाली क्या बात है? तुम्हारे मामा हैं !”



बस फिर देर किस बात की थी। मैं झट से तैयार हो गई। मैंने टॉप स्कर्ट और
ठण्ड से बचने के लिए जैकेट पहन लिया। मैंने मामा को अपनी एक्टिवा पर बैठाया
और निकल पड़े घूमने।



शहर में इधर-उधर घूमते-घूमते मैं मामा को मॉल दिखाने ले गई। वहाँ मूवी भी
लगी हुई थी। मामा का मन पसंद एक्टर अभिषेक बच्चन है और वहाँ उसकी फिल्म
‘रावण” लगी हुई थी। मैं मूवी देख चुकी थी और मुझे पता था कि बिल्कुल डिब्बा
फिल्म है पर मामा बोले कि उन्हें वही फिल्म देखनी है।



सो हम टिकेट लेकर अंदर चले गए। हॉल में एक दो लोग ही बैठे थे बाकि सारा हॉल
बिल्कुल खाली था। हम दोनों कोने की एक सीट पर बैठ गए। मुझे मालूम था कि अब
क्या होने वाला है।



मैंने मम्मी को फ़ोन करके बोल दिया कि मैं मामा के साथ सहारा मॉल में मूवी
देख रही हूँ। मम्मी को बताने के बाद मैं निश्चिन्त हो गई। फिल्म शुरू होते
ही मामा का हाथ मेरे बदन पर घुमने लगा। आज मैंने ब्रा जानबूझ कर नहीं पहनी
थी। जब मामा का हाथ मेरे टॉप पर गया तो मेरी चूचियाँ एकदम से तन गई, चुचूक
कड़े हो गए, आँखें बंद हो गई।



तभी मामा ने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी तरफ खींचा। मुझे कुछ अंदाजा नहीं था कि
एकदम से मुझे कुछ गर्म-गर्म सा महसूस हुआ। आँख खोल कर देखा तो वो मामा का
मूसल था- आठ इंच लंबा और करीब तीन इंच मोटा लण्ड लोहे की तरह सख्त, सर तान
कर खड़ा हुआ। उसे देखते ही मेरी चूत चुनमुना गई। मैंने मामा का लण्ड हाथ
में पकड़ लिया और धीरे धीरे सहलाने लगी। मामा का हाथ भी मेरी पेंटी के अंदर
घुस कर मेरी चूत का दाना सहला रहा था। मुझे इस बात का एहसास था कि मैं
कहाँ हूँ तभी मैंने अपनी आहें अंदर ही दबा ली अगर कहीं और होती तो सीत्कार
निकल ही जाती । आसपास कोई नहीं था।



मामा बोले “राधा कभी चुदवाया है किसी से?”



चुदवाया शब्द सुनते ही दिल धक-धक करने लगा, मुँह से आवाज नहीं निकल रही थी, बस मैंने ना में गर्दन हिला दी।



“यानि अभी तक कोरी हो?”



“हाँ !”



“लण्ड का मज़ा लोगी ?”



अब मैं क्या कहती कि नहीं लूँगी। अगर लण्ड का मज़ा नहीं लेना होता तो क्या
मैं ऐसे उसका लण्ड सहला रही होती और उसे अपनी चूत सहलाने दे रही होती। ये
गांव के लोग भी ना बहुत भोले होते है पर इनका लण्ड सच में कमाल होता है।



“यहाँ पर नहीं, घर पर चलते हैं ना !”



“पर घर पर तो सभी होंगे ?”



“आप चिंता ना करें, रात को जब सब सो जायेंगे तो मैं आपके कमरे में आ जाउंगी !”



“सच?”



“हुं ”



“चलो ठीक है !” कहते हुए मामा ने मुझे एक बार फिर चूम लिया ।



तय कार्यक्रम के मुताबिक़ मैं रात को 11 बजे उनके कमरे में पहुँच गई।



कमरे में पहुँचते ही मामा ने दरवाज़ा बंद किया और मुझे गोद में उठा कर
बिस्तर पर लिटा दिया। मामा ने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए। मैं बेड पर
लेटी हुई मामा को देख रही थी। जब मामा ने अपना कुरता उतारा तो मामा की
बालों से भरी मर्दाना छाती देख कर ही मस्त हो उठी। मेरे दिल में अब गुदगुदी
होने लगी थी यह सोच कर कि कुछ देर के बाद मेरी चूत भी लण्ड का मज़ा लेने
वाली है।



मामा ने अपने सारे कपड़े उतार दिए, अब सिर्फ एक कच्छा ही मामा के शरीर पर
रह गया था। मामा मेरे पास आये और एक एक करके मेरे कपड़े उतारने लगे। और
मात्र एक मिनट में ही मैं मामा के सामने सिर्फ पेंटी में पड़ी थी। और मामा
मेरे चुचूक पकड़ कर मसल रहे थे और अपने होंठों में दबा-दबा कर चूस रहे थे।
मामा की इस हरकत से मेरे बदन में आग सी लगती जा रही थी। मामा ने अब मेरी
पेंटी भी उतार दी और मेरी रेशमी बालों से भरी चूत पर हाथ फेरने लगे और फिर
अचानक अपने होंठ मेरी चूत पर रख दिए। मैं एक दम से चिंहुक उठी। होंठों की
गर्मी और चूत की गर्मी का मिलन इतना अच्छा था कि उसका वर्णन शब्दों में
बताना मेरे बस में नहीं है।



“आह्हह्ह” मेरी सीत्कारें अब खुल कर निकल रही थी और मैं मस्ती में मामा का
सर अपनी चूत पर अपनी जाँघों के बीच दबा रही थी, मन कर रहा था कि मामा अपना
पूरा सर मेरी चूत में घुसेड़ दें।



“खा जा बहन के लौड़े मेरी चूत को….. अह्ह्ह मामा…….” ना जाने कैसे मेरे मुँह से अपने आप गाली निकल गई।



मामा तो मेरी कुंवारी चूत को चाटने में मस्त था। वो अपनी खुरदरी जीभ मेरी
चूत में अंदर तक घुसाने की कोशिश कर रहा था। जीभ का खुरदरा एहसास हाय कैसे
बयान करूँ, मैं तो जन्नत में थी उस समय।



कुछ देर बाद मामा ने दशा बदली और अब उसका मोटा मूसल अब मेरे मुँह के सामने
था। मैंने देखा तो नहीं था पर सुना था कि कुछ लडकियां और औरतें लंड को मुँह
में लेकर चूसती भी हैं। बस मैंने भी अपना मुँह खोला और मामा का वो काला
भुजंग मैंने अपने नाजुक होंठों में दबा लिया। मामा का लण्ड मेरे मुँह के
लिए भी मोटा था पता नहीं चूत में कैसे जाएगा। अभी मैं यह सोच ही रही थी कि
मामा अब सीधे हुए और मेरी टाँगें पकड़ कर मेरी जांघे चौड़ी की। मामा ने
अपना मस्त कलंदर मेरी मुनिया से भिड़ा दिया। एक बार तो ऐसा लगा जैसे कोई
गर्म लोहे की राड भिड़ा दी हो। मेरी अब सीत्कारें निकल रही थी और मामा मेरी
कुंवारी चूत में अपना लण्ड घुसाने के लिए मरा जा रहे थे और मैं भी आने
वाले दर्द से अनजान मामा के लण्ड का इंतज़ार कर रही थी कि कब घुसेगा यह
मूसल मेरी चूत में ??



मामा ने काफी सारा थूक मेरी चूत पर लगाया। मामा के लण्ड पर तो पहले से ही
मेरा थूक लगा हुआ था। थूक लगा कर मामा ने अपना काला नाग मेरी सुरंग में
घुसाने के हलकी सी कोशिश करी तो मुझे पहली बार कुछ दर्द का एहसास हुआ पर
मस्ती पूरे जोर पर थी तो मैंने उस दर्द की तरफ ध्यान नहीं दिया। तभी मामा
ने अपना लण्ड सही से सेट करके एक जोरदार धक्का लगाया तो मामा का मोटा
सुपारा मेरी चूत में उतर गया और मैं हलाल होते बकरे की तरह मिमिया उठी।
दर्द की एक तीखी लहर मेरे पूरे बदन में दौड़ गई। ऐसा लगा जैसे चाकू से मेरी
चूत को कोई चीर रहा हो।



अभी मैं कुछ सोच पाती कि मामा ने एक और जोर दार धक्का मारा और मामा का दो
इंच मोटा लण्ड करीब 4 इंच तक मेरी कोरी चूत में उतर गया। मेरी आँखों से
गंगा-जमुना बह निकली। दर्द के मारे मैं अब बिलबिला रही थी। मामा ने मेरे
होंठ आपने होंठों में दबा रखे थे इस कारण मैं चिल्ला नहीं पा रही थी वरना
मेरी चीख से तो पूरा घर हिल जाता।



मामा मेरी कोमल चूत में अपने लण्ड पूरा घुसाने में पूरी मशक्कत कर रहे थे।
मामा ने पूरा जोर लगते हुए दो तीन धक्के एक साथ बिना रुके लगा दिए और लण्ड
मेरी सील तोड़ता हुआ चूत में जड़ तक समा गया। चूत में कुछ गीला गीला सा
महसूस हुआ। तब पता नहीं था कि मेरी ही चूत का खून हुआ है अभी अभी। लण्ड
पूरा घुसाने के बाद मामा कुछ देर के लिए मेरे ऊपर ही लेट सा गया और मेरी
चूचियों को सहलाने और मसलने लगे।



जैसे ही मामा ने मेरे होंठ छोड़े, मैं गिड़गिड़ा उठी,”मामा, प्लीज़ निकाल
लो इसे, बाहर वर्ना मैं मर जाउंगी। निकाल लो मामा, मेरी फट गई है प्लीज़
!!! मुझे बहुत दर्द हो रहा है, मामा मैं मर जाउंगी।”



“कुछ नहीं होगा मेरी रानी बेटी, बस थोड़ा सा सहन करो, फिर तुम ही बोलोगी कि अंदर डालो।”



“म… मामा … मुझे नहीं करवाना…. प्लीज़ निकाल लो।”



मामा ने मेरी एक ना सुनी और धीरे धीरे लण्ड को अंदर-बाहर करना शुरू कर
दिया। मुझे तीखा दर्द हो रहा था पर मामा अपना काम पूरा करने में लगे थे।
मामा मेरे चुचूक चूसते हुए धीरे-धीरे धक्के लगा रहे थे। कुछ देर के बाद जब
लण्ड आराम से अंदर-बाहर होने लगा तो मुझे भी दर्द की जगह मज़ा आने लगा।
बीच-बीच में कभी-कभी हल्की टीस सी होती पर अब मज़ा आने लगा था। मेरे चूतड़
अब मामा के धक्के का जवाब देने के लिए उठने लगे थे। मामा के धक्कों की गति
भी अब बढ़ गई थी। अब मुझे बहुत मज़ा आने लगा था। दर्द बिल्कुल खत्म हो चुका
था।



अब तो मैं भी “और जोर जोर से करो मामा और जोर से !” बड़बड़ा रही थी। अब तो
दिल कर रहा था कि मामा ऐसे ही जोर जोर से धक्के लगाते रहें। मामा को भी
जैसे मेरे मन की बात पता थी, तभी तो वो बिना रुके जोर जोर से धक्के लगा रहे
थे, सीत्कारें कमरे में गूँज रही थी।



“आह्हआह्ह्ह.उईईईईजोर से म….. मामाऽऽ !”



“ये ले मेरी रानी !”



मामा मस्त मर्द थे, पूरे पन्द्रह मिनट हो चुके थे मामा को चोदते हुए पर अभी
भी मामा का लण्ड लोहे की तरह ही अकड़ कर खड़ा था और मेरी चूत की पूरी तरह
से रगड़-रगड़ कर चुदाई कर रहा था। कुछ देर की चुदाई के बाद मेरा बदन अकड़ने
लगा। ऐसा लगा जैसे मेरा सारा बदन मेरी चूत के रास्ते बाहर आने को बेताब
है। आठ दस धक्कों के बाद ही मेरी चूत से झरना बह निकला। मैं तो जैसे बादलों
के ऊपर उड़ रही थी। मामा अब भी लगातार धक्के पर धक्के लगा रहे थे।



थोड़ी ही देर बाद मेरा पूरा बदन फिर से मस्ती से भर गया और मैं अपनी गाण्ड
उछाल उछाल कर मामा का लण्ड अपनी चूत में ले रही थी। एकाएक मामा रुक गए और
मुझे अपने घुटनों के बल घोड़ीकी तरह होने को कहा। मैं मामा के कहे अनुसार
हो गई तो मामा ने पीछे आकर पहले तो मेरी चूत को थोड़ा सा चाटा और फिर लण्ड
का सुपारा मेरी चूत पर सटा कर लण्ड एक ही धक्के में पूरा मेरी चूत में ड़ाल
दिया और फिर से जोरदार धक्के लगाने लगे। इस आसन में चुदवाने में मुझे बहुत
मज़ा आया।



मामा ने पूरे पच्चीस मिनट तक मेरी चुदाई की और मैं एक बार फिर झड़ गई।



अब मामा ने मुझे सीधा लेटा कर फिर से लण्ड अंदर डाल दिया और चोदने लगे। दस
पन्द्रह धक्के ही लगा पाए थे कि उनका लण्ड भी शहीद होने के कागार पर पहुँच
गया।



वो लण्ड का रस मेरी चूत में नहीं निकालना चाहते थे क्योंकि उसमे खतरा था।
पर इससे पहले कि वो कुछ करते उनके लण्ड से गर्म गर्म वीर्य निकल कर मेरी
चूत में भरने लगा। गर्म गर्म वीर्य का एहसास मिलते ही मेरी चूत भी बुरी तरह
से संकोचन करने लगी और मामा के लण्ड को अपने अंदर जकड़ने और छोड़ने लगी।
मुझे मेरी चूत अब भरी भरी सी महसूस हो रही थी। मेरा पूरा शरीर फूल की तरह
हल्का हो गया था और मैं तो जैसे हवा में उड़ रही थी। मैंने अपने दोनों
हाथों और टांगों से मामा को जकड़ रखा था। मामा रुक-रुक कर झटके खा रहे थे
और अपने वीर्य को मेरी चूत में निचोड़ रहे थे। शादी में से आने के बाद से
मेरा शरीर जिस आग में धधक रहा था वो सारी आग मामा के गर्म गर्म वीर्य ने
बुझा दी थी।



हम दोनों एक दूसरे से लिपटे थोड़ी देर ऐसे ही पड़े रहे। मामा एक बार और
मेरी प्यारी मुनिया के साथ मूसल मस्ती करना चाहते थे। मैं भला मन क्यों
करती। थोड़ी देर बाद फिर उन्होंने एक बार फिर से मेरी टाँगें उठाकर अपना
मूसल मेरी चूत में जड़ तक घुसेड़ दिया और सुबह तक मेरी चूत का दो बार बजा
बजाया।



मैं आज भी जब भी वो मेरे घर पर आते हैं, खूब चुदवाती हूँ।



मेरी कहानी कैसी लगी मुझे जरुर बताना। आपका मूल्यांकन मुझे अपने आगे के मस्त अनुभवों को आपके बीच लाने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
नितिन की टल्ली










मित्रों नमश्कार,

मैं हूँ नेहा और मैं पंजाब कि रहने वाली हूँ! मेरी उम्र २१ साल है और मेरा
रंग गोरा है, चेहरा सुंदर और जिस्म आकर्षक है! मेरा कद पांच फुट छह इंच है,
और मेरे छुईमुई शरीर के पैमाने ३४-२४-३६ है! मेरे माता और पिता के स्वर्ग
सिधारने बाद मैं पिछले ५ साल से अपनी बड़ी बहन, जीजाजी और उनके इकलौते बेटे
नितिन के साथ, पंजाब के एक बड़े शहर में रहती हूँ! मैंने बी एससी करने के
बाद अब एम एससी कर रही हूँ! जीजा जी बैंक में एक बड़े अफसर हैं और दीदी
स्कूल में टीचर हैं! उनका बेटा नितिन १८ साल का है और बी बी ऐ कर रहा है!
हमारा घर बहुत बड़ा है और हर एक को अलग अलग कमरा मिला हुआ है! हर कमरे के
साथ बाथरूम भी लगा हुआ है! मैं अपने कमरे में जयादातर अर्धनग्न ही रहती
हूँ! जीजाजी के जाने के बाद मैं अक्सर एक छोटीसी निकर और एक लो नेक की
बनियान (बिना कच्छी और ब्रा के) ही पहनती हूँ जिस से मेरी लंबी टाँगे और
मेरे मम्मों के दर्शन सब को आराम से हो जाते हैं!



मैंने अपना छोटा सा परिचय तो आप को दे दिया, अब मैं आप को उस घटना के बारे
में बताना चाहूंगी जिस ने मेरे जीवन में बदलाव लाया और मुझे बेशर्म बना
दिया! पहले मैं अपने जिस्म कि नुमाइश नहीं होने देती थी और हमेशा सलवार
कमीज ही पहने रहती थी! लेकिन उस घटना के बाद मेरे पहनावे में बदलाव आगया और
मैं घर में जिस्म की नुमाइश करने लगी! जीजाजी के सामने तो मैं अपने जिस्म
को ढक के रखती हूँ और ढंग के कपड़े ही पहनती हूँ पर दीदी और नितिन के सामने
नेकर बनियान में ही घूमती रहती हूँ, कभी कभी तो उनके सामने ही टॉपलेस हो कर
अपने कपड़े भी बदल लेती हूँ! दीदी बहुत टोकती है पर मैं परवाह ही नहीं करती
हूँ!

वह घटना आज से एक साल पहले हुई थी! उस समय मुझे टाईफाइड हो कर हटा था और
मैं बहुत कमजोर हो गई थी! कहीं वह पीलिया न बन जाए इसलिए डाक्टर ने मुझे
हिलने डुलने से मना कर दिया था और बिस्तर पर ही आराम करने को कहा! उन्होंने
कुछ दिनों के लिए नहाने धोने को भी मना किया और दीदी से मेरे जिस्म को
स्पंज (गीले कपड़े से पोंछना) करने को कहा! सिर्फ बाथरूम जाने कि इजाजत दी
और वहां भी कोई पकड़ के ले जाए! ज्यादातर तो दीदी ही यह सब करती थी लेकिन
कभी कभी नितिन भी मुझे बाथरूम ले जाता था! वह मुझे अंदर छोड़ कर बाहर खड़ा हो
जाता था और जब मैं आवाज देती थी तो वह वापिस मुझे बिस्तर तक छोड़ देता था!
दो सप्ताह के बाद मेरा बुखार तो उतर गया था लेकिन ज्यादा कमजोरी के कारण
डाक्टर ने अगले १५ दिन के लिए भी वैसा ही आराम करने को कह दिया था! दीदी कि
जिद पर और जीजाजी कि आज्ञा के कारण मैं बिस्तर पर ही लेटी रहती थी और जब
जरूरत पड़ती थी तब दीदी को या नितिन को आवाज़ लगा देती थी! इस तरह अभी पांच
दिन ही बीते थे कि खबर आई कि गांव में जीजाजी के पिताजी का निधन हो गया था
और इसलिए जीजाजी और दीदी को तुरंत वहां जाना पड़ा! जाने से पहले दीदी ने
मुन्नी (कामवाली बाई) को घर के बाकी काम के साथ साथ मेरा स्पंज करने और
खाना बनाने को भी कह दिया था, इसलिए वह दिन में हमारे घर पर ही रहती थी और
शाम का खाना बना कर अपने घर चली जाती थी! देर शाम और रात में तो मुझे नितिन
पर ही निर्भर रहना पड़ता था! दीदी के जाने के अगले दिन सुबह जब मुन्नी ने
मेरे कपड़े उतार कर मेरे बदन को स्पंज कर रही थी तब मैंने देखा कि नितिन
खिड़की से झांक कर मुझे देख रहा था! मुझे बहुत गुस्सा आया पर उस समये मैं
चुप रही! जैसे ही मुन्नी वहां से चली गई तब मैंने नितिन को बुला कर उसकी उस
हरकत पर बहुत डांटा! मेरी डांट सुन कर तो वह खिलखिला कर हंस पड़ा! जब मैंने
उससे हँसने का कारण पुछा तो वह कहने लगा कि यह नज़ारा तो वह रोज देखता रहता
था, जब उसकी मम्मी भी मेरा स्पंज करती थी तब भी वह इसी तरह झाँक कर यह सब
देखता रहता था! मेरे पूछने पर कि उसे यह सब देखने से क्या मिलता है, तो
उसने कहा कि उसे मेरे गोरे रंग का जिस्म, मेरे मम्में और उनके उपर लगी काली
काली निप्प्लें तथा नीचे चूत के उपर के भूरे रंगे के बाल देखने बहुत अच्छे
लगते हैं और वह उन्हें छूने कि इच्छा भी रखता है! यह सुन कर मैं दंग रह गई
और उसे एक बार फिर से डांट कर वहां से भगा दिया!

अगले दिन सुबहे मुझे बहुत पसीना आने कि वजह से जिस्म में खुजली हो रही थी
और उधर से मुन्नी का सन्देश आया था कि वह देर से आयेगी! जब मुझसे खुजली
बर्दास्त नहीं हुई, तब मैंने सोचा कि क्यों न नितिन का सहारा लिया जाए और
उसे ही स्पंज करने को कह दूं! उसने तो मुझे नग्न देखा हुआ ही था तो मुझे
उससे किसी बात कि शर्म नहीं आनी चाहिए! यह सोच कर मैंने नितिन को आवाज दी
और उसे मुन्नी के देर से आने के बारे में बताया तथा उसे आग्रह किया कि वह
मेरा स्पंज कर दे! यह सुन कर वह पहले तो हिचकचाया फिर पूछने लगा कि क्या
मैं उसे जिस्म की सब जगहें स्पंज करने दूंगीं! जब मैंने उसे हाँ कही तब वह
खुशी खुशी भाग कर बाथरूम में गया और स्पंज सारा सामान ले आया! फिर उसने आगे
बढ़ कर मेरे कपड़े उतारने शुरू किये! पहली मेरी कमीज उतारी, फिर मेरी ब्रा
उतारी, फिर मेरी सलवार और कच्छी भी उतार दी! अब मैं उसके सामने बिलकुल नग्न
थी! यही वह क्षण था जब से मेरे जीवन में बदलाव आया था और मैं शर्मसार से
बेशर्म बन गई थी तथा घर भर में कम कपड़ों में ही घूमना शुरू कर दिया था तथा
दीदी और नितिन के सामने अर्धनग्न भी हो जाती थी!

नितिन ने बड़े ध्यान से मेरी नग्नता को निहारा, मेरे मम्मों, निप्पलों तथा
चूत के बालों पर हाथ फेरा! फिर मुझे उल्टा कर के मेरी पीठ और टांगो को
स्पंज किया, मेरे चूतडों को जोर जोर से रगड़ कर स्पंज किया और मेरी गांड में
ऊँगली भी कर दी! जब मैंने उससे पुछा कि वह यह क्या कर रहा था तो उसने कहा
कि अंदर तक स्पंज कर रहा था! उसका इस तरह गांड में ऊँगली करना और मेरे
चूतडों को दबाना तथा मसलना मुझे बहुत अच्छा लग रहा था इसलिए मैंने उसे कुछ
देर ऐसा करने दिया! कुछ देर के बाद में उसने मुझे सीधा किया और मेरे सिर और
चेहरे, मेरी गर्दन, छाती, मम्मों, पेट, कमर, जाहंगों और टांगों को स्पंज
किया! इसके बाद उसने मेरी दोनों टांगो को चौड़ा कर उन के बीच में विराजमान
मेरी चूत को भी रगड़ते हुए स्पंज कर दिया! जब वह चूत का स्पंज कर रहा था तब
उसने उसमे भी ऊँगली करने कि कोशिश की पर मैंने उसे रोक दिया! फिर मैंने उसे
जल्दी से स्पंज खतम करने को कहा! इस के बाद उसने मुझे सूखे तौलिए से पोंछ
दिया और मेरे मम्मो और उन की निप्पलों को पकड़ कर मसला और थोड़ी देर बाद वह
मेरी चूत के बालों के उपर हाथ फेरने लगा! उस कि इस हरकत से मैं बहुत गर्म
होने लगी थी लेकिन अपनी बिमारी की कमजोरी को ध्यान में रखते हुए मैंने अपने
पर काबू रखा तथा उसे अलग हटने को और कपड़े पहनाने के लिए कहा! नितिन मेरे
साफ़ कपड़े निकाल लाया और सब से पहले उसने मुझे कच्छी पहनाई लेकिन उपर करने
से ने पहले मेरी चूत के बालों को अच्छी तरह मसला और एक बार फिर ऊँगली करने
कि नाकाम कोशिश की! इसके बाद उसने मुझे सलवार पहनाई! ब्रा पहनाने से पहले
उसने मेरे मेरे मम्मों को बड़े प्यार से मसला! उसका ऐसा करना मुझे बहुत
अच्छा लगा लेकिन बात आगे ना बढ़ जाये इसलिए मैंने उसे कहा कि वह अब बस कर दे
और बाकी के कपड़े पहना दे! मेरी बात सुन कर उसने मुझे ब्रा और कमीज पहना दी
तथा स्पंज का सामान उठा कर वहां से चला गया! जब वह जा रहा था तब मैंने
देखा कि उसका पजामा आगे से उठा हुआ था और कुछ गीला सा भी लग रहा था! जब वह
मेरे कमरे में वापिस आया तो उसने पेंट पहन रखी थी! मैंने उसे पूछा कि पेंट
पहन ली है क्या कहीं जाना है तो वह बोला नहीं, सपंज का पानी गिरने से पजामा
गीला हो गया था इसलिए बदल लिया! मैंने मुस्कराते हुए उसे देखा और कह दिया
कि मैं तो समझी थी कि कुछ लीक हो गया था! वह कुछ नहीं बोला और वहीँ चुपचाप
बैठा नीचे देखता रहा!

दुपहर को मुन्नी आई और उसने जब मुझे स्पंज के लिए पूछा तो मैंने उसे मना कर
दिया और कहा कि जब काम खतम कर के शाम को घर जाने से पहले कर देगी! क्योंकि
नितिन ने मेरे जिस्म को इतनी अच्छी तरह मसला और दबाया था इसलिए मुझे खाना
खाने के बाद तुरंत नींद आ गयी! शाम को मुन्नी ने मेरा स्पंज करके बाद जब
अपने घर चली गई तब नितिन मेरे कमरे में आ गया और मेरे पास बैठ गया! मैंने
जब पुछा कि क्या बात है तो उसने मेरे मम्मों पर हाथ रख कर उन्हें दबाने तथा
मसलने कि इजाजत माँगी!! मेरे हाँ कहने पर उसने बड़े प्यार से मेरी कमीज और
ब्रा उतर दी और मेरे पास लेट कर मेरे मम्मों पर हाथ फेरने लगा और मसलने
लगा! कुछ देर के बाद उसने मेरे मम्मों कि निप्पलों को बारी बारी अपने मुहँ
में डाल कर अहिस्ता अहिस्ता चूसने लगा! उस कि इस तरह मम्मों की प्यारी
चुसाई से मैं सातवें आसमान पर तैरने लगी, मेरी चूत में भी गुदगदी होने लगी!
तभी मुझे नितिन कि जाह्न्गों के बीच में कुछ हलचल महसूस हुई और पेंट भी
उभरी हुई सी लगी! मैंने जैसे ही उस तरफ अपना हाथ बढ़ाया तो नितिन ने मेरा
हाथ थाम लिया! तब मैंने उसे अपने से दूर कर दिया और कह दिया कि उसने तो
मेरा पूरा जिस्म अच्छी तरह से देख लिया है और उससे खेल भी लिया है लेकिन
अपना जिस्म अभी तक नहीं दिखाया! अब जब तक वह मुझको अपने शरीर नहीं दिखता और
उससे खेलने नहीं देता तब तक मैं उसे अपने मम्मों को छूने भी नहीं दूंगी!

मेरी यह बात सुन कर नितिन कुछ देर तक सोचता रहा और फिर कहा कि अगर मैं पूरी
नग्न हो कर उसके साथ लेटूंगी तभी वह भी नग्न हो कर मुझे अपना जिस्म
दिखायेगा और उससे खेलने देगा! मेरे मान जाने पर वह उसने अपनी टी शर्ट,
बनियान, जींस तथा जांघिया उतार कर मेरे सामने खड़ा हो गया! उसका शरीर बहुत
हष्टपुष्ट था और उसका लौड़ा (जो अभी पूरा खड़ा नहीं हुआ था) काफी तगड़ा लग रहा
था! इस हालात में उसके लौड़े कि लम्बाई लगभग ७ इंच और मोटाई १ १/४ इंच लग
रही थी! उसके टट्टे नीचे की ओर लटके हुए थे, उसके लौड़े के उपर का मांस पीछे
हटा हुआ था तथा सुपाडा बाहर निकला हुआ था! यह देख कर मुझसे रहा नहीं गया
और मैंने झट से उस के लौड़े को हाथ में ले लिया और उसे हल्के हल्के मसलने
लगी! कियोंकि मैंने किसी लौड़े को इतनी नज़दीक से पहली बार देखा और पकड़ा था
इसलिए मुझे कुछ अजीब लग रहा था! तभी वह एकदम सख्त हो कर तनने लगा! मैंने
घबरा कर लौड़े को एकदम छोड़ दिया! इस पर नितिन ने हँसते हुए कहा के डरो मत यह
काटेगा नहीं, यह तो खुश हो कर सलामी दे रहा था! उसका तन्ना हुआ लौड़ा बहुत
ही सुंदर दिख रहा था और मुझे उस पर बहुत प्यार आने लगा! उसका सुपाडा तो
एकदम चमक रहा था और १ १/२ इंच के गोल गोल दोनो लटके हुए टट्टे अब सिकुड कर
उपर कि ओर चिपक गए थे!

ऐसा मनभावन नज़ारा देख कर मेरी चूत में अब गुदगदी के साथ साथ खुजली भी होने
लगी थी, वह गीली भी होने लगी थी तथा उसमें से पानी रिसने लगा था जिस के
कारण मेरी कच्छी भी गीली होने लगी थी! मुझे पहली बार चूत और लौड़े के बीच का
अद्रश्य रिश्ता समझ में आने लगा था! मैंने नितिन कि लौड़े को हाथ में पकड़
कर आगे पीछे करने लगी (मुठ मारने लगी) जिससे नितिन एकदम घबरा गया और
सिकुड़ने तथा हिलने लगा! अब उसका लौड़ा मस्त हो गया था और उसकी लम्बाई ८ इंच
और मोटाई १ १/२ इंच हो गया था! मैंने नितिन से पूछे बिना उसके लौड़े को चूम
लिया और सुपाडे को जीभ से चाटने लगी! उसी समय नितिन को एक झटका लगा और उसके
सुपाडे के छिद्र में से पानी जैसी एक बूँद बाहर निकली! यह देख कर मैंने
नितिन की ओर देखा तो उसने इशारे से चाटने के कहा, तब मैंने उस बूँद को चाट
लिया! मुझे उस का स्वाद बहुत अच्छा लगा और मेरे से रहा नहीं गया! मैंने
अपने होंट सुपाडे के उस छिद्र पर लगा कर जोर से चूसा और उसके अंदर से सारा
पानी खींच कर पी गई! इसके बाद मैंने मुंह खोल कर सुपाडे को अंदर लेने कि
कोशिश की लेकिन उसे पूरा अंदर नहीं कर सकी इसलिए उसको फिर से चाटने लगी!

नितिन ने पांच मिनट तक मुझे अपने लौड़े के सुपाडे को चाटने दिया और फिर मुझे
अलग कर उसने मेरी सलवार और कच्छी उतार दी! कच्छी का गीलापन देख का उसने
मेरी जाहंगो के बीच में हाथ डाल कर चूत को छू कर देखा और गीले हाथ को अपने
मुहँ में रख कर चाटा और मेरी ओर देखा! जब मैंने पुछा कि स्वाद कैसा है तो
उसने कहा शरबत जैसा! फिर वह जल्दी से मेरे बिस्तर पर मेरी टांगों की तरफ
सिर कर के लेट गया और मेरी टांगो को चौड़ा कर के अपना मुहँ मेरी चूत पर लगा
दिया और मेरा रस खींच कर चूसने तथा पीने लगा! मैंने भी जब उसके लौड़े को
अपने चेहरे के पास देखा तो मेरा मुहँ भी अपने आप खुल गया और मैं उसका
सुपाडा चूसने लगी! कुछ देर के बाद नितिन ने मेरे छोले पर जीभ घुमाई तो
मुझको झटका लगा और मेरी चूत में से एकदम पानी छूटा जिसे नितिन ने पी लिया!
मैंने भी अपने मुहँ को और ज्यादा खोला तो नितिन का पूरा सुपाडा मेरे मुहँ
के अंदर चला गया और मैं उसे बड़े प्यार से चूसने लगी! दस मिनट तक ऐसे ही
दोनो कि चुसाई चलती रही और फिर जब मुझे एक और झटका लगा तो मैं चिल्लाई
आईईईईईई…………… और नितिन के मुहँ में पानी कि टंकी खोल दी! नितिन ने सारा
पानी पी लिया! मैं बहुत गरम होगी थी इसलिए नितिन के लौड़े को जोर से चूसने
लगी, तभी उसका लौड़े ने फडफडा कर अपना रस मेरे मुहँ में उड़ेल दिया! मुझे ऐसा
लगा कि उसने मेरे मुहँ में रबड़ी डाल दी है और मैं उसे मजे ले कर खा गई!
इसके बाद नितिन मेरे साथ लिपट के लेट गया और मुझ को किस किया! अब उसका
ढीलाढाला लौड़ा मेरी चूत के बालों से चिपका हुआ था और मेरे मम्में उसकी छाती
से चिपके हुए थे!

करीब एक घंटे के बाद हम अलग हुए और नितिन ने मुझे सिर्फ सलवार और कमीज पहना
दी और मेरी ब्रा तथा कच्छी को बाथरूम में डाल दी! बाद में उसने पजामा और
टी-शर्ट पहनी और रसोई से खाना लाया! हम दोनो ने मिल कर एक ही थाली में खाना
खाया! खाने के दौरान मैंने नितिन से कहा कि दीदी और जीजाजी के आने तक वह
मेरे ही कमरे में मेरे साथ ही सो जाये करे ताकि रात में मुझे बाथरूम जाने
आने में उसकी मदद मिल सकेगी! नितिन मान गया और बर्तन रसोई में रखने के बाद
वह मेरे पास आ कर लेट गया! उसने अपना एक हाथ मेरे मम्मों पर रख दिया और
मैंने भी उसके लौड़े को पकड़ लिया! हम बहुत देर तक बाते करते रहे और फिर सो
गए! बातों बातों में नितिन ने मुझसे चुदाई के बारे टोहने कि कोशिश की लेकिन
मैंने उसे टाल दिया और बात आगे नहीं बढ़ने दी! मैं अपनी कमजोरी कि वजह अभी
ऐसा कुछ नहीं करना चाहती थी जिस से मैं दुबारा बीमार पढ़ जाऊं! इसलिए अगले
चार दिन तक हमने अपनी दिनचर्या इसी तरह मसला मसलाई, चूसा चुसाई और शरबत
पीने तथा रबड़ी खाने तक ही सीमत रखी!

पांचवें दिन भी जब दीदी का फोन आया तो उन्होंने बताया कि वह लोग सात दिन
बाद अगले इतवार रात तक ही वापिस आ पाएँगे! क्योंकी जीजाजी बड़े हैं इसलिए वह
सभी रीति रिवाज समाप्त होने के बाद ही यहाँ से चलेंगे! दीदी ने मुझे एक
बार डाक्टर को बुला कर दिखने की सलाह भी दी! उनके ऐसा कहने पर मैंने डाक्टर
साहिब को फोन करा और उन्हें आ कर देख जाने को कहा, तो उन्होंने शाम को चार
बजे तक पहुचने का कहा! तब मैंने नितिन को कालेज में फोन कर के सब बता दिया
और कहा कि वह चार बजे से पहले ही घर पहुँच जाये!

शाम को ४ बजे डॉक्टर साहिब आये और मेरा चेकअप किया और कहने लगे कि मेरा
स्वस्थ पहले से बहुत बेहतर हो गया है और मैं अब उठ बैठ सकती हूँ तथा नहा धो
भी सकती हूँ! लेकिन मुझे अभी खाने पीने का ध्यान रखना होगा और आराम भी
करना होगा! मैं सिर्फ घर में चल फिर सकती हूँ! डॉक्टर साहिब के जाने के बाद
मैंने मुन्नी को कह दिया कि उसे अगले दिन से जल्दी आने कि जरुरत नहीं है
और जैसे पहले आती थी वैसे ही आया करे! मुन्नी के जाने के बाद मैं उठ कर
बाथरूम गई और बाद में नितिन के कमरे में उसके पास जा कर बैठ गई! नितिन
बिस्तर पर बैठा पढ़ रहा था तो मैं भी उसी के पास बैठे बैठे लेट गई! आधे घंटे
के बाद नितिन का काम समाप्त हो गया तो वह भी मेरे पास लेट गया और मेरे
चेहरे पर हाथ फेरने लगा! अचानक उसने मेरे चेहरे को दोनों हाथों से पकड़ कर
मेरे मुहँ को चूम लिया! मुझसे भी नहीं रहा गया और मैंने भी उसके होंठों पर
जोर से किस कर दिया! फिर क्या था नितिन मेरे साथ लिपट गया और होटों को
होटों से भिड़ा कर किस करने लगा! हम बहुत देर तक एक दुसरे कि जीभ को भी मुहँ
में ले कर बारी बारी चूसते रहे और किस करते रहे!

रात का खाना खाने के बाद हम दोनों नग्न हो कर एक ही बिस्तर पर लेट गए!
नितिन कभी मेरे मम्मों को चूसता और कभी हाथों से मसलता! बीच बीच में वह
अपने हांथों से मेरी चूत और चूत के बालों को सहला भी देता! मैं भी उसके
लौड़े और टट्टों से खेलती रही, कभी आगे पीछे हिलती, कभी मरोड़ती, कभी सुपाडे
को मॉस से ढक देती और कभी सुपाडे को बाहर निकल कर उसे जीभ से चाट लेती! इस
तरह आधे घंटे तक हम एक दुसरे से खेलते रहे और रोज कि तरह के एक दूसरे को
चूसते चसाते रहे! जब हम दोनों ने अपनी अपनी शरबत और रबड़ी की टंकियां खाली
कर दी तब सीधे हो कर एक दूसरे से लिपट के सो गए! सुबह नितिन कि नींद खुली
तो वह किचन में जा कर चाय बना लाया और हम दोनों ने चाय पी! फिर हम दोनों एक
ही बाथरूम में घुस गए और एक साथ टोयेलेट सीट पर बैठ कर मूता भी और हगा भी!
बाद में नितिन ने मुझे खूब साबुन लगा कर नहलाया, उसने हर जगह हाथ लगा लगा
कर मसला और मस्ती ली! मैंने भी उसे खूब साबुन लगाया और उसके लौड़े और टट्टों
को रगड़ रगड़ नहलाया! फिर हमने एक दुसरे को कपड़े पहनाये, दोनो ने मिल के
नाश्ता बनाया और खाया! कालेज जाने से पहले नितिन मेरे पास बाई कहने आया और
मेरे मेरे मम्मों को दबा कर मुझे किस किया! जब वह किस कर रहा था तब मैंने
भी उसके लौड़े और टट्टों को कस के दबा दिया, जिससे वह एक दम सी सी कर उठा
था!

नितिन के जाने के बाद मैं कुछ देर के लिए मैंने बिस्तर पर आराम किया और
मुन्नी के आने पर उठ कर उस को काम समझाया तथा किचन का काम समेटने में लग
गई! दुपहर को जब मुन्नी काम खतम कर के चली गई तो मैं नितिन का इन्तजार करते
हुए फिर बिस्तर पर लेटे लेटे सो गई! तीन बजे के बाद नितिन आया और मुझे
जगाया, तब हम ने खाना खाया और फिर उसीके कमरे में लेट कर एक दुसरे के अंगों
से छेड़खानी करते हुए सो गये! पांच बजे नींद खुली तो मैंने उठ के कपड़े पहने
और बाहर वाले कमरे आ कर बैठ गई! नितिन ने भी कपड़े पहने और पढ़ने बैठ गया!
साढ़े पांच बजे मुन्नी आई और उसने हमें चाय पिलाई, फिर रात का खाना बनाया और
बाकी का काम समेट कर चली गई! मुन्नी के जाने के बाद मैंने ब्रा और कच्छी
सहित अपने कपड़े उतार दिए और निकर तथा बनियान पहन कर नितिन के पास बिस्तर पर
लेट गई! नितिन पढाई के साथ साथ अपने एक हाथ से मेरे मम्मों और निप्पलों को
मसलता रहा!

जब वह पढ़ कर उठा तो मैंने खाना लगाया और हमने एक दूसरे को खिलाया! खाने के
दौरान नितिन ने कहा कि उस रात हम उसीके कमरे में सोते हैं! मेरे हाँ कहने
पर उसने बिस्तर को ठीक किया और अपने कपड़े उतार दिए! फिर मेरी निकर तथा
बनियान उतार कर मुझे भी नग्न कर दिया और मुझ से चिपट गया! बातों ही बातों
में नितिन ने बताया कि उसने मुझे और दीदी को छोड़ कर और किसी भी लड़की या औरत
को नग्न नहीं देखा था! मुझे और दीदी को वह अक्सर बाथरूम में नहाते हुए
देखा करता था! जब मैंने पूछा कि कैसे देखता था तो उसने बताया कि जब मैं और
दीदी नहाने जाती थीं तो अक्सर बाथरुम का दरवाज़ा आधा खुला छोड़ देती थीं और
वह उस में से झांक कर देखा करता था! उसने यह भी बताया कि दीदी तो चूत के
बाल हमेशा साफ़ रखती है और उसने उन्हें कई बार शेव करते हुए भी देखा था!
उसने बताया कि उसका किसी भी लड़की या औरत के साथ कोई भी सम्बन्ध नहीं था और
मैं पहली लड़की हूँ जिसे उसने छूआ था, हाँ उसने दीदी के पास लेटे लेटे उनके
मम्मों पर कई बार हाथ रख कर सोया था! उसने बताया कि लड़कियों से क्या और
कैसे करना होता है इसके बारे में उसे कुछ भी पता नहीं है और इसीलिए डरता है
कि अगर वह बाहर किसी लड़की से रिश्ता बनाए तो कहीं उसका मजाक ना उड़ जाये!
इसलिए उसने इस बारे में मुझे उसकी सहायता करने का आग्रह किया ताकि बात घर
में ही रहेगी! जब मैंने उससे पूछा कि किसी तरह कि सहायता चहिये तो उसने
मेरे साथ चुदाई करने की इच्छा प्रकट की!

मैंने उसे बताया कि मैं तो पहले कभी चुदी नहीं और मुझे इस बारे में जयादा
मालूम नहीं है तो उसने कहा कि वह भी पहली ही बार करगा! उसने बताया कि उसने
इन्टरनेट पर इस बारे में बहुत कुछ देखा हुआ है! तब मैंने भी उसे बताया कि
नेट पर तो मैंने भी बहुत कुछ देखा है पर कुछ करने को डर लगता है! इसके बाद
हम रोज कि तरह किस करते रहे और चूत और लौड़े को चूसते रहे! नितिन की बातों
और चुसाई के कारण मैं बहुत गरम हो गई और मुझ से रहा नहीं गया तो मैंने
नितिन के कान में कहा कि मेरी चूत में बहुत खुजली हो रही है और उसको मिटाने
के लिए कुछ करे! तब नितिन ने उठ कर मुझे सीधा किया और मेरी टांगों को चौड़ा
कर के मेरी चूत को चूसने लगा! वह बार बार मेरे छोले पर जीभ फेरने लगा जिस
की वजह से मैं आह्ह्ह आहह्ह्ह और सी सी सी की आवाजें निकालने लगी! मेरे
अंदर की आग बहुत जयादा भडकने लगी तब मैंने नितिन से कहा कि अब और सहा नहीं
जाता और अब थे आग तो तुम्हारी बौछार से ही बुझेगी! तब नितिन ने मेरी दोनों
टाँगे उपर उठा कर अपने कंधों पर रखा और अपने लौड़े को मेरी चूत के मुहँ पर
रख के उसे अंदर डालने के लिए धक्का लगाने लगा लेकिन उसका लौड़ा बार बार फिसल
जाता था!

कई कोशिशों के बाद जब नितिन को सफलता नहीं मिली तो उसने मुझसे मदद के लिए
इशारा किया! तब मैंने हाथ नीचे कर के नितिन के लौड़े को पकड़ कर चूत के मुहँ
पर लगा दिया और उसे धक्का लगाने को कहा! नितिन ने जैसे ही अहिस्ता से धक्का
लगाया तो उसका लौड़ा फिसला नहीं और मेरी चूत के मुहँ पर टिक गया! अगले
धक्के लगने से उसका सुपाडा मेरी चूत के अंदर घुसने लगा और मेरी चूत में
दर्द होनी शुरू हो गई! मैंने उस दर्द को बर्दाश कर लिया और मैंने नितिन को
धक्का लगाते रहने को कहा! जैसे ही नितिन ने एक और धक्का लगाया तो उसका आधा
सुपाडा चूत के अंदर चला गया और मेरी उईईईईई………………… कर के चीख निकल गई! मुझे
लगा कि मेरी चूत फट रही थी और वह दर्द मुझ से सहन नहीं हो रहा था! नितिन
ने पूछा भी कि क्या वह लौड़े को हटा ले लेकिन मैंने उसे मना कर दिया और
धक्का लगाने को कहा! इस बार नितिन ने थोड़ा जोर से धक्का लगाया और उसका पूरा
सुपाडा मेरी चूत के अंदर चला गया और मेरी तो उईईईईई………..माँ……….
उईईईईई………..माँ………. की चीखे निकल गई! मैंने नितिन को थोड़ा रुकने को कहा!

लगभग पांच मिन्ट रुकने के बाद मुझे कुछ आराम मिला तो मैंने नितिन को फिर से
धक्के लगाने को कह दिया! जब उसने अगला धक्का लगाया तो उसका लौड़ा मेरी चूत
में दो इंच घुस गया था और दर्द के मारे मेरी चीखें पूरे कमरे में गूँज गई!
मैं तड़पने लगी और मेरे आंसू निकल आये! इस बार नितिन रुका नहीं और एक और
धक्का मार कर अपने आहा लौड़ा मेरी चूत के अंदर घुसा दिया! अब तो मैं हाथ पैर
पटकने लगी, उईईईईई………..माँ………. उईईईईई………..माँ………. करके चीखें मारने लगी
और नितिन को गालियां भी देने लगी! नितिन का अब सुपाडे समेत चार इंच मेरी
चूत में था इसलिए वह कुछ देर के लिए रुक गया! जब मैं शांत हुई तो मुझे लगा
कि मेरी चूत से कुछ रिस रहा था, मैंने अपना हाथ अपनी चूत पर लगाया और
उँगलियाँ को खून से लथपथ देखा तो मैं घबराह गई लेकिन फिर सोचा कि जब ओखली
में सिर दिया है तो डरना किस बात का, यह तो होना ही था! इसके बाद नितिन ने
मुझे शांत देख कर एक और धक्का पूरे जोर से लगा दिया और पूरा का पूरा आठ इंच
का लौड़ा मेरी चूत के अंदर घुसा दिया! इस बार भी मुझे दर्द भी हुआ और मैं
उईईईईई………..माँ………. कर के चीखी भी लेकिन यह दर्द अब मुझे मीठा लगने लगा था!

अब नितिन ने अहिस्ते अहिस्ते धक्के लगाने शुरू कर दिए और कुछ ही देर में
ऊन्हे तेज भी कर दिए! मुझे आनंद आने लगा था और मैं भी उसके धक्कों का साथ
देने लगी थी! लगभग दस मिन्ट कि तेज चुदाई के बाद मेरी चूत एकदम सिकुड गई और
नितिन के लौड़े को जकड लिया! उसे धक्के लगाने में दिक्कत होने लगी थी तब वह
थोड़ी देर के लिए रुका और मेरे ढीले होने का इंतज़ार करने लगा! जब उसे
ढीलापन महसूस होने लगा तो वह फिर से धक्के लगाने लगा! इस बार वह बहुत तेज
धक्के लगा रहा था और मैं उसे और तेज और तेज शाबाश नितिन बहुत तेज़ी से करने
की आवाजें लगा रही थी! इसी तेज धक्कों में अचानक नितिन का लौड़ा फडफडाया और
मेरी चूत भी एक दम से सिकुड़ी और हम दोनों की एक साथ चीखे निकली
उन्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्………….. उन्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह………..
आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…………… आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…………… उईईईईईईईईई……………..
उईईईईईईईईई…………….. आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…………… आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…………… और नितिन
के लौड़े ने बरसात कर दी! एक बोछार, दो बोछार, तीन बोछार, चार बोछार, पांच
बोछार , छह बोछार………… और फिर मैं गिनती भूल गई! पता नहीं नितिन ने कितनी ही
बोछारें करी, मेरी चूत में तो जैसे बाढ़ आगई थी जिससे मेरी सारी आग बुझ गई!
हम दोनों बहुत थक गए थे इसलिए नितिन ने मेरी टाँगे अपने कंधों से उतारी और
निढाल हो कर मेरे ऊपर ही लेट गया, मेरी चूत भी ढीली होने लगी थी और उसका
सिकुड़ा हुआ लौड़ा अब टल्ली (सुकड़ा हुआ लौड़ा) बन कर मेरी चूत से बहार निकलने
लगा था! लगभग पांच मिन्ट के बाद नितिन का साँस में साँस आई तो वह मेरे ऊपर
से हटा तथा अपनी टल्ली को मेरी चूत से बाहर निकला!

हम दोनों उठ कर बाथरूम गए और एक दूसरे को धोया तथा साफ़ किया, तब मैंने देखा
कि नितिन कि टल्ली एकदम लाल हो गई है और उस पर नीले रंग कि नसें उभर आईं
हैं! जब मैंने नितिन को इस बारे में बताया तो उसने कहा कि इतनी रगडाई के
कारण तह तो होना ही था! फिर कमरे में आ कर नितिन ने मुझे लिटाया और मेरी
चूत को ध्यान से देखा और बताया के वह भी काफी खुल गई थी, उसके बाहर का भाग
बहुत लाल हो गया था तथा सूज गया था! अंदर का भाग गुलाबी रंग का होगया था!
इस चुदाई से मुझे इतना आनद तथा संतोष मिला था कि मैंने पागलों कि तरह नितिन
को अपने पास खींच कर लिटा लिया और उसे और उसकी टल्ली को चूमने लगी! नितिन
भी मुझे और मेरी चूत को चूमता रहा और फिर हम दोनों एक दूसरे को लिपट तथा
चिपट के नींद कि आगोश में खो गए!

अगले दिन क्या हुआ यह मैं आप को कुछ समय के बाद ही बताउंगी! तब तक कृपया
इंतज़ार कीजिये और इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दीजिए! बाई बाई ……………!
क्या नजारा था !










हाय दोस्तो, मैं हेनरी अमेरिका से ! मेरी उम्र तीस साल है और मैं एक मैगजीन
के लिए फोटो-शूट करता हूँ। इस काम में मेरे चार दोस्त भी सहायता करते हैं।
हमारा एक स्टूडियो है, हम लड़कियों की सेक्सी और बिना कपड़ों की तस्वीरें
शूट करके मैगजीन को बेच देते हैं। इससे हमें अच्छी कमाई हो जाती है।



मेरी बीवी का नाम जेनी है। वो छब्बीस साल की सुंदर और सेक्सी औरत है। वो तो
वैसे स्लिम है लेकिन उसके वक्ष और कूल्हे बड़े और जानलेवा हैं। मेरे
स्टूडियो के चारों दोस्त जिनके नाम टॉम, रोजर, हैरी और माइक हैं, मेरी बीवी
से कभी नहीं मिले हैं।



ये चारों भी मेरी उम्र के हैं, फोटो-शूट के लिए मॉडल खोजते हैं और उनकी
फोटो उतारते हैं। इसके काम के लिए हम मॉडल को पैसे देते हैं, कभी-कभी कोई
सेक्सी मॉडल राजी हो जाये तो सेक्स भी कर लेते हैं। लेकिन यह बहुत कम ही
होता है।



एक दिन हमारी शूटिंग तय हुई और हमने मॉडल भी तैयार कर ली थी। लेकिन एक दिन
पहले उसने इंकार कर दिया और हम लोग मैगजीन से अग्रिम भुगतान भी ले चुके थे।
उनको तय समय पर फोटो नहीं देने पर हम परेशानी में पड़ सकते थे।



इस मॉडल को मैंने ही तैयार किया था। इसलिए मुझे ज्यादा चिंता हो रही थी।
मैं रात में घर आकर यही सोच रहा था की कल कैसे फोटो-शूट होगा।



रात में सोने के वक्त जेनी मेरी बीवी मेरे पास आई। वो सेक्स के मूड में थी लेकिन मैं चिंता ग्रस्त था।



उसने पूछा- क्या हुआ?



मैंने उसे बताया कि कैसे एक मॉडल ने इन्कार कर दिया शूटिंग से !



उसने पूछा- तुम लोग मॉडल लड़की को कितना पैसा देते हो?



मैंने कहा- एक हजार डॉलर तक !



उसका मुंह खुला का खुला रह गया- इतने पैसे? इतने पैसे के लिए तो मैं कुछ भी
कर सकती हूँ ! क्या मैं तुम्हारे स्टूडियो के लिए मॉडल बन सकती हूँ?



मैंने कहा- बेकार की बातें मत करो। तुमको नहीं पता कि कैसी फोटो हम लेते हैं। कम कपड़ों में और कुछ नंगी फोटो भी। तुम ऐसा कर पाओगी?



उसने कहा- हजार डॉलर के लिए कुछ भी कर सकती हूँ मैं ! तुम चिंता मत करो,
अगर तुमको अपने दोस्तों के सामने मेरी फोटो उतारने में कोई दिक्कत नहीं है
तो मुझे कोई परेशानी नहीं है।



मेरे पास और कोई उपाय भी नहीं था, मैंने अपने दोस्तों को फ़ोन करके बता
दिया कि नई मॉडल मिल गई है और हम कल स्टूडियो में मिलेंगे।उनमें से किसी ने
भी जेनी को नहीं देखा था इसलिए कोई समस्या नहीं थी। फिर मैंने उसके साथ जम
कर सेक्स किया और सो गया।



अगले दिन सुबह जेनी ने मुझसे कहा- तुम अपने स्टूडियो जाओ। मैं तैयार होकर आती हूँ।



मैं स्टूडियो चला आया लेकिन भीतर भीतर डर रहा था कि मेरी बीवी ऐसा कर पायेगी या नहीं।



मैंने अपने बाकी दोस्तों से कहा- वो एक घण्टे में आ जाएगी। कैमरा, लाइट वगैरह तैयार रखो।



थोड़ी देर के बाद जेनी भी आ गई।



मैं तो पहचान ही नहीं पाया उसे पहले। काले रंग की मिनी स्कर्ट और सफ़ेद टॉप
में कहर ढा रही थी, बाल कटा लिए थे, शरीर से चिपके हुए टॉप में उसके चूचे
लगता था कि फाड़ कर बाहर निकल आ जायेंगे। कसी हुई स्कर्ट में उसकी पैंटी की
आउट लाइन नजर आ रही थी। मेरा तो देखते ही खड़ा हो गया। मेरे सारे दोस्तों
का भी यही हाल था।



एक ने धीरे से कहा- यह तो सेक्स-बम लग रही है !



हमने उसका स्वागत किया और बैठाया। हम अपने माडलों के लिए शराब का इंतजाम
रखते हैं। कई बार नई मॉडल अपने कपड़े उतारने में झिझकती है तो थोड़ी ड्रिंक
कर लेने से अपने को उन्मुक्त महसूस करती है।



मेरे दोस्त टॉम ने हम सभी के लिए एक एक पैग तैयार किया और सभी के हाथ में दे दिया।



पी लेने के बाद जेनी ने कहा- मैं तैयार हूँ ! काम शुरू किया जाये।



हमने अपने कैमरे तैयार किए। वो सोफे पर बैठ कर विभिन्न मुद्राओं में
तस्वीरें खिंचवाने लगी। हर मुद्रा पहले के मुकाबले ज्यादा कामुक होती जा
रही थी। हमने कुछ तस्वीरें पूरे कपड़ों में ली।



फिर उसने अपनी टांगें थोड़ी चौड़ी की, उससे उसके स्कर्ट के भीतर का नजारा
दिखने लगा। सफ़ेद पैंटी की झलक मिली, उस तरह से भी कई तस्वीरें ली। वो एक
व्यव्सायिक मॉडल की तरह मुद्राएं बना रही थी। मैं उसे देख देख कर उत्तेजित
होता जा रहा था। इसके बाद उसने अपनी टॉप के बटन खोलना शुरू किया। मैंने सभी
की ओर देखा। सभी की पैंट के सामने वाला हिस्सा धीरे-धीरे फूलता जा रहा था।



उसने अपनी टॉप उतार दी। भीतर उसने काली लेसी ब्रा पहनी हुई थी जिसमे उसकी
36″ की चूचियाँ बड़ी मुश्किल से समाई थी। इतने लोगों के सामने ऐसे तस्वीरें
खिंचवाने से वो भी उत्तेजित हो गई थी। उसके कड़े चुचूक ब्रा के ऊपर से ही
महसूस हो रहे थे। उसने अपने हाथ ऊपर उठा कर, खड़े होकर कई मुद्राएँ की और
हमने तस्वीरें ली।



इसके बाद उसने धीरे से अपनी स्कर्ट भी उतार दी। अब वो ब्रा और सफ़ेद पैंटी में थी।



क्या क़यामत लग रही थी काली ब्रा और सफ़ेद कसी हुई पैंटी में !



चूत के उभार तक महसूस हो रहे थे। पीछे घूमी तो जैसे उसके कूल्हे पैंटी फाड़
कर निकल जायेंगे ! सभी के चेहरे लाल हो गए थे। अपने को काबू करना मुश्किल
हो गया था। किसी को भी मालूम नहीं था कि यह मेरी बीवी है, सभी के मन में
उसे चोदने का ख्याल शायद आने लगा था।



उसने केवल ब्रा पैंटी में कई सेक्सी चित्र खिंचवाए। इसके बाद नग्न चित्रों की बारी थी।



हमने उसे कहा तो वो बोली- मैं तैयार होकर आती हूँ ! तब तक तुम लोग मेरे लिए एक और पैग तैयार करो।



फिर वो चेंजरूम में चली गई। हमने आपस में धीरे धीरे बात की। मेरे सभी दोस्त
एक बात पर सहमत थे कि जेनी जैसी सेक्सी और बिंदास लड़की उन्होंने आज तक
नहीं देखी थी। माइक तो अपने लंड को पैंट के ऊपर से ही दबा रहा था।



तब तक वो आ गई, उसने एक लाल रंग की एक लम्बी शर्ट पहन रखी थी। बाहर से
देखने से यही लगा कि उसने शर्ट के भीतर और कुछ नहीं पहन रखा है। बहुत
सेक्सी लग रही थी वो लाल शर्ट में। फिर उसने शर्ट के ऊपर के दो बटन खोल कर
आधी दिखाई देती हुई चूचियों के साथ कुछ चित्र दिए। फिर पीछे घूम के शर्ट
उठा के अपनी कसी हुई नंगे कूल्हों के कुछ चित्र दिए। उसने ब्रा-पैंटी उतार
दी थी।



फिर उसने शर्ट के सारे बटन खोल दिए और दोनों हाथ फैला दिए।



उफ़ ! क्या नजारा था ! बड़ी बड़ी तनी हुई चूचियाँ ! कड़े चुचूक ! सपाट पेट ! उसके नीचे बिना बालों की चूत !



जैसे मैं भी अपनी बीवी को पहली बार ऐसे देख रहा हूँ !



कई तस्वीरें हमने इस तरह ली। फिर उसने अपनी शर्ट उतार कर फेंक दी। अब वो
पूरी तरह से नंगी थी। सोफे पर बैठ कर कुछ मुद्राओं में तस्वीरें दी। अपने
टांगें चौड़ी करके, चूत को फैला कर !



मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था।



फिर वह एक घोड़ी की तरह अपने हाथ-पांव पर हो गई, जैसे वो हमसे कह रही हो- देख क्या रहे हो ? चोदो मुझे !



मुझसे अब सहन नहीं हुआ, कुछ सोच नहीं पा रहा था मैं ! मैंने अपना कैमरा
नीचे रखा और 30 सेकंड से भी कम समय में अपने सारे कपड़े उतार दिए और अपना
खड़ा लंड उसकी चूत में एक झटके में घुसा दिया। उसके पतली कमर को दोनों हाथों
से पकड़ के जोर जोर से उसे चोदने लगा। वो भी मस्ती में आकर चुदाने लगी।



मेरे दोस्त भी धीरे धीरे अपने कपड़े उतारने लगे। माइक ने अपना लंड उसकी मुँह
की ओर बढ़ाया तो वो उसे अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। टॉम नीचे से उसके
चुचूक चूसने लगा, हैरी उसकी पीठ सहला रहा था और रोजर उसके चूतड़ !



सारे नंगे थे। सभी के लंड खड़े। मैं सोच कर ही घबरा रहा था कि आज मेरी बीवी
की चूत के बारह बज जाएंगे। लेकिन मैंने उसे चोदना बंद नहीं किया। जल्दी ही
मैं उसकी चूत में झड़ गया। फिर रोजर ने उसे सोफ़े पर सीधा लिटा दिया और उसके
ऊपर चढ़ कर उसे चोदने लगा। हैरी का लंड वो मुँह में लेकर चूस रही थी। माइक
और टॉम उसके चूचे दबा रहे थे और चुचूक चूस रहे थे।



मैं बगल में बैठ कर अपनी बीवी की चुदाई देख रहा था। क्या चुद रही थी !



लंडों की बारिश… मुँह से आवाज निकल रही थी….. और जोर से …….. ओह ….. आह
………. फाड़ डालो मेरी चूत को ……….. ओह … आह … आह …….. मुंह में दूसरा लंड
डालो………. चूचियां दबाओ…….. मैं आज स्वर्ग में हूँ…….. चोदो मुझे……..



क्या नजारा था !



मेरी बीवी मेरी आँखों के सामने मेरे दोस्तों से चुद रही थी मजे ले ले कर !



रोजर उसकी चूत में झड़ गया। वो उठकर बाथरूम गई और अपनी चूत साफ़ करके आई। फिर
टॉम को अपनी चूत चूसने को कहा। मैं उसके होंठों को अपने होंठों में लेके
चूसने लगा। नीचे टॉम उसकी चूत को चूसने में लगा था। हैरी और माइक उसके एक
एक स्तन में लगे थे, रोजर झड़ने के बाद सुस्ता रहा था।



फिर टॉम की बारी आई उसे चोदने की। ऐसे हम पांचों ने मिल कर सारे दिन कई
तरीके से उसे चोदा। बहुत मजा आया। अन्त में हमने उसे पैसे दिए।



उसने पैसे लिए और बोली- इतना मजा आया कि पैसे लेने का दिल नहीं करता। अगली
बार मैं यह तुम लोगों के लिए मुफ़्त में कर दूंगी। बस मुझे ऐसे ही चोदना।



फिर यही सिलसिला चलने लगा।



आप लोगों को यह कहानी कैसी लगी ? मुझे जरूर बताइएगा।
शालू की बाहों में








आज मैं आपको अपनी एक सहेली की कहानी सुनाने जा रही हूँ।



मेरी एक बहुत ही प्यारी सहेली है शालिनी।



उसकी उमर कोई 28 साल, कद 5’6″, फ़ीगर 34-28-36, गुलाबी रंग, बड़ी-बड़ी आँखें,
गुलाबी होंठ, खूब फूले हुए स्तन, भरे-भरे चूतड़ और उनसे नीचे उतरती सुडौल
जांघें। बहुत ही प्यारी और सेक्सी लड़की है वो। हम दोनों कॉलेज से एक साथ
हैं और कोई बात एक दूसरे से छुपी हुई नहीं है। और हो भी कैसे सकती है
क्योंकि कॉलेज के ज़माने से ही हम दोनों के बीच एक रिश्ता और बन गया।



एक रोज़ मैं उसके साथ उसके घर गई तो घर मैं कोई नहीं था। हम दोनों मज़े से
बातें कर रहे थे और मैं उसे सता रही थी कि रविवार को तुम कपिल से मिली थी
तो तुम दोनों ने क्या किया था बताओ न मुझे !



शालू शरमा रही थी। कपिल उसका चचेरा भाई था और दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार
करते थे। दोनों अक्सर घूमने और पिक्चर देखने जाते थे। मेरे आग्रह करने पर
उसने बड़े शरमाते हुए बताया कि उस दिन कपिल ने उसका चुम्बन लिया था।



मैंने उसे लिपटा कर उसका गुलाबी गाल चूम लिया- हे बेईमान ! अब बता रही हो?



तो वो शरमा कर हंस दी।



हे शालू ! बता ना और क्या किया था तुम दोनों ने?



बस ना ! सिर्फ़ चुम्मा लिया था उसने ! वो शरमा कर मुस्कराई।



ऐ शालू ! बता न प्लीज ! कैसे किया था?



हट बदतमीज़ ! वो प्यार से मुझे धक्का देकर हंस दी।



मैं उसकी भरी-भरी जांघों पर सिर रख कर लेट गई, उसके गोल गोल दूध मेरे चेहरे
के ऊपर थे, मैंने धीरे से उसके दाएँ दूध पर उंगली फेरी- क्यों शालू ! ये
नहीं दबाये कपिल ने?



तो उसके चेहरा शरम से लाल हो गया और धीरे से बोली- हाँ !



तो मैंने उसका खूबसूरत गुलाबी चेहरा अपने दोनों हाथों में लेकर गाल चूम लिये- कैसा लगा था शालू?



हाय आइना ! क्या बताऊँ ! मेरी तो जैसे जान निकल गई थी जब उनकी गर्म-गर्म
ज़बान मेरे मुँह में आई ! मैं मदहोश हो गई ! उसने मुझे अपनी बाहों में ले
लिया और एकदम से अपना हाथ यहाँ रख दिया !



वो आइना का हाथ अपनी बाईं चूची पर रख कर सिसकी।



मैं तड़प उठी और बहुत मना किया पर वो न माने और दबाते रहे।



फिर शालू ?



आइना, बड़ी मुश्किल से कपिल ने मुझे छोड़ा।



शालू की बातें सुनकर मेरी हालत अजीब होने लगी, ऐसा लग रहा था कि जैसे पूरे जिस्म पर चीटियां दौड़ रही हों।



मेरा यह हाल देख कर शालू मुस्कुराई और मेरे गाल सहला कर बोली- तुमको क्या हो गया आइना?



तो मैंने शरमा कर उसकी जांघों में मुँह छुपा लिया। वो मेरी पीठ सहला रही थी
और मेरी हालत खराब हो रही थी क्योंकि मेरा चेहरा बिल्कुल उसकी चूत के ऊपर
था जो खूब गर्म हो रही थी और महक रही थी।



मैंने धीरे से उसकी चूत पर प्यार कर लिया तो वो सिसक उठी- आह ! आह आह ! आइना उफ़ ! नहीं ! ना ! प्लीज मत करो !



और मेरे चेहरा उठाया। हम दोनों के चेहरे लाल हो रहे थे, शालू के गुलाबी
होंठ कांप रहे थे, मेरे चेहरे को अपने हाथों में लेकर वो सिसकी- आइना !



और मैं भी अपने को ना रोक सकी और उसके गुलाबी कांपते होंठ चूम लिये।



एक आग सी लगी हुई थी हम दोनों के जिस्मों में !



मैं उसके होंठों पर होंठ रख कर सिसक उठी- शालू ! प्लीज मुझे बताओ न कपिल ने कैसे चूमे थे ये प्यारे होंठ?



तो अपने नाज़ुक गुलाबी होंठ दांतों में दबा कर मुस्कुराई- आइना, उसके लिये तो तुमको शालू बनना पड़ेगा।



मैं हंस दी !



उसके गाल चूम कर बोली- चलो ठीक है ! तुम कपिल बन जाओ।



शालू ने अपनी बाहें फैला दी तो मैं उनमें समा गई और वो मेरे गाल, होंठ, आँखें, नाक और गर्दन पर प्यार करने लगी।



तो मैं तड़प उठी- आह आ आह शा शाआलू ऐ ए मा नहीं ओह ओह ओह ऐ री उफ़ ये अह ओह ऊ
ऊम अह अह क्या कर रही हो अह है है बस बस नहीं न ऊफ और उसके होंठ मेरे
होंठों से चिपक गये और उसकी गुलाबी ज़बान मेरे होंठों पर मचलने लगी।



उसका एक हाथ जैसे ही मेरे दूध पर आया तो मेरी चीख निकल गई- नाआ हि आअ ह अह
शाअलु ऊफ़ मत करो प्लीज ये आअह क्या कर रही हो, तो मेरे होंठ चूस तु !



शालू बोली- वो ही तो कर रही हूँ जो कपिल ने मेरे साथ किया था।



वो मुझ से जुड़ गई और उसकी ज़बान मेरे होंठ खोल रही थी धीरे-धीरे और फिर अंदर
घुस गई तो मैं उसकी ज़बान की गर्मी से पागल हो उठी और उससे लिपट गई।



शालू ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरे दोनों दूध दबाते हुए मेरे होंठ
चूसने लगी। ऊफ़ उसकी ज़बान इतनी चिकनी, गर्म और इतनी लम्बी थी कि मेरे पूरे
मुँह में मचल रही थी और मेरे गले तक जा रही थी।



हम दोनों के चेहरे पूरे लाल हो रहे थे और थूक से भीग चुके थे। मुझे बहुत
मज़ा आ रहा था, मैं भी उसका साथ दे रही थी और उसका प्यारा सा गुलाबी चेहरा
हाथों में लेकर उसके होंठ और ज़बान चूस रही थी, सिसकार रही थी- आह अह शालू
अह अह हां अह !



आइना मेरी जान !



ऊफ़ शालू ! कितनी मज़ेदार ज़बान है तेरी ! इतनी लम्बी ! ऊफ़ ! सच्ची कपिल को मज़ा आ गया होगा !



आअह धीरे आइना ! अह आअह सच्ची आइना ! बहुत मज़ा आया था क्या बताऊँ तुझे ! आह धीरे से मेरे होंठ ! आह आइना !



उठो न प्लीज अब !



हम दोनों उठे तो फिर से मुझे लिपटा कर मेरे होंठ चूसने लगी और मेरे कुरते
की ज़िप खोली और मेरी ब्रा का हुक खोल दिया और मेरे मुँह में सिसकी- उतारो न
आइना प्लीज !



और मेरे हाथ ऊपर करके मेरा कुरता अलग कर दिया।



आअह शालू ! ये आह !



तो मेरे होंठ चूम कर सिसकी- कुछ न बोलो आइना ! सच्ची बहुत मज़ा आ रहा है !



मैं उसके सामने टॉपलेस बैठी थी, शर्म से मेरी बुरी हालत थी। मैंने अपने
दोनों हाथों से अपने भरे-भरे दूध छुपा लिये और देखा तो शालू ने भी अपना
कुरता और ब्रा अलग अपने बद्न से हटा दिए थे और मैं उसे देखती रह गई- उफ़ !
कितने प्यारे दूध हैं शालू के ! खूब बड़े बड़े बिल्कुल गुलाबी रंग, तनी हुई
लम्बे चुचूक ! जिनके आस पास लाल रंग का गोल घेरा !



उसने मुझे अपनी तरफ़ देखते हुए पाया तो मेरी आँखें चूम लीं, मेरे दोनों हाथ
मेरे दूधों पर से हटाये और अपने दूधों पर रख लिर और होंठ चबा कर सिसकी- ऊई
मां आह आह !



और फिर उसने मेरे दूध पकड़े तो मेरी जान निकल गई- आऐ आ आऐ र अह्ह अह आअह ऊओह ऊऊम आआअह नहीं शा…लू !



और मैंने भी उसके दूध ज़ोर से दबाये तो शालू भी मुझसे लिपट कर सिसक उठी- आईए ऊउइ उ अह अह अह धीरे आह आइना ! धीरे आह मेरे दूधु !



और मेरे होंठों पर होंठ रखे तो एक साथ हम दोनों की ज़बाने मुँह के अंदर घुस पड़ी।



उसकी लम्बी चिकनी और गर्म ज़बान ने मुझे पागल कर दिया और फिर मुझे लिटा कर
वो भी मेरे ऊपर लेट गई। हमारे दूध आपस में जैसे ही टकराये तो दोनों की
चीखें निकल पड़ी और हम दोनों झूम गईं और मेरी चूत रस से भर गई।



मैंने उसे अपने बदन से लिपटा लिया और उसकी चिकनी पीठ और नर्म-नर्म चूतड़ सहलाने लगी।



इस पर वो मेरे जिस्म पर मचलने लगी। मैंने उसका गुलाबी चेहरा उठाया तो उसकी आँखें नहीं खुल पा रही थी, बहुत हसीन लग रही थी शालू !



मैं उसके गाल और होंठ चूसने लगी, उसके गोल नर्म नर्म दूध मेरे सांसों से टकराते तो जैसे आग लग जाती।



मैंने उसको थोड़ा ऊपर किया तो उसके खूबसूरत चिकने गुलाबी दूध मेरे सामने थे
मैं अपने आप को रोक न सकी और उसकी लाल चूची पर ज़बान फेरी तो वो मस्ती में
चिल्ला पड़ी- आईई माँ ! मर जाऊँगी मैं ! आह अह ओह ऊओफ़ अह आइना !
आह अह्ह हाँ ! ये ये ये भी किया था अश… अह कपिल ने ! शालू बोली।



और मैंने उसका पूरा का पूरा दूध अपने मुँह में ले लिया तो मज़ा आ गया। और
शालू ने मेरा चेहरा थाम कर अपने दूधों में घुसा लिया और सिर झटक कर मचलने
लगी- आ आ इए आइना ! धीरे प्लीज ऊफ़ ऐई री ! माँ ! धीरे से ! न आअह ! बहुत
अच्छा लग रहा है ! आह ! पूरा ! पूरा चूसो न ! ऊफ़ मेरा दूध आह ! आइना सची
ऐईए ऐसे नहीं ! न काटो मत प्लीज ! उफ़ तुम तो अह कपिल से अच्छा चूसती हो !
आअह आराम से मेरी जान !



और वो मेरे दूध दबाने लगी- सच्ची कितनी नरम दूध हैं तेरे आइना ! मुझे दो न प्लीज आइना !



तो मैंने होंठ अलग किये उसके दूध से और देखा तो उसका दूध मेरे चूसने से लाल और थूक से चिकने हो रहे थे।



मैंने जैसे ही दूसरा दूध मुँह में लेना चाहा वो सिसक उठी- आह आइना ! प्लीज
मुझे दो न अपनी ये प्यारी प्यारी चूचियाँ ! कितनी मुलायम हैं !



उइ सच्ची ? मैं उसकी चूचियाँ मसलने लगी तो मैंने उसके गीले लाल होंठ चूम लिये। शालू मेरी चूचियाँ चूसने लगी !



और मेरे मुँह से आवाजें निकलने लगी- अह आअह शालू ! आराम से मेरी जान ! आह ! और ! और क्या किया था कपिल ने बताओ न !



तो मेरे दूध पर से अपने चिकने गुलाबी होंठ हटाते हुए मुस्कुरा कर बोली- और
कुछ नहीं करने दिया मैंने !तो मैंने पूछा- क्यों शालू ! दिल नहीं चाहा
तुम्हारा।



वो मेरे ऊपर से उतर कर अपने पैर फैला कर बैठी और मुझे भी अपने से चिपका कर
बिठा लिया और मेरे दूधों से खेलते हुए बोली- आइना, सच दिल तो बहुत चाहा
लेकिन मैंने अपने को बड़ी मुश्किल से रोका क्योंकि डर लग रहा था।



और मेरे दूधों पर ज़बान फेरने लगी तो मेरी आंखें बंद हो गई मज़े में !



मेरा हाथ उसके चिकने मुलायम पेट पर आया और मैं उसकी गोल नाभि में उंगली
घुमाने लगी- आह शालू ! सच्ची कितनी लम्बी ज़बान है तुम्हारी ! मैं क्या करूं
! आह मेरे दूध आऐ ए माँ ! अह्ह ! धीरे ! ना ! इतनी ज़ोर से मत नोचो मेरे
दूध ! आह आह ओह ऊ ओफ़ शालू प्लीज नहीं ! आअह हन हां अन बस ऐसे ही चूसे जाओ
बहुत मज़ा आ रहा है !



आइना ! मेरी जान, सच्ची कहां छुपा रखे थे ये प्यारे-प्यारे दूधु तूने ! तो
मैं शरम से लाल हो गई उसकी बात सुनकर और उसकी एक चूची ज़ोर से दबाई तो वो
चिल्ला कर हँस पड़ी- ऊऊउइ माँ आइना। तो मैंने उसके होंठ चूम लिये।



शालू !



हूम्म !



तुमने बताया नहीं कपिल और क्या कर रहा था या करना चाह रहा था?



तो वो शरमा कर मुस्कुराई- आइना ! वो तो !



हाँ बोलो ना शालू प्लीज !



तो शालू ने मेरा हाथ अपनी सलवार के नाड़े पर रखा और धीरे से बोली- वो तो इसे खोलने के मूड में था।



फिर शालू?



मैंने रोक दिया उसे !



क्यों शालू ? क्यों रोक दिया ? बेचारा कपिल !



शालू मेरे गाल पर ज़ोर से काट कर हंस दी- बड़ी आई कपिल वाली !



मैं भी ज़ोर से चिल्ला कर हंस दी- ऐ शालू बताओ ना क्यों रोक दिया?



तो वो मुसकराई, मैंने कह दिया- ये सब अभी नहीं !



और वो फिर मेरे दूध चूसने लगी ज़ोर ज़ोर से तो मैं पागल हो उठी- आह शालू ! आराम से मेरी जान !



और मैंने उसकी सलवार खोल दी तो वो चौंक गई और मेरा हाथ पकड़ कर बोली- ये ! ये क्या कर रही हो आइना?



तो मैंने उसके गीले रस भरे होंठ चूम लिये- मेरी शालू जान ! कपिल को नहीं तो मुझे तो दिखा दो !



वो मुझसे लिपट कर मेरे पूरे चेहरे पर प्यार करने लगी- हाय मेरी आइना ! कब से सोच रही थी मैं ! आह मेरी जान !



और एकदम से उसने मेरी सलवार भी खोल दी और उसका हाथ मेरी चिकनी जांघों पर था।



मैं मज़े में चिल्ला पड़ी- ऊऊउइ शा..आ..लू !! ना..आ.. हाय !!



वो मेरे होंठ चूस रही थी और मेरी जांघें सहला रही थी, मैं मचल रही थी- नहीं
शालू ! प्लीज मत करो ! आ..इ..ए ऊ..ऊ..ओ..फ़ ना..आ..ही ना ! ओह मैं क्या
करूँ !



और उसने एकदम से मेरी जलती हुई चूत पर हाथ रखा तो मैं उछल पड़ी- हाय रे ! आह ! ये क्या कर दिया शालू !



मुझे कुछ होश नहीं था, उसका एक हाथ अब मेरी चूत सहला रहा था जो बुरी तरह
गरम हो रही थी, दूसरे हाथ से वो मेरा दूध दबा रही थी और उसकी लम्बी गरम
ज़बान मेरे मुँह में हलचल मचा रही थी।



मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरी चूत झड़ने वाली है। मैंने उसे लिपटा कर उसके चूतड़ों पर हाथ फेरा तो वो मचल उठी और मैं भी मस्त हो गई।



उसकी सलवार भी उतर चुकी थी, अब हम दोनों बिल्कुल नंगी थी और बिस्तर पर मचल
रही थी- आह आइना ऊ..ओफ़ सच्ची, बहुत गरम चूत है ! उफ़ कितनी चिकनी है छोटी सी
चूत ! सच्ची बहुत तरसी हूँ इस प्यारी चूत के लिये मैं ! दे दो न प्लीज
आइना ये हसीन छोटी सी चूत मुझे !



हाय शालू ! मैं जल रही हूँ ! प्लीज ! आह ! मैं क्या करूँ !



मेरा पूरा जिस्म सुलग रहा था और मैंने शालू के नरम-गरम चूतड़ खूब दबाए और जब
एकदम से उसकी चूत पर हाथ रखा तो वो तड़प उठी- ऊ..ऊ..उइ नी..ईइ..ना कर !



और मैं तो जैसे निहाल हो गई, उसकी चूत बिल्कुल रेशम की तरह मुलायम और चिकनी थी, खूब फूली हुई !



मैं एकदम से उठी और उसकी चूत पर नज़र पड़ी तो देखती रह गई, बिल्कुल चिकनी चूत जिस पर एक बाल भी नहीं था, शालू की चूत लाल हो रही थी।



क्या देख रही हो आइना ऐसे?



तो मैं अपने होंठों न पर ज़बान फेर कर सिसकी- शालू !!



और एकदम से मैंने उसकी चूत पर प्यार किया तो वो उछल कर बैठ गई।



हम दोनों एक दूसरे की चूत सहला रहे थे।



शालू !



हू म्म !



कपिल को नहीं दी यह प्यारी सी चीज़ ?



तो वो शरमा कर मुस्कुराई- ऊँ..हूँह !



क्यों?



तो वो शरारत से मुस्कुरा कर बोली- तुम्हारे लिये जो बचा कर रखी है।



तो मैं हंस दी- हट ! बदतमीज़ !



सच्ची आइना !



वो मेरी चूत धीरे से दबा कर सिसकी- हमेशा सोचती थी कि तुम्हारी यह कैसी होगी?



तो मैं शरमा कर मुसकुराई- मेरे बारे मैं क्यों सोचती थी तुम?



पता नहीं बस ! तुम मुझ बहुत अच्छी लगती हो ! दिल चाहता है कि तुम्हें प्यार करूँ !



मैंने मुस्कुरा कर उसके होंठ चूम लिये- तो फिर आज से पहले क्यों नहीं किया यह सब?



तो मेरे दूधों पर चेहरा रख कर बोली- डर लगता था कि तुमको खो न दूँ कहीं !



मैंने उसे अपने नंगे बदन से लिपटा कर उसके होंठ चूस लिये, आहिस्ता से उसे
लिटा दिया और झुक कर चूत के उभार पर प्यार किया तो वो मचल उठी-
आअह्ह..आआह.. आइना ! मुझे दे दो न अपनी हसीन सी चूत !



ले मेरी जान ! मेरे प्यार ! और मैंने घूम कर अपनी चूत उसकी तरफ़ की तो शालू
ने मेरे नरम चूतड़ पकड़ कर नीचे किये और मेरी चूत पर होंठ रखे तो मैं कांप
गई- आह.. आह.. आह.. ऊऊ..औइ शालू !



और जैसे ही उसकी ज़बान मेरी चूत पर आई, मैं नशे में उसकी चूत पर गिर पड़ी और उसकी चूत पर प्यार करने लगी और चूसने लगी।



हम दोनों की चीखें निकल पड़ी, दोनों के चूतड़ उछल रहे थे।



शालू मेरे चूतड़ दबा रही थी और अचानक उसकी ज़बान मेरी चूत के छेद में घुस पड़ी
तो ऐसा लगा जैसे गरम पिघलता हुआ लोहा मेरी चूत में घुस गया हो, मैं चिल्ला
पड़ी उसकी चूत से झूम कर- आ..ऐ..ई..ए.. मा..अ मर जा..ऊँ..गी.. ना..
आ..अ..हि शलु अर्रर्रर्ररे.. आह.. ऊ..ओम ऊमफ ऊऊओह्ह ओह ओह ह्हह्है ह्हअ आआइ
मैं निकल रही हूँ.. ओ शालू !



मेरे चूतड़ उछलने लगे और शालू के चूतड़ भी मचले और वो भी मेरी चूत में
चिल्लाने लगी- आइना ! चूसो अ आआइउ अयययो मा अर्रर्रर्रे रीईईए आआआअह ऊफ़्फ़
आआह्ह ह्हाआआआ आआअह्हह्ह ह्हाआआअ !



और मुझे ऐसा लगा जैसे चूत से झरना बह निकला हो !



रोकते-रोकते भी मेरे गले से नीचे उतर गया !



यही हाल शालू का भी था।



हम दोनों के चेहरे लाल हो रहे थे, सांसें तेज़ तेज़ चल रही थीं और हम दोनों एक दूसरे से लिपट कर पता नहीं कब सो गये।



मज़ा आया पढ़ कर?
अकेली मत रहियो








मेरे पति एक सफ़ल व्यापारी हैं। अपने पापा के कारोबार को इन्होंने बहुत आगे
बढ़ा दिया है। घर पर बस हम तीन व्यक्ति ही थे, मेरी सास, मेरे पति और और मैं
स्वयं। घर उन्होंने बहुत बड़ा बना लिया है। पुराने मुहल्ले में हमारा मकान
बिल्कुल ही वैसे ही लगता था जैसे कि टाट में मखमल का पैबन्द ! हमारे मकान
भी आपस में एक दूसरे से मिले हुए हैं।



दिन भर मैं घर पर अकेली रहती थी। यह तो आम बात है कि खाली दिमाग शैतान का
घर होता है। औरों की भांति मैं भी अपने कमरे में अधिकतर इन्टर्नेट पर
ब्ल्यू फ़िल्में देखा करती थी। कभी मन होता तो अपने पति से कह कर सीडी भी
मंगा लेती थी। पर दिन भर वासना के नशे में रहने के बाद चुदवाती अपने पति से
ही थी। वासना में तड़पता मेरा जवान शरीर पति से नुचवा कर और साधारण से लण्ड
से चुदवा कर मैं शान्त हो जाती थी।



पर कब तक… !!



मेरे पति भी इस रोज-रोज की चोदा-चोदी से परेशान हो गए थे… या शायद उनका काम
बढ़ गया था, वो रात को भी काम में रहते थे। मैं रात को चुदाई ना होने से
तड़प सी जाती थी और फिर बिस्तर पर लोट लगा कर, अंगुली चूत में घुसा कर किसी
तरह से अपने आप को बहला लेती थी। मेरी ऐशो-आराम की जिन्दगी से मैं कुछ मोटी
भी हो गई थी। चुदाई कम होने के कारण अब मेरी निगाहें घर से बाहर भी उठने
लगी थी।



मेरा पहला शिकार बना मोनू !!!



बस वही एक था जो मुझे बड़े प्यार से छुप-छुप के देखता रहता था और डर के मारे मुझे दीदी कहता था।



मुझे बरसात में नहाना बहुत अच्छा लगता है। जब भी बरसात होती तो मैं अपनी
पेन्टी उतार कर और ब्रा एक तरफ़ फ़ेंक कर छत पर नहाने चली जाती थी। सामने
पड़ोस के घर में ऊपर वाला कमरा बन्द ही रहता था। वहाँ मोनू नाम का एक जवान
लड़का पढ़ाई करता था। शाम को अक्सर वो मुझसे बात भी करता था। चूंकि मेरे स्तन
भारी थे और बड़े बड़े भी थे सो उसकी नजर अधिकतर मेरे स्तनों पर ही टिकी रहती
थी। मेरे चूतड़ जो अब कुछ भारी से हो चुके थे और गदराए हुए भी थे, वो भी
उसे शायद बहुत भाते थे। वो बड़ी प्यासी निगाहों से मेरे अंगों को निहारता
रहता था। मैं भी यदा-कदा उसे देख कर मुस्करा देती थी।



मैं जब भी सुखाए हुए कपड़े ऊपर तार से समेटने आती तो वो किसी ना किसी बहाने
मुझे रोक ही लेता था। मैं मन ही मन सब समझती थी कि उसके मन में क्या चल रहा
है?



मैंने खिड़की से झांक कर देखा, आसमान पर काले काले बादल उमड़ रहे थे। मेरे मन
का मयूर नाच उठा यानि बरसात होने वाली थी। मैं तुरन्त अपनी पेण्टी और ब्रा
उतार कर नहाने को तैयार हो गई। तभी ख्याल आया कि कपड़े तो ऊपर छत पर सूख
रहे हैं। मैं जल्दी से छत पर गई और कपड़े समेटने लगी।



तभी मोनू ने आवाज दी,”दीदी, बरसात आने वाली है …”



“हाँ, जोर की आयेगी देखना, नहायेगा क्या ?” मैंने उसे हंस कर कहा।



“नहीं, दीदी, बरसात में डर लगता है…”



“अरे पानी से क्या डरना, मजा आयेगा.” मैंने उसे देख कर उसे लालच दिया।



कुछ ही पलों में बूंदा-बांदी चालू हो गई। मैंने समेटे हुए कपड़े सीढ़ियों पर
ही डाल दिए और फिर से बाहर आ गई। मोटी मोटी बून्दें गिर रही थी। हवा मेरे
पेटीकोट में घुस कर मुझे रोमांचित कर रही थी। मेरी चूत को इस हवा का मधुर
सा अहसास सा हो रहा था। लो कट ब्लाऊज में मेरे थोड़े से बाहर झांकते हुए
स्तनों पर बूंदें गिर कर मुझे मदहोश बनाने में लगी थी। जैसे पानी नहीं
अंगारे गिर रहे हो। बरसात तेज होने लगी थी।



मैं बाहर पड़े एक स्टूल पर नहाने बैठ गई। मैं लगभग पूरी भीग चुकी थी और
हाथों से चेहरे का पानी बार बार हटा रही थी। मोनू मंत्रमुग्ध सा मुझे आंखे
फ़ाड़ फ़ाड़ कर देख रहा था। मेरे उभरे हुए कट गीले कपड़ों में से शरीर के साथ
नजारा मार रहे थे। मोनू का पजामा भी उसके भीगे हुए शरीर से चिपक गया था और
उसके लटके हुए और कुछ उठे हुए लण्ड की आकृति स्पष्ट सी दिखाई दे रही थी।
मेरी दृष्टि ज्यों ही मोनू पर गई, मैं हंस पड़ी।



“तू तो पूरा भीग गया है रे, देख तेरा पजामा कैसे चिपक गया है?” मैं मोनू की ओर बढ़ गई।



“दीदी, वो… वो… अपके कपड़े भी तो कैसे चिपके हुए हैं…” मोनू भी झिझकते हुए बोला।



मुझे एकदम एहसास हुआ कि मेरे कपड़े भी तो … मेरी नजरें जैसे ही अपने बदन पर
गई। मैं तो बोखला गई। मेरा तो एक एक अंग साफ़ ही दृष्टिगोचर हो रहा था। सफ़ेद
ब्लाऊज और सफ़ेद पेटीकोट तो जैसे बिलकुल पारदर्शी हो गए थे। मुझे लगा कि
मैं नंगी खड़ी हूँ।



“मोनू, इधर मत देख, मुझे तो बहुत शरम आ रही है।” मैंने बगलें झांकते हुए कहा।



उसने अपनी कमीज उतारी और कूद कर मेरी छत पर आ गया। अपनी शर्ट मेरी छाती पर डाल दी।



“दीदी, छुपा लो, वर्ना किसी की नजर लग जायेगी।”



मेरी नजरें तो शरम से झुकी जा रही थी। पीछे घूमने में भी डर लग रहा था कि मेरे सुडौल चूतड़ भी उसे दिख जायेंगे।



“तुम तो अपनी अपनी आँखें बन्द करो ना…!!” मुझे अपनी हालत पर बहुत लज्जा आने
लगी थी। पर मोनू तो मुझे अब भी मेरे एक एक अंग को गहराई से देख रहा था।



“कोई फ़ायदा नहीं है दीदी, ये तो सब मेरी आँखों में और मन में बस गया है।”
उसका वासनायुक्त स्वर जैसे दूर से आता हुआ सुनाई दिया। अचानक मेरी नजर उसके
पजामे पर पड़ी। उसका लण्ड उठान पर था। मेरे भी मन का शैतान जाग उठा। उसकी
वासना से भरी नजरें मेरे दिल में भी उफ़ान पैदा करने लगी। मैंने अपनी बड़ी
बड़ी गुलाबी नजरें उसके चेहरे पर गड़ा दी। उसके चेहरे पर शरारत के भाव स्पष्ट
नजर आ रहे थे। मेरा यूँ देखना उसे घायल कर गया। मेरा दिल मचल उठा, मुझे
लगा कि मेरा जादू मोनू पर अनजाने में चल गया है।



मैंने शरारत से एक जलवा और बिखेरा …”लो ये अपनी कमीज, जब देख ही लिया है तो
अब क्या है, मैं जाती हूँ।” मेरे सुन्दर पृष्ट उभारों को उसकी नजर ने देख
ही लिया। मैं ज्योंही मुड़ी, मोनू के मुख से एक आह निकल गई।



मैंने भी शरारत से मुड़ कर उसे देखा और हंस दी। उसकी नजरें मेरे चूतड़ों को
बड़ी ही बेताबी से घूर रही थी। उसका लण्ड कड़े डन्डे की भांति तन गया था।
उसने मुझे खुद के लण्ड की तरफ़ देखता पाया तो उसने शरारतवश अपने लण्ड को हाथ
से मसल दिया।



मुझे और जोर से हंसी आ गई। मेरे चेहरे पर हंसी देख कर शायद उसने सोचा होगा
कि हंसी तो फ़ंसी… उसने अपने हाथ मेरी ओर बढ़ा दिये। बरसात और तेज हो चुकी
थी। मैं जैसे शावर के नीचे खड़ी होकर नहा रही हूँ ऐसा लग रहा था।



उसने अपना हाथ ज्यों ही मेरी तरफ़ बढाया, मैंने उसे रोक दिया,”अरे यह क्या
कर रहे हो … हाथ दूर रखो… क्या इरादा है?” मैं फिर से जान कर खिलखिला उठी।



मैं मुड़ कर दो कदम ही गई थी कि उसने मेरी कमर में हाथ डाल कर अपनी ओर खींच लिया।



“नहीं मोनू नहीं … ” उसके मर्द वाले हाथों की कसावट से सिहर उठी।



“दीदी, देखो ना कैसी बरसात हो रही है … ऐसे में…” उसके कठोर लण्ड के चुभन
का अहसास मेरे नितम्बों पर होने लगा था। उसके हाथ मेरे पेट पर आ गये और
मेरे छोटे से ब्लाऊज के इर्द गिर्द सहलाने लगे। मुझे जैसे तेज वासनायुक्त
कंपन होने लगी। तभी उसके तने हुआ लण्ड ने मेरी पिछाड़ी पर दस्तक दी। मैं मचल
कर अपने आप को इस तरह छुड़ाने लगी कि उसके मर्दाने लण्ड की रगड़ मेरे चूतड़ों
पर अच्छे से हो जाये। मैं उससे छूट कर सामने की दीवार से चिपक कर उल्टी
खड़ी हो गई, शायद इस इन्तज़ार में कि मोनू मेरी पीठ से अभी आकर चिपक जायेगा
और अपने लण्ड को मेरी चूतड़ की दरार में दबा कर मुझे स्वर्ग में पहुँचा देगा
!



पर नहीं … ! वो मेरे पास आया और मेरे चूतड़ों को निहारा और एक ठण्डी आह भरते
हुए अपने दोनों हाथों से मेरे नंगे से चूतड़ो की गोलाइयों को अपने हाथो में
भर लिया। मेरे दोनों नरम चूतड़ दब गये, मोनू की आहें भी निकलने लगी, मेरे
मुख से भी सिसकारी निकल गई। वो चूतड़ों को जोर जोर से दबाता चला गया। मेरे
शरीर में एक मीठी सी गुदगुदी भरने लगी।



“मोनू, बस कर ना, कोई देख लेगा …” मेरी सांसें तेज होने लगी थी।



“दीदी, सीधे से कहो ना, छिप कर करें !” उसके शरारती स्वर ने मुझे लजा ही दिया।



“धत्त, बहुत शरीर हो… अपनी दीदी के साथ भी ऐसा कोई करता है भला ?” लजाते हुए मैंने कहा।



“कौन सी वास्तव में तुम मेरी दीदी हो, तुम तो एटम-बम्ब हो” मोनू ने अपने दिल की बात निकाली।



मैंने उसे धीरे से दूर कर दिया। दीवार के पास पानी भी कम गिर रहा था। मैं
फिर से बरसात में आ गई। तेज बरसात में आस पास के मकान भी नहीं नजर आ रहे
थे। मेरी चूत में मोनू ने आग लगा दी थी। अचानक मोनू ने मुझे कस कर अपनी ओर
खींच लिया और अपना चेहरा मेरे नजदीक ले आया। मैं निश्चल सी हो गई और उसकी
आँखों में झांकने लगी। कुछ झुकी हुई, कुछ लजाती आंखें उसे मदहोश कर रही थी।
उसके होंठ मेरे लरजते हुए भीगे होठों से छू गये, कोमल पत्तियों से मेरे
होठ थरथरा गये, कांपते होंठ आपस में जुड़ गए। मैंने अपने आप को मोनू के
हवाले कर दिया। मेरे भीगे हुए स्तनों पर उसके हाथ आ गए और मेरे मुख से एक
सिसकारी निकल पड़ी। मैं शरम के मारे सिमट सी गई।



मेरे सीने को उसने दबा दबा कर मसलना जारी रखा। मैं शरम के मारे उससे छुड़ा
कर नीचे बैठने का प्रयास करने लगी। जैसे ही मैं कुछ नीचे बैठ सी गई कि मोनू
का कड़कता लण्ड मेरे मुख से आ लगा। आह, कैसा प्यारा सा भीगा हुआ लण्ड, एकदम
कड़क, सीधा तना हुआ, मेरे मुख में जाने को तैयार था। पर मैंने शरम से अपनी
आँखें बंद कर ली … और … और नीचे झुक गई।



मोनू ने मेरे कंधे पकड़ कर मुझे सीधे नीचे चिकनी जमीन पर लेटा दिया और अपने
पजामे को नीचे खिसका कर अपना तन्नाया हुआ लण्ड मेरे मुख पर दबा दिया। मैंने
थोड़ा सा नखरा दिखाया और अपना मुख खोल दिया। बरसात के पानी से भीगी हुई
उसकी लाल रसीली टोपी को मैंने एक बार जीभ निकाल कर चाट लिया। उसने अपने हाथ
से लण्ड पकड़ा और दो तीन बार उसे मेरे चेहरे पर मारा और लाल टोपी को मेरे
मुख में घुसेड़ दिया। उसका गरम जलता हुआ लण्ड मेरे मुख में प्रवेश कर गया।
पहले तो मुझे उसका भीगा हुआ लण्ड बड़ा रसदार लगा फिर उसका लाल सुपारा मैंने
अपने मुख में दबा लिया। उसके गोल लाल छल्ले को मैंने जीभ और होंठों से दबा
दबा कर चूसा।



हाँ जी, लण्ड चूसने में तो मैं अभ्यस्त थी, गाण्ड मराने के पूर्व मैं अपने
पति के लण्ड को चूस चूस कर इतना कठोर कर देती थी कि वो लोहे की छड़ की भांति
कड़ा हो जाता था।



अब बरसात के साथ साथ तेज हवा भी चल निकली थी। इन हवाओं से मुझे बार बार
तीखी ठण्डी सी लगने लगी थी। शायद उसे भी ठण्ड के मारे कंपकंपी सी छूट रही
थी।



“दीदी, चलो अन्दर चलें… ” वो जल्दी से खड़ा हो गया और मेरा भारी बदन उसने
अपनी बाहों में उठा लिया। उसने जवान वासना भरे शरीर में अभी गजब की ताकत आ
गई थी।



“अरे रे … गिरायेगा क्या… चल उतार मुझे…” मैं घबरा सी गई।



उसने धीरे से मुझे उतार दिया और दीवार फ़ांद गया। मैंने भी उसके पीछे पीछे
दीवार कूद गई। मोनू ने अपना कमरा जल्दी से खोल दिया। हम दोनों उसमे समा
गये। मैंने अपने आप को देखा फिर मोनू को देखा और मेरी हंसी फ़ूट पड़ी। हम
दोनों का क्या हाल हो रहा था। उसका खड़ा हुआ पजामे में से निकला हुआ लण्ड,
मेरा अध खुला ब्लाऊज… पेटीकोट आधा उतरा हुआ… मोनू तो मुझे देख देख कर बेहाल
हो रहा था। मैं अपना बदन छिपाने का भरकस प्रयत्न कर रही थी, पर क्या क्या
छुपाती। उसने मेरे नीचे सरके हुए गीले पेटीकोट को नीचे खींच दिया और मेरी
पीठ से चिपक गया। मेरे पृष्ट भाग के दोनों गोलों के मध्य दरार में उसने
अपना लण्ड जैसे ठूंस सा दिया। यही तो मैं भी चाहती थी … उसका मदमस्त लण्ड
मेरी गाण्ड के छेद पर जम कर दबाव डाल रहा था।



मैं अपनी गाण्ड के छेद को ढीला छोड़ने की कोशिश करने लगी और उसके हेयर ऑयल
की शीशी उसे थमा दी। उसे समझ में आ गया और मेरी गीली गाण्ड को चीर कर उसमे
वो तेल भर दिया। अब उसने दुबारा अपना लाल टोपा मेरे चूतड़ों की दरार में
घुसा डाला।



“मोनू… हाय रे दूर हट … मुझे मार डालेगा क्या ?” मैंने उसका लण्ड अपनी गाण्ड में सेट करते हुए कहा।



“बस दीदी, मुझे मार लेने दे तेरी… साली ने बहुत तड़पाया है मुझे !”



उसने मुझे अपने बिस्तर पर गिरा दिया और मेरी पीठ के ऊपर चढ़ गया। उसका लण्ड
गाण्ड के काले भूरे छेद पर जम कर जोर लगाने लगा। मैंने अपनी गाण्ड ढीली कर
दी और लण्ड को घुसने दिया।



“किसने तड़पाया है तुझे…” मैंने उसे छेड़ा।



“तेरी इस प्यारी सी, गोल गोल सी गाण्ड ने … अब जी भर कर इसे चोद लेने दे।”



उसका लण्ड मेरी गाण्ड में घुस गया और अन्दर घुसता ही चला गया। मुझे उसके
लण्ड का मजा आने लगा। उसने अपना लण्ड थोड़ा सा बाहर निकाला और एक जोर के
धक्के से पूरा फ़िट कर दिया। मुझे दर्द सा हुआ, पर चिकना लण्ड खाने का मजा
अधिक था।



“साली को मचक मचक के चोदूंगा … गाण्ड फ़ाड़ डालूंगा … आह्ह … दीदी तू भी क्या
चीज़ है… ” वो मेरी पीठ से चिपक कर लण्ड का पूरा जोर लगा रहा था। एक बार
लण्ड गाण्ड में सेट हो गया फिर धीरे धीरे उसके धक्के चल पड़े। उसके हाथों ने
मेरी भारी सी चूचियों को थाम लिया। कभी वो मेरे कड़े चुचूक मसलता और कभी वो
पूरे संतरों को दबा कर मसल देता था।



मेरी गाण्ड में भी मिठास सी भरने लगी थी। मैंने अपनी टांगे और फ़ैला ली थी।
वो भरपूर जोर लगा कर मेरी गाण्ड चोदे जा रहा था। मुझे बहुत मजा आने लगा था।
मुझे लगा कि कहीं मैं झड़ ना जाऊँ …



“जरा धीरे कर ना … फ़ट जायेगी ना … बस बहुत मार ली … अब हट ऊपर से !”



“दीदी, नहीं हटूंगा, इसकी तो मैं मां चोद दूंगा …” उसकी आहें बढ़ती जा रही थी। तभी उसने लण्ड गाण्ड से बाहर निकाल लिया।



“आह्ह्ह क्या हुआ मोनू … मार ना मेरी …”



“तेरी भोसड़ी कौन चोदेगा फिर … चल सीधी हो जा।” उसकी गालियाँ उसका उतावलापन
दर्शाने लगी थी। मैं जल्दी से सीधी हो गई। मुझे मेरी गाण्ड में लण्ड के
बिना खाली खाली सा लगने लगा था। मोनू की आँखें वासना से गुलाबी हो गई थी।
मेरा भी हाल कुछ कुछ वैसा ही था। मैंने अपने पांव पसार दिए और अपनी चूत
बेशर्मी से खोल दी। मोनू मेरे ऊपर चढ़ गया और मेरे शरीर पर अपना भार डाल
दिया, मेरे अधरों से अपने अधर मिला दिये, नीचे लण्ड को मेरी चूत पर घुसाने
का यत्न करने लगा।



मेरे स्तन उसकी छाती से भिंच गये। उसका तेलयुक्त लण्ड मेरी चूत के आस पास
फ़िसल रहा था। मैं अपनी चूत भी उसके निशाने पर लाने यत्न कर रही थी। उसने
मेरे चेहरे को अपने दोनों हाथों से सहलाया और मेरी आँखों में देखा।



“दीदी, तू बहुत प्यारी है … अब तक तेरी चुदाई क्यूँ नहीं की…”



“मोनू, हाय रे … तुझे देख कर मैं कितना तड़प जाती थी … तूने कभी कोई इशारा भी नहीं किया … और मेरा इशारा तो तू समझता ही नहीं…”



“दीदी, ना रे …तूने कभी भी इशारा नहीं किया … वर्ना अब तक जाने कितनी बार चुदाई कर चुके होते।”



“बुद्धू राम, ओह्ह्… अब चोद ले, आह घुसा ना… आईईईई मर गई … धीरे से … लग जायेगी।”



उसका मोटा लण्ड मेरी चूत में उतर चुका था। शरीर में एक वासना भरी मीठी सी
उत्तेजना भरने लगी। वो लण्ड पूरा घुसाने में लगा था और मैं अपनी चूत उठा कर
उसे पूरा निगल लेना चाह रही थी। हम दोनों के अधर फिर से मिल गए और इस जहां
से दूर स्वर्ग में विचरण करने लगे। उसके शरीर का भार मुझे फ़ूलों जैसा लग
रहा था। वो कमर अब तेजी से मेरी चूत पर पटक रहा था। उसकी गति के बराबर मेरी
चूत भी उसका साथ दे रही थी। कैसा सुहाना सा मधुर आनन्द आ रहा था।



आनन्द के मारे मेरी आँखें बंद हो गई और टांगें पसारे जाने कितनी देर तक
चुदती रही। उसके मर्दाने हाथ मेरे उभारों को बड़े प्यार से दबा रहे थे, सहला
रहे थे, मेरे तन में वासना का मीठा मीठा जहर भर भर रहे थे। सारा शरीर मेरा
उत्तेजना से भर चुका था। मेरा एक एक अंग मधुर टीस से लौकने लगा था। यूँ लग
रहा था काश मुझे दस बारह मर्द आकर चोद जाएँ और मेरे इस जहर को उतार दें।
अब समय आ गया था मेरे चरम बिन्दु पर पहुंचने का। मेरे शरीर में ऐठन सी होने
लगी थी। तेज मीठी सी गुदगुदी ने मुझे आत्मविभोर कर दिया था। सारा जहां
मेरी चूत में सिमट रहा था। तभी जैसे मेरी बड़ी बड़ी आँखें उबल सी पड़ी … मैं
अपने आपको सम्भाल नहीं पाई और जोर से स्खलित होने लगी। मेरा रज छूट गया था …
मैं झड़ने लगी थी।



तभी मोनू भी एक सीत्कार के साथ झड़ने को हो गया,”दीदी मैं तो गया…” उसकी उखड़ी हुई सांसें उसका हाल दर्शा रही थी।



“बाहर निकाल अपना लण्ड … जल्दी कर ना…” मैंने उसे अपनी ओर दबाते हुए कहा।



उसने ज्यों ही अपना लौड़ा बाहर निकाला … उसके लण्ड से एक तेज धार निकल पड़ी।



“ये… ये … हुई ना बात … साला सही मर्द है … निकला ना ढेर सारा…”



“आह … उफ़्फ़्फ़्फ़्… तेरी तो … मर गया तेरी मां की चूत … एह्ह्ह्ह्ह्ह”



“पूरा निकाल दे … ला मैं निचोड़ दूँ …” मैंने उसके लण्ड को गाय का दूध
निकालने की तरह दुह कर उसके वीर्य की एक एक बूंद बाहर निकाल दी। बाहर का
वातावरण शान्त हो चुका था। तेज हवाएँ बादल को उड़ा कर ले गई थी। अब शान्त और
मधुर हवा चल रही थी।



“अरे कहां चली जाती है बहू … कितनी देर से आवाज लगा रही हूँ !”



“अरे नहा कर आ रही हूँ माता जी …” हड़बड़ाहट में जल्दी से पानी डाल कर अपने बदन पर एक बड़ा सा तौलिया लपेट कर नीचे आ गई।



मेरी सास ने मुझे आँखें फ़ाड़ कर ऊपर से नीचे तक शक की निगाहों से देखा और
बड़बड़ाने लगी,”जरा देखो तो इसे, जवानी तो देखो इसी मुई पर आई हुई है ?”



“जब देखो तब बड़बड़ाती रहती हो, बोलो क्या काम है, यूँ तो होता नहीं कि चुपचाप बिस्तर पर पड़ी रहो, बस जरा जरा सी बात पर…।”



सास बहू की रोज रोज वाली खिच-खिच आरम्भ हो चुकी थी … पर मेरा ध्यान तो मोनू
पर था। हाय, क्या भरा पूरा मुस्टण्डा था, साले का लण्ड खाने का मजा आ गया।
जवानी तो उस पर टूट कर आई थी। भरी वर्षा में उसकी चुदाई मुझे आज तक याद
आती है। काश आज पचास की उमर में भी ऐसा ही कोई हरा भरा जवान आ कर मुझे मस्त
चोद डाले … मेरे मन की आग बुझा दे …
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